जिला परिषद का सूरत-ए-हाल / 54 माह 6 बैठक, विकास कार्यों के लिए बांटे 17 करोड़, 5 करोड़ रुपए अभी बंटने के इंतजार में

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  • पूरे समय विकास की बजाय राजनीति में उलझे रहे जिला पार्षद, पार्षद दो बार ला चुके हैं अविश्वास प्रस्ताव

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

जींद. ग्रामीण क्षेत्र के सुधार की जिम्मेदारी जिस जिला परिषद पर है उसका हाल यह है कि विकास कार्यों का खाका बनाने के लिए 54 माह में मात्र 6 ही बैठक हुई है। यहीं नहीं सरकार की ओर से भेजी गई ग्रांट में से अभी तक 5 करोड़ 38 लाख रुपए बांटे ही नहीं गए हैं। परिषद की आखिरी बैठक 22 अगस्त 2019 को हुई थी। उसके बाद कोई मीटिंग नहीं हुई।

जनवरी 2016 में चुनी गई इस जिला परिषद ने विधिवत 25 मार्च को चेयरमैन के शपथ लेेने के बाद काम शुरू किया था। तब से लेकर अब तक जिला परिषद के पास लगभग 22 करोड़ से अधिक की ग्रांट आ चुकी है। जिला परिषद के अनुसार इस ग्रांट में से अब तक 17 करोड़ रुपए ही विकास कार्यों के लिए आवंटित किए जा सके हैं। दूसरी ओर जिला पार्षदों की बात करें तो उनका अधिकतर समय विकास कार्यों की बजाए राजनीति करने में ज्यादा लगा है।

परिषद के गठन के एक साल बाद ही पार्षद चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गए थे। चेयरमैन और पार्षदों के बीच यह रस्साकसी 29 मार्च 2019 तक चलती रही। इस दौरान एक-दूसरे को पटकनी देने के लिए पार्षदों की पता नहीं कितनी ही बैठकें हुई लेकिन विकास कार्याें का खाका खींचने के लिए मात्र 6 बैठकें ही आयोजित हो पाईं।

जनवरी 2018 में बैठक में आए थे दुष्यंत
24 जनवरी 2018 को जिला परिषद की बैठक में दुष्यंत चौटाला बतौर सांसद हिस्सा लिया था। उनके साथ जिले के तीन तात्कालिक विधायक भी आए थे। उस समय दुष्यंत चौटाला विपक्ष के सांसद थे। इस बैठक का ग्रांट के गलत वितरण का आरोप लगाते कुछ पार्षदों ने बहिष्कार कर दिया था। इसके कुछ समय बाद ही तत्कालीन चेयरमैन पदमा सिंगला के खिलाफ पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लेकर आ गए थे।

राजनीति का अखाड़ा बनी जिला परिषद
जिला परिषद की राजनीति पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री व भाजपा नेता बीरेन्द्र सिंह का प्रभाव रहा है और उनके समर्थक ही चेयरमैन बनते रहे हैं। जनवरी 2018 से पहले तत्कालीन चेयरमैन पदमा सिंगला को भी पूर्व केन्द्रीय मंत्री बीरेन्द्र सिंह का करीबी माना जाता था। परंतु बाद में उन्होंने इनेलो जाॅइन कर ली थी। इसके साथ बीरेन्द्र समर्थक व भाजपा समर्थक पार्षदों ने पदमा सिंगला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। वर्तमान चेयरमैन भी बीरेन्द्र सिंह के समर्थक ही माने जाते हैं।

कब-कब आया अविश्वास प्रस्ताव

  • पहला : {12 अप्रैल 2017 को आया। एक मई 2017 को वोटिंग हुई पर तत्कालीन चेयरमैन पदमा सिंगला अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहीं।
  • दूसरा : 22 अगस्त 2018 को लाया गया। 4 सितंबर 2018 को वोटिंग होनी थी पर डीसी के नहीं होने के कारण बैठक रद्द हुई।
  • 3 अक्टूबर 2018 को दोबारा बैठक हुई जिसमें वोटिंग हुई। हाईकोर्ट की रोक के कारण गिनती नहीं हुई।
  • 17 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने गिनती के आदेश दिए।
  • 29 मार्च को पदमा सिंगला के खिलाफ गिनती होने पर अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया।
  • 2 अगस्त 2019 को नई अध्यक्ष प्रवीण घनघस ने शपथ ली।

6 को बुलाई बैठक : प्रवीण घनघस
प्रवीण घनघस, चेयरमैन, जिला परिषद, जींद ने कहा कि अगस्त में चेयरमैन का पद संभाला था। उसके बाद चुनाव और फिर कोरोना के चलते बैठक नहीं हो पाई। लॉकडाउन खुलते ही अब 6 जुलाई को बैठक बुला ली गई है। बैठक में ग्रांट का वितरण कर दिया जाएगा। 

चहेतों पर ही ग्रांट खर्च कर रहे चेयरमैन: पदमा सिंगला
पदमा सिंगला, पूर्व चेयरमैन, जिला परिषद, जींद ने कहा कि मेरे कार्यकाल में सबसे अधिक पांच बैठक हुई और सभी पार्षदों को समान रूप से ग्रांट वितरित की। वहीं अब चेयरमैन केवल अपने वार्ड व अपने चहेतों पर ही ग्रांट खर्च कर रहे हैं। 

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