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दावे अर्श पर, मरीज फर्श पर:491 नए केस; 9 की माैत, 156 मरीज आईसीयू में, 33 वेंटिलेटर पर भर्ती

पानीपतएक महीने पहलेलेखक: गाेविंद सैनी
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पानीपत. ये भयावह स्थिति सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की है। ये वाे मरीज हैं जिनकाे किसी काे सांस की समस्या है ताे काेई काेराेना संदिग्ध है। यहां एक बेड पर दाे-दाे मरीज हैं। बेड नहीं बचे ताे मरीजाें काे जमीन पर लेटाकर ही अाॅक्सीजन लगानी पड़ रही है। - Dainik Bhaskar
पानीपत. ये भयावह स्थिति सिविल अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड की है। ये वाे मरीज हैं जिनकाे किसी काे सांस की समस्या है ताे काेई काेराेना संदिग्ध है। यहां एक बेड पर दाे-दाे मरीज हैं। बेड नहीं बचे ताे मरीजाें काे जमीन पर लेटाकर ही अाॅक्सीजन लगानी पड़ रही है।
  • सरकारी अस्पताल में काेराेना संदिग्ध व सांस की कमी वाले मरीजाें के लिए नहीं बचे बिस्तर
  • एक-एक बिस्तर पर दाे-दाे मरीज, जमीन पर लेटाकर लगानी पड़ रही ऑक्सीजन

जिले में शुक्रवार काे 491 नए केस मिले। वहीं, 403 ठीक हुए। 9 लाेगाें की माैत की सूचना स्वास्थ्य विभाग ने दी, इसमें दाे अप्रैल की हैं, 2 गुरुवार की जाेड़ी गई हैं। शुक्रवार काे हुई 22 लाेेगाें की माैत में सिर्फ 5 की माैत विभाग ने अपने आंकड़ाें में जाेड़ी।

दूसरी ओर अब अस्पताल में सांस की कमी, बुखार व काेराेना संदिग्ध मरीजाें के लिए भी बेड नहीं बचे हैं। सिविल अस्पताल के एक बेड पर दाे-दाे मरीज हैं। जमीन पर लेटाकर मरीजाें काे ऑक्सीजन लगानी पड़ रही है। इसमें गलती डाॅक्टराें की नहीं, लेकिन सरकार काे जागना चाहिए। क्या सरकार इसी व्यवस्था के ढाेल पीट रही है। पानीपत में 156 मरीज आईसीयू में, 33 वेंटिलेटर पर, 334 ऑक्सीजन बेडाें पर एडमिट हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 34 ऑक्सीजन बेड खाली हैं, लेकिन कहां ये पता ही नहीं। शुक्रवार काे 1343 लाेगाें के काेराेना टेस्ट हुए हैं। कुल केसाें का आंकड़ा 24 हजार 730 पर पहुंच गया है। वहीं, माैताें का आंकड़ा विभाग के अनुसार ही 300 के पार हाे चुका है। जिले में अब-तक 18 हजार 114 मरीजाें की रिकवरी हुई है।

अस्पताल में 15 घंटे बाद मिली ऑक्सीजन

सिविल अस्पताल में गुरुवार रात को ऑक्सीजन की कमी हाे गई। ऑक्सीजन का लेवल न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। वार्ड के इंचार्ज ने रात को अस्पताल प्रशासन से ऑक्सीजन की मांग की, लेकिन देर रात तक नहीं मिली। ऐसे में काेविड वार्ड में भर्ती 116 मरीजों की जान पर बन गई। डॉक्टर व मरीजाें के परिजन रातभर ऑक्सीजन के लिए दौड़ते रहे।

सि‌विल अस्पताल में छह हजार लीटर की क्षमता वाला ऑक्सीजन प्लांट है, लेकिन मरीजों की संख्या के अनुसार ऑक्सीजन प्लांट की गैस 26 घंटे में खत्म हो जाती है। शुक्रवार सुबह डेढ़ घंटे की ही ऑक्सीजन बची थी, इसके बाद एक टन ऑक्सीजन सिविल अस्पताल में सुबह 10 बजे पहुंची।

सिविल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट पर काम शुरू

सिविल अस्पताल में एनएचएआई द्वारा लगाए जा ऑक्सीजन प्लांट पर शुक्रवार काे वेल्सपन कंपनी के अधिकारियाें व कर्मचारियाें ने काम शुरू कर दिया। यहां प्लांट सिविल अस्पताल में पहले से बने 6 हजार लीटर के ऑक्सीजन प्लांट के पास ही बनेगा। 20 मई तक अस्पताल में यह प्लांट बनकर तैयार हाे सकता है। इसके अलावा समालखा में भी एक छाेटा प्लांट बनाया जा रहा है। दाेनाें अस्पतालाें में प्रति घंटा 1200 लीटर ऑक्सीजन तैयार हाेगी। इसमें पानीपत के सिविल अस्पताल में 1 हजार लीटर और समालखा के सब डिवीजनल अस्पताल में 200 लीटर ऑक्सीजन तैयार हाेगी।

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