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किसानों पर लाठीचार्ज का मामला:सत्ता पक्ष भी एक सुर नहीं, विपक्ष हमलावर- डिप्टी सीएम ने की जांच की मांग, विज कह चुके- बिना लाठीचार्ज हुए जांच कैसी

हरियाणा16 दिन पहले
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जींद की जाट धर्मशाला में बैठक के दौरान पहुुंचे भाकियू व अन्य किसान संगठनों के प्रतिनिधि।
  • पंचकूला में सरकार की कमेटी किसानों से मिली, केंद्रीय मंत्री से मिलवाने का दिया भरोसा
  • 15 से 19 तक जिला मुख्यालयों में देंगे धरना, फिर भी मांगें न मानीं तो 20 को करेंगे रोड जाम

पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के मामले में प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। विपक्षी पार्टियां जहां सरकार पर हमलावर हैं, वहीं सत्ता पक्ष के नेता व मंत्रियों के बयानों में भी मतभेद नजर आ रहे हैं। भाजपा के कुछ नेता घटना की निंदा कर रहे हैं तो कुछ बचाव में हैं। मामले काे निपटाने के लिए तीन सांसदों की गठित कमेटी ने भी किसानों को शांत करने का प्रयास शुरू किया है। रविवार को पंचकूला में कमेटी ने किसानों से फिर बातचीत की है।

यहां फैसला लिया गया कि केंद्रीय कृषि मंत्री से मिला जाएगा, ताकि किसानों की जो भी बात है। वह स्पष्ट हो जाए, जबकि दूसरी तरफ डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने घटना को निंदनीय बताते हुए कहा कि वहां पर उन लोगों के विरुद्ध जांच होनी चाहिए, जिन्होंने पहले रोका और फिर उन्हीं ने अनुमति देने का काम किया। जबकि दूसरी तरफ प्रदेश के गृह मंत्री अनिल विज कह चुके हैं कि जब लाठीचार्ज नहीं हुआ है तो किसकी जांच कराई जाए। उनका तर्क है कि यदि कहीं लाठीचार्ज होता तो कहीं ने कहीं कोई वीडियाे जरूर सामने आता, एमएलआर भी कटती। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। इधर, विपक्ष तीन सांसदों की गठित कमेटी पर सवाल उठा रहा है।

मंगलवार को बिल पेश होने से पहले मंत्री से करेंगे मुलाकात

पंचकूला में कुछ किसान नेताओं के साथ सांसद धर्मबीर सिंह के साथ सांसद बृजेंद्र सिंह व नायब सैनी ने किसान नेताओं से बातचीत की। इसके बाद सांसद धर्मबीर सिंह ने बताया कि किसानो से जो बात हुई है, उससे सोमवार को प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ को अवगत कराया जाएगा। मंगलवार को किसानों से जुड़ा यह बिल संसद में पेश होना है। इसलिए कमेटी का प्रयास है कि उससे पहले कृषि मंत्री से मुलाकात कर ली जाए। धर्मबीर सिंह का कहना है कि किसानों को अध्यादेश के बारे में पूरी तरह जानकारी ही नहीं दी गई है।

गुरनाम बोले- 27 सितंबर से शुरू की जाएगी किसान रथ यात्रा

जींद की जाट धर्मशाला में भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ग्रुप और अन्य संगठनों ने फैसला बड़ा लिया। गुरनाम सिंह ने बताया कि मीटिंग में फैसला लिया कि भाकियू केंद्र सरकार के अध्यादेशों के खिलाफ 15 से 19 सितंबर तक हर जिले के मुख्यालयों पर धरने देंगे। फिर भी किसानों की मांग नहीं मानी तो 20 सितंबर को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक प्रदेश के सभी रोड 3 घंटे के लिए जाम कर दिए जाएंगे। अगर सरकार फिर भी हमारी बात नहीं सुनेगी तो 27 सितंबर से किसान रथ यात्रा निकाली जाएगी।

भाकियू की 2 मांगें : अध्यादेश लाने से पहले संशोधन जरूरी

गुरनाम सिंह ने बताया कि हमारी मुख्य दो मांगे हैं अगर सरकार अध्यादेश लागू करना चाहती है तो उसमें दो संशोधन किया जाए, फसल की बिक्री समर्थन मूल्य के आधार पर की जाए, अगर कोई समर्थन मूल्य से कम फसल खरीदेगा, तो उसको दंडित करने का कानून बनाया जाए, जब कोई प्राइवेट एजेंसी फसल की खरीददारी करेगी तो उसके भुगतान की जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए। मीटिंग में कई किसान यूनियनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

प्रदेश सरकार ने कोई अध्यादेश जारी नहीं किया: डिप्टी सीएम

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने किसानों से संबंधित कोई भी अध्यादेश जारी नहीं किया है। केंद्र सरकार तीन अध्यादेश लेकर आई है, जिनके तहत किसान की फसल एमएसपी अर्थात न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उसी तरीके से खरीदी जाती रहेगी जैसे कि अब खरीदी जा रही है, इस व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हुड्‌डा बोले- सिर्फ किसानों को गुमराह करने को बनाई कमेटी

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्‌डा ने बीजेपी की 3 सांसदों वाली कमेटी पर सवाल पर ही सवाल उठाए हैं। तीन अध्यादेश पर चर्चा के लिए बनाई गई कमेटी का मकसद सिर्फ किसानों को गुमराह करना है। इस कमेटी के पास ना कोई संवैधानिक शक्ति है और ना ही कोई राजनीतिक इच्छा शक्ति। अगर इसके पास कोई शक्ति है तो उसे सबसे पहले किसानों पर लाठी चलाने और चलवाने वालों पर कार्रवाई करनी चाहिए। कमेटी को फौरन किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने चाहिए। एक तरफ सरकार किसानों को मुकदमों का डर दिखाकर दबाने में लगी है।

खेमका बोले- किसानों की पेमेंट आढ़तियों के जरिए, समझ से परे

हमेशा सोशल मीडिया पर अपनी बात रख चर्चा में रहने वाले सीनियर आईएएस अशोक खेमका भी इस मामले में कूद गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- पंजाब-हरियाणा में धान एवं गेहूं की सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीद पर आढ़तियों को एक साल में लगभग 2,000 करोड़ कमीशन सरकारी खजाने से मिलता है। किसानों का भुगतान सीधे नहीं, बल्कि आढ़तियों के मार्फत किया जाता है। कुछ बातें समझ से परे होती हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आढ़तियों को मिलने वाले कमीशन को लेकर निशाना साधा है।

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