सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत ने सौंपा ज्ञापन:विवाह अधिनियम लागू किए जाने के लिए सर्वखाप महापंचायत का सुना जाए पक्ष

जींद16 दिन पहले
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जींद. डीसी को ज्ञापन सौंपते सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत के पदाधिकारी। - Dainik Bhaskar
जींद. डीसी को ज्ञापन सौंपते सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत के पदाधिकारी।

सर्वजातीय सर्वखाप पंचायत ने गुरुवार को डीसी को ज्ञापन सौंप कर हरियाणा प्रदेश में वैदिक परंपरा आधारित विवाह अधिनियम लागू किए जाने के लिए सर्वखाप महापंचायत का पक्ष सुनने एवं इस विषय पर कानून बनाए जाने की मांग की है। इस मौके पर खाप नेता कुलदीप ढांडा, महेंद्र रिढाल, रणबीर पहलवान आदि भी मौजूद रहे। ढांडा खाप के प्रधान देवव्रत ढांडा ने कहा कि हरियाणा प्रदेश सनातन वैदिक संस्कृति का आधार बिंदु है और यहीं से वैदिक संस्कृति भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुंची है। आज की अधिकांश हरियाणवी परंपराएं वैदिक संस्कृति से ली गई हैं जिनके थोड़े बहुत रूप बदल गए हैं। हरियाणा प्रदेश में प्राचीन वैदिक संस्कृति को संरक्षित करने और उसे आगे बढ़ाने में खाप पंचायतें अपने स्तर पर लंबे समय से प्रयास करती रही हैं और जब भी जरूरत पड़ी है, तब समाज को दिशा दिखाने के लिए आगे आती रही हैं। हिंदू विवाह अधिनियम के बनाते समय वैदिक संस्कृति की ध्वजवाहक खाप पंचायतों का पक्ष नहीं सुना गया और 1955 में हिंदू विवाह अधिनियम लागू कर दिया गया है। वेदों में वर्णित समगोत्र विवाह निषेध परंपरा वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह बहुत आवश्यक परंपरा है। इसके पक्ष में अनेक बार कोर्ट में विभिन्न साक्ष्य दिए जा चुके हैं लेकिन इसे कानून का रूप देने का कार्य नहीं किया गया है। सामाजिक तौर पर पूरे हरियाणा में यह परंपरा लागू है लेकिन कानूनी तौर पर लागू न होने के कारण अनेक बार विवाद की स्थिति पैदा होती है, जिससे न सिर्फ भाईचारा खराब होता है बल्कि कानून व्यवस्था के समक्ष भी चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। विवाह समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए भारत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदेशों की जरूरत के हिसाब से वहां प्रचलित विवाह परंपराओं को प्रदेश सरकारें अपने स्तर पर और अपने न्याय अधिकार में कानून का रूप देती रही हैं। इसी विषय पर हरियाणा की समस्त खाप पंचायतों की राय जानने और सर्वसम्मति कायम करने के लिए 23 दिसंबर को जींद की जाट धर्मशाला में सर्वखाप महापंचायत आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 100 के करीब सर्वजातीय खापों ने हिस्सा लिया था। इसमें प्रस्ताव पारित किए गए थे कि एक गोत्र के लड़का लड़की की शादी अमान्य होनी चाहिए, चाहे वह देश प्रदेश या भारत से बाहर भी रह रहे हो। गांव और उसके साथ लगते गांव, गुहांड में भी शादी अमान्य होनी चाहिए। कस्बों के लड़के लड़की द्वारा उस कस्बे और आसपास के गांव, गुहांड में दूसरे गोत्र में शादी की छूट है। कस्बे की पहचान है, जिसको नगर पालिका और उपमंडल का दर्जा प्राप्त हो। सफीदों, जुलाना, नरवाना, टोहाना, बरवाला, नारनौंद, डबवाली, ऐलनाबाद, कलायत आदि और नगर पालिका और उपमंडल का दर्जा रखने वाले सभी कस्बे माने जाएंगे। शादी के लिए कोर्ट मैरिज की उम्र 21 साल ठीक है लेकिन माता-पिता की सहमति से होने वाली शादी 18 साल की उम्र में भी मान्य होनी चाहिए।

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