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होलि का जश्न:होलिका दहन से पहले लोगों ने की पूजा अर्चना, बालाजी मंदिर में लगाया भंडारा

जींदएक महीने पहले
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जींद. नरवाना के श्रीबालाजी मंदिर के प्रागण में भंडारा ग्रहण करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
जींद. नरवाना के श्रीबालाजी मंदिर के प्रागण में भंडारा ग्रहण करते श्रद्धालु।

श्री बालाजी मंदिर नरवाना में होली के अवसर पर रविवार को होलिका दहन की पूजा व भंडारे का आयोजन समिति द्वारा किया गया। इसमें बालाजी महाराज को भोग लगाकर समिति के सदस्यों ने भंंडारा शुरू किया।बालाजी मंदिर के शास्त्री रामनिवास शर्मा ने बताया कि होली की पूर्व संध्या में होलिका दहन किया जाता है।

इससे पहले लोग पूजा अर्चना भी करते हैं। इसके पीछे एक प्राचीन कथा है कि असुर हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु से घोर शत्रुता रखता था। इसने अपनी शक्ति के घमंड में आकर स्वयं को ईश्वर कहना शुरू कर दिया और घोषणा कर दी कि राज्य में केवल उसी की पूजा की जाएगी। उसने अपने राज्य में यज्ञ-हवन, पूजा-पाठ सब बंद करवा दिए और भगवान के भक्तों को सताना शुरू कर दिया।

उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। पिता के लाख कहने के बावजूद प्रह्लाद विष्णु की भक्ति करता रहा। असुराधिपति हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र को मारने की भी कई बार कोशिश की परंतु भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते रहे और उसका बाल भी बांका नहीं हुआ।

असुर राजा की बहन होलिका को भगवान ब्रह्मा से ऐसी चादर मिली थी, जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती थी। होलिका उस चादर को ओढ़कर प्रह्लाद को गोद में लेकर चिता पर बैठ गई। दैवयोग से वह चादर उड़कर प्रह्लाद के ऊपर आ गई, जिससे प्रह्लाद की जान बच गई और होलिका जल गई। शर्मा ने कहा कि होलिका दहन के दिन होली जलाकर होलिका नामक दुर्भावना का अंत और भगवान द्वारा भक्त की रक्षा का जश्न मनाया जाता है।

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