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सफेद मक्खी का कहर:15 हजार एकड़ में 25 से 50% तक नुकसान, 20 मन प्रति एकड़ निकलने वाली कपास 10 मन तक सिमटी

जींद5 दिन पहले
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उचाना. कपास की फसल में सफेद मक्खी व गुलाबी सुंडी के प्रकोप को रोकने के लिए स्प्रे करते किसान।
  • कृषि विशेषज्ञ बोले- कपास में 3 साल बाद हुआ सफेद मक्खी का कहर, जिन किसानों ने फसल में डाला ज्यादा यूरिया वहीं पर आई ज्यादा समस्या

जिले में सफेद मक्खी के कहर से कपास की फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो जिले में कुल रकबे में से 10 प्रतिशत रकबा ऐसा है जहां पर कपास की फसल को 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। जिले में बाकी रकबे में भी सफेद मक्खी की बीमारी से कपास के उत्पादन प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हैं। लेकिन जिले में 15 हजार एकड़ रकबा ऐसा हैं जहां कपास की 20 मन या इससे ज्यादा निकलने वाली पैदावार अब 10 मन तक ही सिमट कर रह गई है।

यानि सफेद मक्खी की बीमारी के कारण किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ है। जबकि सफेद मक्खी को खत्म करने के लिए किसान की लागत प्रति एकड़ 2 से 3 हजार रुपए तक और बढ़ गई है। खास बात यह है कि सफेद मक्खी से हुए नुकसान पर किसानों को बीमा राशि मिलने की भी उम्मीद नहीं है। क्योंकि फसल के जलभराव या फिर सूखा पड़ने की स्थिति में ही बीमा कंपनी बीमा क्लेम करती हैं।

जिले में सफीदों, पिल्लूखेड़ा ब्लॉक के एरिया को छोड़ दें तो बाकी लगभग सभी एरिया में किसानों द्वारा इस साल करीब 60 हजार हेक्टेयर में कपास की खेती की हुई है। फसल अच्छी खासी खेतों में खड़ी थी लेकिन पिछले दिनों में सफेद मक्खी के हमले के कारण फसल में अब रोजाना नुकसान हो रहा है। किसान महंगे-महंगे पेस्टीसाइड का छिड़काव कर रहे हैं। लेकिन इसके बाद भी सफेद मक्खी खत्म नहीं हो रही। जिले के जींद व जुलाना ब्लॉक में सफेद मक्खी ने कपास की फसल में सबसे ज्यादा कहर ढहाया है। फसल में हुए नुकसान पर किसानों द्वारा स्पेशल गिरदावरी करवा कर मुआवजे की मांग की जा रही है।

एक्सपर्ट व्यू... जहां किसानों ने यूरिया ज्यादा डाला वहीं सफेद मक्खी ने ढाया कहर

जिले के जींद व जुलाना ब्लॉक में सफेद मक्खी ने कपास की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। इन एरिया में कपास की 50 प्रतिशत फसल सफेद मक्खी के कारण खराब हो गई है। जिले में 3 साल बाद ऐसा हुआ है जब सफेद मक्खी के कारण कपास की फसल के व्यापक नुकसान हुआ है। जिन किसानों ने कपास की फसल में यूरिया ज्यादा डाला हुआ है वहां पर सबसे ज्यादा सफेद मक्खी ने हमला बोला है। इससे प्रति एकड़ मिलने वाला उत्पादन आधा ही रह गया है। -डाॅ. यशपाल मलिक, कृषि वैज्ञानिक ज्ञान-विज्ञान केंद्र पांडु-पिंडारा।

सरकार करवाए स्पेशल गिरदावरी : श्योकंद

जींद सहित प्रदेश के कई जिलों जहां पर किसानों द्वारा कपास की खेती की गई हैं वहां सफेद मक्खी के कारण फसल को व्यापक नुकसान हुआ है। कई जगहाें पर तो हालात यह हैं कि सफेद मक्खी के कारण प्रति एकड़ 2 से 3 मन ही कपास का उत्पादन हो पाना मुश्किल है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। सरकार को इस पर प्रदेश में स्पेशल गिरदावरी कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। -फूल सिंह श्योकंद, प्रदेशाध्यक्ष अखिल भारतीय किसान सभा हरियाणा।

इधर, उचाना क्षेत्र में सफेद मक्खी के साथ गुलाबी सुंडी का भी प्रकोप

क्षेत्र में कपास की फसल में सफेद मक्खी के साथ-साथ गुलाबी सुंडी भी काफी नुकसान पहुंचा रही है। किसान पासा, बलबीर, सुनील, महाबीर, बलवान ने कहा कि पहली बार गुलाबी सुंडी का प्रकोप कपास की फसल पर है। फसल को गुलाबी सुंडी सहित अन्य बीमारी से बचाने के लिए महंगा स्प्रे कर रहे हैं। इससे फसल पर खर्च होने वाली लागत भी बढ़ रही है। फसल का उत्पादन कम होने का डर भी किसानों को है। खंड कृषि अधिकारी डॉ. नरेश ने बताया कि सफेद मक्खी का प्रकोप एक पत्ते पर 6 से 8 की संख्या में है तो स्प्रे करने की कोई जरूरत नहीं है। यह इससे ज्यादा है तो हल्की डोज का इस्तेमाल करें। जिस तरह से नीम का तेल का स्प्रे करें। एक स्प्रे को दोबारा न करें।

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