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जिले की आवोहवा बिगड़ी:आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत पर सिविल अस्पताल पहुंचे 10 बच्चे, 20 बुजुर्ग व 12 सांस रोगी

जींद22 दिन पहले
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जींद. सिविल अस्पताल मे चिकित्सक के कमरे के बाहर खड़े मरीज। - Dainik Bhaskar
जींद. सिविल अस्पताल मे चिकित्सक के कमरे के बाहर खड़े मरीज।

जिले की आबोहवा इतनी बिगड़ चुकी है कि अब जिला गैस चैंबर में तब्दील हो रहा है। सुबह और शाम की हवा भी अब जहरीली हो चुकी है। दिवाली के 48 घंटे बाद भी हवा में पटाखों का जहर कम नहीं हो पाया है। शनिवार को हवा में प्रदूषण का स्तर 419 रहा, जो सेहत के लिए हर लिहाज से खतरनाक है।

जिले में पटाखों के अलावा प्रदूषण बढ़ने का एक और कारण माना जा रहा है। रात के अंधेरे में कुछ फैक्ट्रियां चलती हैं, जिनमें टायर फूंके जाते हैं। इनसे निकलने वाला धुआं काफी जहरीला होता है। हालांकि डीसी नरेश नरवाल ने दावा किया कि है कि सभी टायर फैक्ट्रियों को बंद करवा दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ मुनीष यादव का कहना है कि फैक्ट्री संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। पिछले दिनों कई जगह पर रेड भी की थी, जिनकी रिपोर्ट आने के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार को छुट्टी के बावजूद सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में 10 बच्चे, 20 बुजुर्ग और 12 सांस के मरीज पहुंचे। इनकाे आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही थी। अस्पताल की इमरजेंसी में इन्हें भाप दी गई, जिसके बाद कुछ राहत महसूस हुई। पिछले चार दिनों से प्रदूषण का स्तर एकाएक बढ़ा है, जिसके साथ ही अस्पतालों में भी सांस के मरीजों का आंकड़ा एकदम बढ़ गया है।

अच्छी बात नहीं : प्रदूषण के मामले में जींद प्रदेश के टॉप चार जिलों में शामिल
यूं तो जींद शहर में बड़े उद्योग और फैक्ट्रियां नहीं हैं लेकिन प्रदूषण के मामलों में जींद प्रदेश के टॉप चार जिलों में आ रहा है। गुरुग्राम और रोहतक जैसे हालात जींद में भी हो चुके हैं। धान की पराली फूंकने के मामले इस बार पिछले साल की तुलना में कम हैं। पिछले साल इस समय तक 540 जगहों पर पराली में आग लगाई गई थी लेकिन इस बार फायर की 218 लोकेशन ही कृषि विभाग को मिली हैं।

बावजूद इसके प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण पटाखे जलाना ही माना जा रहा है, क्योंकि दो नवंबर तक एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) नॉर्मल से थोड़ा ऊपर था लेकिन 3 और 4 को खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो स्मॉग की चादर चढ़ गई और आंखों में जलन होने लगी। एलर्जी के मरीजों को काफी दिक्कतें हुई।

अस्थमा और दमा के मरीजों को हो रही काफी परेशानी
सिविल अस्पताल में शनिवार को करीब 500 ओपीडी हुई। इसमें 20 प्रतिशत मरीज सांस के और स्किन एलर्जी के थे। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह जहरीली हवा खतरनाक साबित हो रही है। अस्थमा और दमा के मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। शनिवार को धुएं के चलते सांस लेने में दिक्कत के चलते इमरजेंसी में करीब 10 बच्चे और 20 बुजुर्ग दाखिल हुए हैं।

इंजेक्शन व भाप देने के बाद उन्हें राहत मिली। यह पहले की अपेक्षा तीन गुना है। निजी अस्पताल में भी काफी संख्या में मरीज इस तरह की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं।

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