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चुनाव की तैयारी:प्रदेश में पंचायती चुनावों को लेकर गुजरात से 2000 ईवीएम लाने के लिए टीम रवाना

जींद6 दिन पहले
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  • जिले में 26 जिला परिषद सदस्यों, 300 ग्राम पंचायतों, 187 ब्लॉक समिति और 3500 पंचों के लिए होने हैं चुनाव
  • नई बनी पंचायत कर्मगढ़ की वार्डबंदी का काम पूरा, धनौरी जा चुकी कैथल जिले में

हरियाणा में पंचायती चुनावों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बेशक अगली तारीख दे दी हो लेकिन पंचायती विभाग द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों पर गुजरात से दो हजार ईवीएम (इलेक्ट्राॅनिक वाेटिंग मशीन) लेने के लिए पंचायती राज विभाग के एसडीओ अपनी टीम के साथ रवाना हो गए हैं। जिला परिषद सदस्यों, ग्राम पंचायतों, ब्लॉक समिति सदस्यों और पंचों के चुनाव होने हैं।

हालांकि जिला परिषद और सरपंचों के चुनाव ईवीएम से जरिए ही होंगे लेकिन इस बार पंच और ब्लॉक समिति सदस्यों के चुनाव भी ईवीएम से ही होने की संभावना जताई जा रही है। ईवीएम लाने के बाद पटवार भवन स्थित स्ट्राॅन्ग रूम में रखी जाएंगी। इस साल 23 फरवरी को पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल खत्म हो गया था। ग्राम पंचायतों, ब्लॉक समिति और जिला परिषद पर प्रशासक की नियुक्ति कर दी गई थी।

जिले में 300 ग्राम पंचायतें हैं। छठे पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव को लेकर ड्राॅ निकाले गए लेकिन बाद में महिलाओं को 50 प्रतिशत और बीसीए कैटेगरी को आठ प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव पास किया गया, इसके चलते पुरानी ड्राॅ प्रक्रिया को रद्द करना पड़ा। यह मामला कोर्ट में चले जाने के चलते पंचायती चुनावों में देरी हो रही है।

जिला परिषद की वार्डबंदी का काम भी हो चुका है पूरा : जिला परिषद के 25 वार्डों की वार्डबंदी का काम पूरा हो चुका है। पहले जिला परिषद के 26 वार्ड होते थे लेकिन इस बार एक वार्ड को कम कर दिया गया है। इस बार नई बनी ग्राम पंचायत कर्मगढ़ की वार्डबंदी भी पूरी हो चुकी है तो धनौरी ग्राम पंचायत भी पंचायती रिकाॅर्ड में कैथल जिले में शामिल हो चुकी है। जींद ब्लॉक में एक ग्राम पंचायत बढ़ी है तो नरवाना ब्लॉक में एक ग्राम पंचायत कम हो गई है।

चुनाव न होने से विकास कार्य हो रहे प्रभावित
ग्राम पंचायतों के चुनावों में देरी पर रूपगढ़ गांव के निवर्तमान सरपंच संदीप, घोघड़ियां के सरपंच प्रतिनिधि रणधीर बूरा, बड़ौदा के निवर्तमान सरपंच सुधीर चहल का कहना है कि सरपंचों का कार्यकाल खत्म हुए सात महीने हो गए हैं, जिस कारण गांवों में नए विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे। सरकार या तो जल्द से जल्द चुनाव करवाए या फिर सरपंचों को नए विकास कार्य शुरू करवाने की पावर दी जाए।

2016 में सात महीने बीडीपीओ के पास रहा था ग्राम पंचायतों का चार्ज
इससे पहले 2015 में पंचायती चुनाव हुए थे, उस दौरान सात महीने तक ग्राम पंचायतों की कमान बीडीपीओ के हाथों में रही थी। 25 जुलाई 2015 को पंचायतों का कार्यकाल पूरा हुआ था। उस समय भाजपा सरकार ने सरपंच के चुनाव के लिए शैक्षणिक योग्यता 10वीं कर दी थी, इस कारण सात महीने देरी से 24 फरवरी 2016 को सरपंचों ने शपथ ली थी। 2015 से पहले 2010 में हुए पंचायती चुनावों में भी पांच महीने तक पावर बीडीपीओ के हाथ में रही थी। उस दौरान भी आरक्षण को लेकर पेंच फंसा था।

राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों पर ईवीएम लाने के लिए पंचायती राज एसडीओ के नेतृत्व में टीम गुजरात गई हुई है। गुजरात के भावनगर से ईवीएम आएंगी। चुनावों को लेकर अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं।-प्रेम सिंह राणा, एक्सईएन पंचायती राज, जींद।

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