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फर्जीवाड़ा:फर्जी दस्तावेज लगा 74 व्यक्ति ले रहे पेंशन, हाईकोर्ट में याचिका लगी तो 58 पर कार्रवाई

जींद8 महीने पहले
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जिले में वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रजाना कलां गांव में खुद के व बच्चों की उम्र के फर्जी दस्तावेज के सहारे 74 व्यक्ति 50 साल की उम्र में ही कई माह से पेंशन ले रहे हैं। इसका खुलासा विभाग से आरटीआई के तहत ली गई जानकारी से हुआ। इस पर शिकायतकर्ता ने मामले में कार्रवाई के लिए समाज कल्याण विभाग से लेकर कई अधिकारियों को शिकायत दी।

लेकिन कुछ भी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने इस पर 14 अक्टूबर को समाज कल्याण विभाग व शिकायतकर्ता को तलब किया तो विभाग ने गांव के 58 लोगों की वृद्धावस्था पेंशन तुरंत काट दी। इतना ही नहीं, अब विभाग फर्जी पेंशन लेने वालों से रिकवरी करने के लिए नोटिस देने की बात कह रहा है।

लापरवाही: जानकारी लेने के लिए ही नहीं कार्रवाई के लिए करनी पड़ी मशक्कत

मैंने जनवरी 2020 में जिला समाज कल्याण अधिकारी से सूचना के अधिकार के तहत पेंशन लाभार्थियों के बारे में सूचना मांगी। लेकिन विभाग ने जानकारी देने में आनाकानी की। उन्होंने डीसी के सामने अपील लगाई तो जानकारी मिली। इसमें सामने आया कि गांव के 74 व्यक्तियाें ने अपनी उम्र के और बच्चों की उम्र के फर्जी दस्तावेज लगवाकर पेंशन ले रहे हैं। अधिकांश कई साल से पेंशन ले रहे थे। मैंने डीसी को शिकायत दी।

डीसी ने इस पर समाज कल्याण विभाग को जांच कर कार्रवाई करने के आदेश दिए लेकिन विभाग ने कई माह बीत जाने के बाद भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर मैंने सीएम विंडो से लेकर कई जगहों पर शिकायत की। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर मैंने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका लगाई है जिस पर 14 अक्टूबर को सुनवाई होनी है। अब सुनने में आ रहा है कि विभाग ने गांव के काफी लोगों की पेंशन काट दी है ताकि हाईकोर्ट में इस पर जवाब दिया जा सके। मुझे विभाग से जो सूचना मिली है उसमें 74 ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने फर्जी दस्तावेज पर पेंशन बनवाई हुई है। (जैसा दलबीर बैरागी ने दैनिक भास्कर संवाददाता को बताया)

सवाल ये कार्रवाई में इतनी देरी क्यों

रजाना कलां गांव में जब बार-बार काफी लोगों की फर्जी पेंशन बनने की शिकायत की जा रही थी तो विभाग ने उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। विभाग की इस ढिलाई पर सवाल उठ रहे हैं कि इस पेंशन फर्जीवाड़े में विभाग के कर्मचारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। दूसरा बड़ा सवाल यह है कि जिन लोगों की पेंशन बनाई गई उनकी उम्र के दस्तावेजों को विभाग ने क्रॉस चेक क्यों नहीं किया।

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