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किसान आंदोलन:आयोग ने पूछा- लोग परेशान हैं, आपने क्या किया?, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रास्ते खुलवाने पर आज मंथन

हरियाणा/ बहादुरगढ़/सोनीपत/रेवाड़ी7 दिन पहले
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किसान आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है - Dainik Bhaskar
किसान आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है
  • मानवाधिकार आयोग का नोटिस
  • रास्ते खुलवाने को सीएम ने बुलाई हाई लेवल मीटिंग

किसान आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने यूपी, हरियाणा, दिल्ली व राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। इसमें पूछा है, ‘किसानों के आंदोलन के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। उसे दूर करने को आपने क्या किया?’ आयोग ने यह संज्ञान बहादुरगढ़ के उद्योगपतियों की याचिका पर लिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना कराने के लिए सोनीपत जिला प्रशासन ने मंगलवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की।

डीसी ने कुंडली बॉर्डर पर जीटी रोड का दिल्ली-पानीपत मार्ग खोलने का अनुरोध किया। इस पर किसानों ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है। इस बीच सीएम ने बुधवार को अपने आवास पर हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इसमें रास्ते खुलवाने को लेकर मंथन होगा। बैठक में गृह मंत्री, मुख्य सचिव, एसीएस होम, डीजीपी जैसे सीनियर अफसर शामिल होंगे। क्योंकि, कुंडली बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर व खेड़ा बॉर्डर पर साढ़े 9 माह से किसान धरने पर बैठे हैं। ये तीनों ही दिल्ली में एंट्री के मुख्य पाॅइंट हैं।

आयोग ने मांगी रिपोर्ट- 9 हजार औद्योगिक इकाइयां प्रभावित

मानवाधिकार आयोग ने नोटिस में लिखा है, ‘आंदोलन के कारण लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। सीमाओं पर बैरिकेड्स लगा दिए जाते हैं। व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। परिवहन व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। करीब 9 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आंदोलन स्थलों पर कोरोना सुरक्षा मापदंडों का पालन भी नहीं किया जा रहा है।’ आयोग ने यूपी, हरियाणा, राजस्थान व दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, डीजीपी के साथ दिल्ली के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर 10 अक्टूबर तक कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

विज बोले- यह गदर है, आंदोलनों में कोई तलवार लेकर नहीं आता

गृह मंत्री अनिल विज ने कहा, ‘यह किसान आंदोलन नहीं है। इसको गदर कहा जा सकता है। आंदोलन में लोग तलवारें व लाठियां लेकर नहीं आते और न किसी को मारते हैं और न रास्ता रोकते हैं। आंदोलनों में भूख हड़ताल करके लोगों ने अपनी जान तक दी है।’ विज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने रास्ता खुलवाने के आदेश दिए हुए हैं। सीएम की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक रखी गई है। इसमें इस संबध में फैसला लिया जाएगा। विज ने पंजाब के सीएम पर निशाना साधते हुए कहा, ‘कैप्टन अमरिंदर हरियाणा व दिल्ली की शांति भंग करना चाहते हैं। उन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए इसे जिंदा रखा हुआ है।’ उधर, अमरिंदर ने कहा है कि पंजाब में अडानी-अंबानी का ज्यादा बिजनेस नहीं है। किसान आंदोलन से पंजाब का ही नुकसान हो रहा है।

किस बॉर्डर पर क्या है स्थिति

खेड़ा बॉर्डर- हरियाणा-राजस्थान बॉर्डर से रोज 40 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। रूट डायवर्ट होने से 3-4 घंटे ज्यादा लग रहे है। हाईवे पर 6 किमी. में पेट्रोल पंप, होटल-ढाबे ठप हैं।

टिकरी बॉर्डर- यहां से रोज 65 हजार वाहन गुजरते हैं। 5 मिनट के रास्ते के लिए 2 घंटे घूमकर आना पड़ता है। दो हजार उद्योग बंद हो चुके हैं। 20 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।

कुंडली बॉर्डर- यहां से रोज 60 हजार वाहन गुजरते हैं। 45 मिनट के सफर के लिए 3 घंटे लग रहे हैं। 8 किमी. में मॉल, शोरूम, ढाबे आिद बंद होने के कगार पर हैं। 15 हजार करोड़ का नुकसान।

सुप्रीम कोर्ट में 20 को है सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की महिला मोनिका अग्रवाल की याचिका पर केंद्र, यूपी व हरियाणा सरकार काे रास्ते खुलवाने का आदेश दिया हुआ है। मामले में 20 सितंबर को सुनवाई है। मंगलवार को किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने सोनीपत जिला प्रशासन के साथ बैठक में कहा कि किसान साइड में बैठे हैं। दिल्ली पुलिस ने पक्की दीवार व बैरिकेड्स से जीटी रोड बंद किया हुआ है।

कैप्टन के बयान का विरोध-

कैप्टन बोले- नुकसान अंबानी और अडानी का नहीं, पंजाब का हो रहा

पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर की दिल्ली-हरियाणा जाकर आंदोलन करने की अपील पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, ‘सत्तारूढ़ व विपक्षी दल घबरा गए हैं। मोर्चा सियासी कार्यक्रमों का विरोध करेगा। सांसद परनीत कौर के कार्यक्रम का भी किसान जमकर विरोध करेंगे।’ वहीं, अमरिंदर ने कहा कि धरनों से पंजाब को हो रहा नुकसान समझने के बजाय किसानों ने बयान के गलत अर्थ निकाले और इसे चुनाव से जोड़कर सियासी रंग दे रहे हैं। पंजाब में अडानी-अंबानी का ज्यादा बिजनेस नहीं है। इसलिए पंजाब में उनको फर्क नहीं पड़ेगा। नुकसान पंजाब को हो रहा है। बेमियादी आंदोलन से इंडस्ट्री बाहर जाने पर अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाएगी।

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