खाद किल्लत:यूरिया के लिए सुबह से लग रही किसानों की लाइन, फिर भी किसी को मिल रहा तो कोई लौट रहा खाली हाथ

जींद8 दिन पहले
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नरवाना में लगे रैक के बाद ट्रकों मेें लोड करते हुए। - Dainik Bhaskar
नरवाना में लगे रैक के बाद ट्रकों मेें लोड करते हुए।
  • यूरिया की कमी नहीं हो पा रही दूर, खाद लेने के लिए उमड़ी किसानों की भीड़

जिले में यूरिया की किल्लत दूर होने का नाम ही नहीं ले रही। हालात यह हैं कि किसान सुबह से शाम तक लाइन में लगे रहते हैं और उनमें से भी किसी को खाद मिल पाता है तो किसी को खाली हाथ ही अपने घर लौटना पड़ता है। बारिश के बाद पड़ रही कड़ाके की ठंड में गेहूं की फसल में खाद डालना मजबूरी बना है। बिना खाद के गेहूं पीली पड़ने लगी है और कृषि विशेषज्ञ इसमें नाइट्रोजन की मात्रा डालने की सिफारिश कर रहे हैं। इसके साथ ही बिना यूरिया के फसल में फुटाव कम हो रहा है, जिसका बाद में उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में जैसे तैसे कर किसान यूरिया पाने की होड़ में सुबह से शाम तक लाइन में लगते हैं। जिले के किसानों को अब भी कम से कम 18 हजार एमटी खाद की जरूरत है।

पिछले दिनों से यूरिया के लिए भटक रहे किसानों को उस समय कुछ राहत की सूचना मिली जब जिले के लिए 4580 मीट्रिक टन यूरिया लेकर ट्रेन नरवाना पहुंची। रैक लगने से अब मंडियों में किसानों को यूरिया मिलना शुरू हो गया। कृषि विभाग अधिकारियों के मुताबिक 600 एमटी के करीब यूरिया हिसार से जींद आएगा। किसान रामफल लोन, सतबीर करसिंधू, राममेहर पालवां, हरिराम व सूबेसिंह ने कहा कि वे पिछले एक सप्ताह से खाद के लिए मंडी के चक्कर काट रहे हैं। पहले कई दिन खाली हाथ लौटे लेकिन आज ही पांच पांच बैग खाद के मिले हैं। किसानों ने कहा कि अब गेहूं में यूरिया डालना जरूरी है, ताकि फसल अच्छी हो सके।

  • जिला में अब यूरिया की आवक लगातार हो रही है। शुक्रवार को नरवाना में 4580 एमटी यूरिया का रैक लगने से कुछ हद तक किसानों को राहत मिल सकेगी। किसान जरूरत के हिसाब से ही यूरिया लें, तो ज्यादा दिक्कत नहीं आती। कुछ किसान एडवांस में खाद खरीदकर ले जाते हैं, जिससे खाद की ज्यादा किल्लत बनी है। वहीं इस बार आवक भी कम हो रही है। - डाॅ. नरेंद्रपाल सिंह, क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर, कृषि विभाग, जींद।

यूपी व पंजाब में होने वाले चुनाव को मान रहे कारण
हरियाणा में इस बार डीएपी के बाद यूरिया की भी किल्लत बनी हुई है। किसान और कृषि अधिकारी इसे पड़ाेसी राज्य यूपी व पंजाब में आगामी दिनों में हो रहे चुनाव का मान रहे हैं। क्योंकि सरकार उन राज्यों में आवक ज्यादा भेज रही है जहां पर चुनाव होने हैं। ऐसे में हरियाणा के हिस्से का पूरा खाद भी नहीं मिल रहा है। जबकि कृषि विभाग द्वारा पूरे राज्य में रबी सीजन में खाद की खपत का अनुमानित आंकड़ा पहले ही सरकार व संबंधित मंत्रालय को भेजा गया था।

प्राइवेट विक्रेताओं के पास पहुंचा खाद
मकर संक्रांति का पर्व आज हर कोई घरों में रह कर मना रहा है, लेकिन किसान सुबह ही मंडी में अपने परिवारों के साथ पहुंचे। यूरिया की कुछ समय से किल्लत चल रही है। शहर में प्राइवेट खाद विक्रेताओं के यहां यूरिया शुक्रवार को आया। कभी किसी दुकान पर तो कभी किसान दुकान पर चक्कर किसान दोपहर तक काटते रहे। कभी किसी जगह तो कभी किसी जगह किसान लाइनोंं में लगते रहे। महिलाएं भी गांव से खाद लेने के लिए मंडी आई। कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड में अपनी फसल को बचाने के लिए यूरिया लेने के लिए किसान लाइन में लग रहे हैं। लाइन में लगने के बाद भी खाद मिलेगा या नहीं ये भी पक्का नहीं है। किसान राजेंद्र, जगबीर, सुखपाल और रामकुमार ने कहा कि इस बार डीएपी के बाद यूरिया को लेकर किसान परेशान हैं। यूरिया की शुरू से ही किल्लत चली आ रही है जो अब भी जारी है। शासन, प्रशासन दावे कर रहा है कि यूरिया की किल्लत नहीं रहने दी जाएगी, जबकि किसानों को यूरिया के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

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