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  • 1. 41.69 Crore Grant Saved In Zilla Parishad Will Not Be Laps, It Will Work In The New Financial Year; Grant Could Not Be Spent Due To Disputes

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खुशखबरी:जिला परिषद में बच गई ‌41.69 करोड़ की ग्रांट नहीं होगी लैप्स, नए वित्त वर्ष में इससे होगा काम; विवादों के कारण नहीं खर्च हो पाई थी ग्रांट

जींदएक महीने पहले
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  • जिला परिषद सीईओ को मिली नए वर्ष में राशि खर्च करने की अनुमति, लैप्स नहीं होगी राशि
  • 27 नवंबर 2020 को सरकार ने जिला परिषद को 41.69 करोड़ का बजट किया था जारी

जिला परिषद में आई 41.69 कराेड़ रुपए की ग्रांट लैप्स नहीं होगी। चालू वित्त वर्ष में आई इस ग्रांट को जिला परिषद के सदस्य खर्च नहीं कर सके। यह राशि पूरी तरह से राजनीति की भेंट चढ़ गई। बाद में सरकार ने जिला परिषद, ग्राम पंचायतों पर प्रशासनिक अधिकारी लगाए दिए, जिसके चलते यह राशि खर्च नहीं हो सकी। अब यह राशि नए वित्तीय वर्ष 2021-22 में खर्च की जाएगी।

इसके लिए सरकार ने जिला परिषद के सीईओ को शक्तियां प्रदान की है और यह ग्रांट अब लैप्स नहीं होगी। इस राशि को नए वित्त वर्ष में विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा। इसके आदेश जारी कर दिए गए हैं। आमतौर पर हर साल जारी होने वाली ग्रांट 31 मार्च के बाद लैप्स हो जाती है। 27 नवंबर 2020 को सरकार ने जिला परिषद जींद को 41.69 करोड़ रुपए का बजट जारी किया था।

उसके बाद इस राशि को खर्च करने के लिए जिला परिषद की 2 फरवरी को हुई बैठक में प्रस्ताव भी पारित हो गए थे। सभी जिला पार्षदों से विकास कार्यों की सूची तक मांग ली गई थी, लेकिन 23 फरवरी को जिला परिषद का कार्यकाल पूरा हो गया और उसके बाद सरकार ने जिला परिषद ने सीईओ को प्रशासक नियुक्त कर दिया। इसके चलते यह राशि खर्च नहीं हो सकी।

अब 31 मार्च चालू वित्त वर्ष का अंतिम दिन है, ऐसे में हर साल पेंडिंग राशि लैप्स हो जाती थी। इसके लिए जिला परिषद सीईओ ने सरकार को पत्र लिखकर राशि लैप्स न करके उसे अगले वित्त वर्ष में विकास कार्यों पर खर्च करने की मांग की थी, जिसे मान लिया गया है। यह अब राशि नए वित्त वर्ष में खर्च की जाएगी।

इधर, डी प्लान के तहत वित्त वर्ष खत्म होने के 4 दिन पहले सरकार ने वापस मांगी राशि

डी प्लान के तहत भी हर साल विकास के काम कराए जाते हैं। इस साल फरवरी में यह राशि जिले को मिली थी। इसके तहत 10.51 करोड़ रुपए आए थे। इसमें से अब तक 6 करोड़ 59 लाख 99 हजार 319 रुपए की राशि खर्च की गई है।

इसमें 2 करोड़ 83 लाख 42 हजार 43 रुपए पिछले बकाया बिलों के भुगतान में खर्च किए गए। इसके अलावा 3 करोड़ 91 लाख 671 रुपए की राशि सरकार ने 4 दिन पहले ही वापस ले ली। इस बार लगभग पौने 3 करोड़ रुपए के ही विकास के काम कराए जा सके।

सरकार से मांग की गई थी लैप्स नहीं की जाए राशि

जिला परिषद के तहत आई ग्रांट लैप्स नहीं होगी। इसके लिए सरकार से मांग की गई थी कि लैप्स नहीं किया जाए और अगले वित्त वर्ष में खर्च करने की अनुमति दी जाए। इसे मान लिया गया है। इसे अगले वित्त वर्ष में खर्च किया जाएगा। दलबीर सिंह, सीईओ, जिला परिषद

डी प्लान के तहत 6.59 करोड़ रुपए हुए थे खर्च

इस बार 10.51 करोड़ रुपए की राशि डी प्लान के तहत आई थी। इसमें अब तक 6 करोड़ 59 लाख 99 हजार 329 रुपए खर्च किए गए हैं। कुछ राशि 27 मार्च को सरकार द्वारा वापस ले ली गई है। जोगेंद्र सिंह कालीरामण, परियोजना अधिकारी, जींद।

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