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कुंडली बॉर्डर:आंदोलन में पहुंचने वालों का फूल बरसाकर स्वागत, नए पंडाल लगाने में जुटे, शाम तक 8 हजार लोग जुटे

सोनीपत3 महीने पहले
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  • खापों ने झौंकी ताकत, इंटरनेट बंद होने से कॉल कर दे रहे मैसेज

26 जनवरी पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन पर भले ही असर पड़ा, लेकिन शनिवार को आंदोलन पहले की तरह पूरी रंगत पर लौट आया। सुबह अच्छी धूप खिलने पर किसानों के जत्थे सिंघु बाॅर्डर पर पहुंचने के लिए सुबह 9 बजे ही पंजाब, कैथल, जींद, सोनीपत, पानीपत, करनाल से ट्रैक्टर- ट्राॅली, बसों, कारों में आने लगे थे।

हरियाणा के कई जिलों से आंदोलन में पहुंचे किसानों ने बताया कि वह सुबह 6 बजे ही घर से निकल पड़े थे, जबकि पंजाब से पहुंचे किसानों ने कहा कि शुक्रवार रात को घर से चले थे। प्याऊ मनियारी के पास पंजाब व हरियाणा के युवाओं ने आंदोलन में पहुंचने वाले किसानों के जत्थों पर पुष्प बरसाकर स्वागत किया।

यहां 4 बाेरियों में फूल भरकर लाए गए थे। अंसल प्लाजा से सिंघु बाॅर्डर तक दोपहर को ट्रैफिक जाम की स्थिति रही। शाम तक करीब 800 ट्रैक्टर, 400 ट्रैक्टर जो ट्राॅलियां से जुड़े थे, 10 बसें, 230 काराें और 800 बाइकों पर सवार होकर करीब 8 हजार किसान पहुंचे। शाम को राई व मुरथल एरिया के गांवों के ग्रामीण वापस लौटे। इन्होंने कहा कि वह हर दिन धरने पर आएंगे।

गांव-गांव आंदोलन में पहुंचने की काॅल: चार दिन से इंटरनेट सेवा बंद होने पर किसान अब गांव-गांव पहुंचकर पंचायत कर रहे हैं। दहिया खाप से पहुंचे जयपाल, जयसिंह, महावीर ने कहा कि उनके करीब 40 गांव हैं। इन गांवों से करीब 150 ट्रैक्टर आंदोलन में पहुंचे हैं। अब संख्या बढ़ाने के लिए गांव-गांव में ड्यूटियां लगाई हैं।

गोहाना के लाठ, जौली, कटवाल व खेड़ी गांव में पंचायत करने के बाद किसानों ने हर घर से एक सदस्य आंदोलन में भेजने की अपील की है। शुक्रवार रात व शनिवार को करीब 160 ट्राॅलियां यहां से आईं। वहीं, बालियान खाप, आंतिल खाप ने अब हर घर से एक व्यक्ति आंदोलन में भेजने को कहा है। इन दोनों खाप से 70 ट्रैक्टर व ट्राॅलियों में किसान पहुंचे।

खरखौदा के झरौठ से महिलाओं का जत्था पहुंचा: दोपहर करीब 1 बजकर 37 मिनट पर खरखौदा के गांव झरौठ से महिलाओं का जत्था किसान आंदोलन में पहुंचा। बुजुर्ग महिलाएं अपने पोतों के साथ पहुंची थीं। महिलाएं किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगा रही थीं। महिलाओं ने कहा कि काले कानून वापस जरूर होंगे। महिलाओं ने कहा वह अपने पोते व पोतियों को किसानों के संघर्ष को भी दिखाने लाई हैं।

भीड़ बढ़ी तो नए पंडाल लगाने की जरूरत पड़ी

किसान आंदोलनों में भीड़ लगातार बढ़ रही है। जीटी रोड पर रात्रि ठहराव के लिए नए पंडाल लगाए जा रहे हैं। शनिवार को लुधियाना, कैथल के किसानों ने नए पंडाल लगाए। लुधियाना से आए बुजुर्ग किसान बिंदर ने कहा कि ठहराव के लिए पंडाल लगाया जा रहा है। 24 घंटे के लिए लंगर की व्यवस्था शाम से शुरू कर देंगे।

आंदोलन में आने के लिए पंजाब में एक बार फिर से गांव-गांव पंचायतें हो रही हैं। आंदोलन को तोड़ने की साजिश नाकाम रही, लोगों ने राकेश टिकैत के आंसू देखे तो मन भर आया। आरोप लगाया आंदोलन को तोड़ने का प्रयास हुआ, लेकिन सच्चाई सामने आने के बाद किसान आंदोलन और बल मिला है।

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