पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

हिंदी दिवस:सुंदर स्वप्न सजीलों में हिंदी का संस्कार बुनो, चहुं ओर निखरती जीवन किरणों में बस हिंदी का शृंगार चुनो : डॉ. मंजूलता

जींद16 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

अखिल भारतीय साहित्य परिषद जींद की ओर से हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर ई वैचारिक एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इकाई अध्यक्ष डॉ. मंजूलता ने साहित्यकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के लिए मात्र एक दिवस नहीं, पूरा जीवन भी कम है। उन्होंने भावी पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि सुंदर स्वप्न सजीलों में हिंदी का संस्कार बुनो, चहुं ओर निखरती जीवन किरणों में बस हिंदी का शृंगार चुनो। आयोजन की अध्यक्षता कैथल से साहित्यकार डॉक्टर प्रद्युम्न भल्ला ने की। तकनीकी संयोजन एवं संचालन का निर्वहन डॉ. शिवनीत सिंह ने किया।

डॉ. प्रद्युम्न भल्ला ने कहा कि आज के आयोजन की मुख्य विशेषता को देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूं और वह विशेषता यह है कि इसमें हर पीढ़ी का रचनाकार शामिल है। केवल वरिष्ठ साहित्यकार ही हिंदी के प्रति श्रद्धा से नत नहीं है अपितु हमारी भावी कर्णधार युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि युवा कवि भी यहां शामिल हैं। डॉ. भल्ला ने कहा कि भाषा नीर सी बहे है। साथ इसके बहना है, सबको ही भाता निज भाषा में जो कहना है। कार्यक्रम संयोजिका कवयित्री मंजूमानव ने हिंदी की महिमा का गुणगान किया और अपनी काव्य रचना में उन्होंने कहा कि रिवाजे मिट्टी कदमों संग चलती रही, उलझनों की कैद सी बुनती रही।

हिंदी विषय के विद्वान डॉ. राममेहर सिंह ने कहा कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों की अविरल धारा मुख्य रूप से हिंदी भाषा के कारण ही निर्बाध रूप में गतिशील रही है और हमारी हिंदी ही संस्कृति और संस्कारों की जीवंतता का कारण और कारक है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रांतीय संयुक्त मंत्री डॉक्टर जगदीप शर्मा राही ने कहा कि हिंदी भाषा भारतवर्ष का गौरव है। हिंदी भाषा के माध्यम से ही आत्मनिर्भर भारत का स्वप्न संभव है। अंग्रेजी विषय की वरिष्ठ व्याख्याता संगीता पटपटिया ने कहा कि इस जीवन के संघर्षों से जब टूट चुका हो अंतर्मन, तब सुख के मिले समुंदर का रह जाता कोई अर्थ नहीं। प्रो. संजय कुमार ने सुस्पष्ट लहजे में प्रभावशाली ढंग से कोरोना काल में मजदूरों की अंतर पीड़ा का व्याख्यान किया।

अरुण आशरी ने कहा कि हिंदी दिवस मनाना ही केवल हिंदी का मान नहीं, हिंदी पखवाड़े में जीना ही, हिंदी का सम्मान नहीं। कवि संदीप कौशल ने कहा कि हिंदी के प्रति ऐसे भावों को प्रसारित होते देख वे भावविभोर हो रही है। यदि हर भारतीय इसी निष्ठा भाव से हिंदी को अपना आएगा तो भविष्य में हिंदी के लिए कोई खतरा नहीं। पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मंजू कौशिक ने हिंदी के प्रति समर्पित साधना को साधुवाद एवं आशीर्वाद दिया और कहा कि हिंदी है, तो हम हैं। अपनी भाषा के प्रति सम्मान हमारा आत्म गौरव है।

कवि अजय राठौर ने गाया कि गर्व है हां मुझको हिन्दी पर, मैं कहता बात यह आज हूं, गौरवशाली है हिंदी हमारी, इसके शब्दों का मैं मोहताज हूं। नारनौल से साहित्यकार डॉ. कृष्णा आर्य ने ट्रक ड्राइवरों को केंद्र में रखते हुए उनके द्वारा किए जा रहे हिंदी के प्रचार प्रसार के सद्कृत्यों की सराहना अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत की। नवोदित रचनाकार सौरभ परुथी ने अपनी बाल मजदूरी पर केंद्रित भावपूर्ण रचना का काव्य पाठ किया तो सबकी सराहना बटोरी। इसमें अभिमन्यु गोयत, पंचकूला से डॉक्टर मालविका सिंह, डॉ. भारती, गुरुग्राम से अश्वनी कुमार, अरुण कुमार पटवारी, कैथल जिले से सुभाष शर्मा, पूनम और महावीर अाैर कुरुक्षेत्र से डॉ. हरज्ञान, डॉ. कमल भी शामिल हुए।

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- अगर आप कुछ समय से स्थान परिवर्तन की योजना बना रहे हैं या किसी प्रॉपर्टी से संबंधित कार्य करने से पहले उस पर दोबारा विचार विमर्श कर लें। आपको अवश्य ही सफलता प्राप्त होगी। संतान की तरफ से भी को...

और पढ़ें