उपलब्धि:कमाई के मामले में रोडवेज का जींद डिपो नंबर वन पर पहुंचा, प्रतिदिन औसतन 13 लाख रु. हो रही आमदनी

जींद5 दिन पहले
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रोडवेज का जींद डिपो।फोटो | - Dainik Bhaskar
रोडवेज का जींद डिपो।फोटो |
  • 163 बसों में 25 हजार से ज्यादा यात्रियों को रोजाना दी जा रही परिवहन सुविधा
  • कमाई के मामले में जींद के बाद दूसरे नंबर पर करनाल, तीसरे नंबर पर रोहतक और चौथे नंबर पर कैथल डिपो

कोरोना काल में यात्रियों को बेहतर सुविधा देते हुए कमाई के मामले में रोडवेज का जींद डिपो प्रदेश में नंबर वन पर पहुंच गया है। डिपो की 163 बसें हर रोज 25 हजार से ज्यादा यात्रियों को परिवहन सुविधा दे रही हैं, इससे डिपो को प्रतिदिन 13 लाख रुपए की आमदनी हो रही है। कमाई के मामले में जींद के बाद दूसरे नंबर पर करनाल, तीसरे नंबर पर रोहतक और चौथे नंबर पर कैथल डिपो है। डिपो की बसों की रिसिप्ट 32 रुपए है यानि कि डिपो को प्रति किलोमीटर पर 32 रुपए की आमदनी हो रही और केएमपीएल (किलोमीटर प्रति लीटर) भी चार से ज्यादा की है, यानि कि एक लीटर तेल में बसें चार किलोमीटर से ज्यादा कवर कर रही हैं।

पिछले साल की तुलना में इस साल डिपो की सर्विस में सुधार है। यूं तो परिवहन विभाग का रोडवेज महकमा घाटे में ही चल रहा है लेकिन नए साल में विभाग की आमदनी में कुछ इजाफा हुआ है। 14 जनवरी को जारी सूची के अनुसार कमाई के मामले में जींद डिपो पहले नंबर पर रहा। जींद डिपो की 163 बस ऑनरूट रही हैं, जिन्होंने दिनभर में 39 हजार 663 किलोमीटर तय किए। इस दौरान डिपो को 12 लाख 99 हजार 632 की आमदनी हुई। डिपो की रिसिप्ट भी 32 रुपए प्रति 77 पैसे प्रति किलोमीटर रही। वहीं केएमपीएल भी 4.69 किलोमीटर प्रति लीटर रहा है। जींद डिपो की इस उपलब्धि पर महाप्रबंधक गुलाब सिंह दूहन ने चालक-परिचालकों और प्रबंधन की सराहना की। जींद डिपो के बाद दूसरे नंबर पर करनाल, तीसरे पर रोहतक, चौथे पर कैथल, पांचवें पर चंडीगढ़ डिपो, छठे पर भिवानी, सातवें पर हिसार, आठवें नंबर पर नारनौल, 9वें पर पानीपत, 10वें पर सिरसा, 11वें पर पंचकूला, 12वें पर दिल्ली, 13वें पर अम्बाला, 14वें पर फतेहाबाद, 15वें पर कुरुक्षेत्र, 16वें पर रेवाड़ी, 17वें पर पलवल, 18वें पर झज्जर, 19वें पर नूंह, 20 नंबर पर यमुनानगर डिपो है। इसके बाद सबसे नीचे सोनीपत, फरीदाबाद और गुरुग्राम डिपो हैं।

नए साल से सभी शिक्षण संस्थान कोरोना के कारण बंद किए गए हैं तो बसों में फ्री और रियायती दरों पर यात्रा करने वालों की संख्या बहुत कम रह गई है। इसलिए जिन भी रूटों पर बसें चल रही हैं, हर रूट पर डिपो को आमदनी हो रही है। इसके अलावा पहले की तुलना में यात्रियों का ग्राफ भी गिर रहा है। 50 प्रतिशत का रोस्टर बनाए जाने के बाद डेली पैसेंजर कम हो गए हैं तो करीब 10 प्रतिशत यात्री बसों में यात्रा करने से भी परहेज करने लगे हैं।

पिछले साल की तुलना में सर्विस में सुधार
पिछले साल के साथ तुलना की जाए तो जींद डिपो की रोडवेज बस सर्विस में सुधार हुआ है। पिछले साल इन दिनों में डिपो की 156 बसें ऑन रूट थी लेकिन अब 163 बसें ऑन रूट हैं। पिछले साल की तुलना में करीब 600 किलोमीटर ज्यादा कवर हो रहे हैं। पिछले साल इन दिनों में डिपो की औसतन कमाई सवा 12 लाख रुपए थी लेकिन अब यह 13 लाख तक पहुंच गई है। पिछले साल रिसिप्ट 31 रुपए प्रति किलोमीटर थी लेकिन अब 32.77 तक पहुंच गई है। इसका फायदा यात्रियों को रहा है और उन्हें पहले की बजाय और ज्यादा बेहतर परिवहन सुविधा मिल रही है।

यात्रियाें को बेहतर परिवहन सुविधा का प्रयास

  • कोरोना काल के दौरान डिपो के चालक-परिचालक और दूसरे कर्मचारी अपना फर्ज ईमानदारी और मेहनत के साथ निभा रहे हैं। चालक-परिचालकों की बदौलत ही डिपो कमाई के मामले में पहले नंबर पर पहुंचा है। डिपो प्रबंधन का प्रयास रहता है कि ज्यादा से ज्यादा बसें ऑनरूट रहें और यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा मिले। - गुलाब सिंह दूहन, महाप्रबंधक, जींद डिपो।
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