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असुविधा:ढाई साल पहले रोडवेज को डिजिटल बनाने की योजना पड़ी अधूरी

जींद4 दिन पहले
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जींद. बस स्टैंड परिसर में टिकट काउंटर से टिकट लेते यात्री। - Dainik Bhaskar
जींद. बस स्टैंड परिसर में टिकट काउंटर से टिकट लेते यात्री।
  • कई बार बसों व डिपो में तो कई बार काउंटर पर खुले पैसों को लेकर यात्रियों से होती रहती है कहासुनी

रोडवेज को डिजिटल करने के लिए विभाग ने ढाई साल पहले योजना बनाई थी, लेकिन अभी रोडवेज को डिजिटल बनाने की कवायद ढाई साल बीत जाने के बाद भी अधूरी ही है। पीओएस व ई-टिकटिंग मशीन के लिए प्रदेशभर के सभी डिपो में पीओएस व ई-टिकटिंग मशीन के लिए योजना इस साल भी सपना रह गया है। अभी तक रोडवेज को पीओएस व ई-टिकटिंग मशीन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।

रोडवेज को 3 पीओएस व 150 ई-टिकटिंग मशीन की जरूरत हैं। अगर रोडवेज को ये दोनों मशीन मिल जाती हैं तो खुले पैसों को लेकर यात्रियों के साथ होने वाली कहासुनी से छुटकारा मिल सकता है। कई यात्रियों को बस में यात्रा करते समय परिचालक जब टिकट काटते हैं तो यात्रियों के पास भी और परिचालकों के पास भी खुले पैसे नहीं होते। इससे परिचालक जिस यात्री के बकाया पैसे देने होते हैं तो टिकट पीछे पैन से लिख देते हैं कि आपके इतने पैसे बकाया है। इससे कई बार यात्री व परिचालक में भी पैसे लेने-देने में काफी गड़बड़ी हो जाती है। इससे कर्मचारी व यात्री के बीच कहासुनी हो जाती है।

‘मुख्यालय में अभी प्रोसेस में है मामला’
ई-टिकटिंग मशीन व पीओएस मशीन अभी तक प्रदेश के किसी भी डिपो को नहीं मिली है। अभी ई-टिकटिंग मशीन के लिए मुख्यालय में प्रोसेस चल रही है और अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। मुख्यालय काे ही मशीनें खरीदकर देनी है।
-सुनील भाटिया, अकाउंट ऑफिसर जींद डिपो।

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