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क्लेरिकल मिस्टेक:प्रदेश के 30 हजार विद्यार्थियों का पता नहीं लड़का है या लड़की

जींद8 महीने पहले
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  • उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने कॉलेजों को क्लेरिक मिस्टेक दूर करने के दिए निर्देश

प्रदेश के कॉलेजों में द्वितीय व तृतीय वर्ष में पढ़ने वाले 30 हजार विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनका उच्चतर शिक्षा निदेशालय को यह पता नहीं है कि वह लड़का है या लड़की? यह गलती संबंधित कॉलेजों द्वारा की गई है। विद्यार्थियों का डाटा ईआरपी पोर्टल पर अपलोड करते समय उनके जेंडर की डिटेल नहीं भरी गई, जिसके चलते अब निदेशालय को परेशानी हो रही है।

उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने संबंधित कॉलेजों को सूची जारी करके विद्यार्थियों के जेंडर ठीक करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के 75 सरकारी, एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में यह दिक्कत आई है। सबसे ज्यादा विद्यार्थियों के जेंडर का डाटा मिसिंग गुरुग्राम के राजकीय कॉलेज में है, जहां 2235 विद्यार्थियों का डाटा मिसिंग है। गुरुग्राम के सेक्टर-14 स्थित राजकीय महिला कॉलेज के 2174 छात्राओं का जेंडर डाटा मिसिंग है।

क्या आई दिक्कत

हाल ही में निदेशालय द्वारा द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों का सारा डाटा ऑनलाइन करने का काम शुरू कराया गया था। इसके लिए कॉलेज ईआरपी पोर्टल बनाया गया था। इस पर जुलाई से ही डाटा अपलोड किया जा रहा है, लेकिन डाटा फीड करते समय कई कॉलेजों से कई एंट्री नहीं चढ़ सकी। इसके चलते अब यह दिक्कत आई।

क्यों पड़ी अपडेट करने की जरूरत

पहली वजह: कॉलेजों में कई विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनकी दाखिला फीस व अन्य चार्ज नहीं लिए जाते हैं। मसलन लड़कियों से दाखिला फीस नहीं ली जाती है। एससी छात्र-छात्राओं को स्कालरशिप देनी होती है। साथ ही मेरिट में आए छात्रों को भी स्कालरशिप मिलती है, इसलिए उनका डाटा सही होना चाहिए। डाटा सही न होने की स्थिति में कई बार विद्यार्थी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।

दूसरी वजह: हाल ही में निदेशालय ने यूजी व पीजी के द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों को प्रमोट किया था, लेकिन उनकी फीस नहीं भरी थी। अब निदेशालय द्वारा द्वितीय व तृतीय वर्ष के छात्रों से वार्षिक फीस ली जानी है। इसमें विद्यार्थियों के नाम, लिंग, माता-पिता का नाम, कैटेगरी व अन्य जानकारी होना जरूरी है। इसे ठीक करने के लिए 15 अक्टूबर तक का समय दिया गया है ताकि निदेशालय द्वारा फीस के लिए शेड्यूल जारी किया जा सके।

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