AAP सांसद और पंजाब के मंत्री पर तंज:BJP का ट्वीट- यो हरियाणा है ताऊ, अपने हक का पानी लेकर रहेगा

चंडीगढ़7 महीने पहले
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एसवाईएल के मुद्दे पर हरियाणा सरकार सुप्रीम कोर्ट में कंटेप्ट ऑफ कोर्ट याचिका दायर करने जा रही है। दूसरी ओर हरियाणा भाजपा ने पंजाब की आप सरकार के मंत्री हरपाल चीमा के बयान पर पलटवार किया है। हरियाणा भाजपा ने तंज कसते हुए कहा कि झूठ की चक्की देख के, दिया कबीरा रोय। दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय। सुशील गुप्ता जी की चाइनीज मार्का गारंटी और भगवंत मान का एसवाईएल को लेकर उग्र- क्षेत्रवाद। आप की तरफ से बस बहकावे की गारंटी पक्की है। यो हरियाणा है ताऊ अपने हक का पानी लेकर रहेगा।

बता दें कि पंजाब के मंत्री हरपाल चीमा ने एसवाईएल पर कहा था कि पानी की एक बूंद पंजाब से बाहर नहीं जाने दी जाएगी। जो भी कुर्बानी देनी पड़ेगी देंगे, जान कुर्बान कर देंगे, लेकिन एक बूंद बाहर नहीं जाने देंगे। जबकि हरियाणा में सांसद व आप प्रभारी सुशील गुप्ता बार बार कह रहे हैं कि 2024 में हरियाणा में आप की सरकार आने पर एसवाईएल का पानी लाया जाएगा। दोनों राज्यों में आप की सरकारें होंगी और हम पानी की गारंटी देंगे।

कंटेप्ट ऑफ कोर्ट डालने की तैयारी

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेप्ट ऑफ कोर्ट डालने की तैयारी की पुष्टि की थी और कहा था कि हम अपना अधिकार लेकर रहेंगे। वहीं हरियाणा के मंत्री कंवरपाल गुर्जर ने भी पंजाब सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई थी और कहा था कि अतिरिक्त नहीं हिस्से का पानी मांग रहे हैं।

यह है विवाद

भारत व पाकिस्तान के बीच विभाजन पूर्व रावी व ब्यास के अतिरिक्त पानी को अनुबंध द्वारा आबंटित किया गया। 19 सितंबर 1960 को पंजाब को 7.20 एमएएफ, राजस्थान को 8.00 एमएएफ व जम्मू कश्मीर को 0.65 एमएएफ पानी आवंटित किया गया था। हरियाणा के पंजाब से अलग होने के समय दोनों राज्यों के बीच पानी का बंटवारा नहीं हुआ।

24 मार्च 1976 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करके पहली बार हरियाणा के लिए 3.5 एमएएफ पानी की मात्रा तय की। एसवाईएल नहर के पानी हरियाणा को देने का समझौता हुआ था। 13 दिसंबर 1981 को नया अनुबंध हुआ, पंजाब को 4.22, हरियाणा को 3.50, राजस्थान को 8.60, दिल्ली को 0.20 एमएएफ व जम्मू कश्मीर के लिए 0.65 एमएएफ पानी की मात्रा तय की गई।

8 अप्रैल 1982 को इंदिरा गांधी की पटियाला के कपूरी गांव के पास नहर खुदाई के काम का उद्घाटन किया। विरोध के कारण पंजाब के हालत बिगड़ गए। 24 जुलाई 1985 को राजीव- लौंगोवाल समझौता हुआ। पंजाब ने नहर बनाने की सहमति दी। एसवाईएल नहर की खुदाई पर एक इंजीनियर की गोली मारकर हत्या कर दी।

नहर को पाटकर किसानों को उनकी जमीनें लौटा दी गई थीं।
नहर को पाटकर किसानों को उनकी जमीनें लौटा दी गई थीं।

समझौता सिरे नहीं चढ़ने पर हरियाणा ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 56 साल में पंजाब ने 7वीं बार इस प्रस्ताव को विधानसभा में पेश किया। पंजाब ने 1967, 1970, 1978, 1985, 1986, 2014 में भी प्रस्ताव पास किया, जबकि हरियाणा ने एसवाईएल पर 2000 से अब तक 5 बार प्रस्ताव पास किया।

कोर्ट ने पंजाब सरकार को नहर बनाने के आदेश भी जारी किए, परंतु पंजाब ने नहर बनाने की बजाए नहर पाट दी और विधानसभा में प्रस्ताव पास करके जमीनें किसानों को लौटा दी। 1 अप्रैल 2022 को पंजाब विधानसभा ने चंडीगढ़ पर पंजाब का अधिकार जताते हुए प्रस्ताव पास किया और गृह मंत्रालय के पास भेज दिया।

हरियाणा विधानसभा में प्रस्ताव पास करने की निंदा कर चुके हैं और कह चुके हैं कि यह दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी है और रहेगी। हरियाणा सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पंजाब के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश किया और चंडीगढ़ पर अपना अधिकार कायम रखा।