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प्राॅपर्टी टैक्स:बजट में दिखाया 5 करोड़ का बकाया, डिफाॅल्टरों की सूची तैयार हुई तो 311 पर ही 14 करोड़ रु. से ज्यादा निकला

जींदएक महीने पहले
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  • 5 प्रतिशत ही जमा करते हैं टैक्स, कई सरकारी विभाग करोड़ों के बकायेदार, बीते चार साल से नहीं बंटे बिल

एक तरफ तो नगर परिषद के विकास के प्रस्ताव पैसे के अभाव में लटक जाते हैं दूसरी तरफ टैक्स की रिकवरी भी नहीं कर पाता है। प्रॉपर्टी टैक्स का करोड़ों बकाया है। 5 प्रतिशत लोग यह टैक्स भर रहे हैं। सिस्टम का कमजोरी का आलम यह है कि अभी न तो सर्वे का काम पूरा हुआ न तो बिल बंटे। नप को बकाये की ठीक जानकारी तक नहीं हैं। नगर परिषद हाउस की बैठक में प्राॅपर्टी टैक्स के 5 करोड़ के एरियर और 3 करोड़ की इस साल की डिमांड तय की गई थी।

जिला नगर आयुक्त डिफाॅल्टर के निर्देश पर डिफाॅल्टरों की सूची बनी तो 311 पर ही 14 करोड़ 89 लाख 76 हजार 402 रुपए एरियर और लगभग 1 करोड़ की इस साल की डिमांड निकली। इसमें डीसी रेजिडेंस सहित कई सरकारी विभाग भी शामिल हैं। यह एरियर पिछले दस सालों यानी 2010 से 2019 तक का बकाया है। इस दौरान 3 चेयरपर्सन, 7 ईओ बदल चुके हैं। लेकिन न तो किसी ने रिकवरी पर जोर लगाया न ही सर्वे कंपनी पर कार्रवाई की। 4 साल से तो प्राॅपर्टी टैक्स के बिल नगर परिषद नहीं बांट सकी है। प्राॅपर्टी टैक्स नहीं भरने वालों में सरकारी विभाग भी पीछे नहीं हैं। डीसी आवास, जेल, मिल्क प्लांट सहित कई ऐसे विभाग हैं, जिन पर करोड़ों रुपए का प्राॅपर्टी टैक्स बकाया है।

सर्वे का रेट चार गुना लेकिन बिल नहीं बंटे

चार साल पहले हुए सर्वे में एजेंसी को 64 रुपए प्रति यूनिट भुगतान किया गया। 2018-19 में सर्वे में यह राशि 267 रुपए हो गई। इसका टेंडर मुख्यालय स्तर पर हुआ। लेकिन अभी तक न तो बिल बंटे नहीं काम पूरा हुआ। कई वार्डों में सर्वे पूरा नहीं हुआ, ऐसे में प्रापर्टी आईडी लोगों की नहीं बनी।

अब नए सिरे से टेंडर की प्रक्रिया की तैयारी

नगर परिषद अब नए सिरे से बिल बांटने, मोबाइल नंबर लेन, डिमांड रजिस्टर व अन्य के लिए टेंडर की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नियम व शर्तें तय की जा रही हैं। टेंडर जारी किया जाएगा। इसके लिए 15 से 20 रुपए प्रति यूनिट खर्च होंगे। शहर में लगभग 55 हजार प्राॅपर्टी है। ऐसे में 15 लाख से अधिक राशि खर्च होगी।

(सीधी बात) डॉ. सुशील कुमार, जिला नगर आयुक्त

Q. प्राॅपर्टी टैक्स को लेकर नप क्या तैयारी है?
A. सभी नगर परिषद व पालिकाओं को डिफाॅल्टरों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
Q. अभी तक बिल भी नहीं बांटे गए हैं। लोग टैक्स कैसे भरेंगे?
A. इसके लिए जल्द नया टेंडर लगाया जा रहा है। भविष्य में कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
Q. कब तक बिल बंटने की संभावना है?
A. अगले माह के प्रथम सप्ताह में टेंडर लगने की उम्मीद है। उसके बाद जल्द ही बिल बंटवा दिए जाएंगे।

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