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आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा में मतभेद:मिशन पंजाब की जिद पर अड़े चढ़ूनी, एक सप्ताह के लिए मोर्चा से सस्पेंड

पानीपत19 दिन पहले
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कुंडली बॉर्डर पर बैठक करते मोर्चा के नेता। - Dainik Bhaskar
कुंडली बॉर्डर पर बैठक करते मोर्चा के नेता।
  • किसान मोर्चा ने कहा- मना करने के बावजूद मिशन पंजाब के नाम पर राजनीति कर रहे थे
  • चढ़ूनी बोले- ये फैसला गलत है, मेरा स्टैंड वही रहेगा, आंदोलन में सबसे ज्यादा योगदान हमारा

तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में 7 महीने से ज्यादा समय से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों में मतभेद उभरने लगे हैं। मिशन पंजाब की जिद पर अड़े हरियाणा से भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी को बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा से एक सप्ताह के लिए सस्पेंड कर दिया गया।

मोर्चा की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा गया कि बार-बार मना करने के बावजूद चढ़ूनी ‘मिशन पंजाब’ के नाम पर राजनीति कर रहे थे। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। वे एक सप्ताह तक न तो मोर्चा की तरफ से कोई बयान दे पाएंगे और न ही मोर्चा के मंच पर आ पाएंगे।

वहीं, सस्पेंड किए जाने के बाद गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने वीडियो जारी कर कहा, ‘मैंने सिर्फ एक विचारधारा रखी थी। किसी की भी विचारधारा को जबदस्ती दबाया नहीं जा सकता। मोर्चा का फैसला गलत है। मेरा स्टैंड आगे भी यही रहेगा। आंदोलन में भी सबसे ज्यादा योगदान हमारा है।’ चढ़ूनी पर पहले भी राजनीति करने के आरोप लगते रहे हैं। इस बार पंजाब की राजनीति को लेकर विवाद ज्यादा बढ़ गया। अब मोर्चा के निर्णय पर आई चढ़ूनी की प्रतिक्रिया के बाद विवाद और ज्यादा बढ़ता दिख रहा है।

विवाद की जड़- पंजाब में चुनाव लड़ने की सलाह दी थी

चढ़ूनी ने 7 जुलाई को कहा था कि पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव हैं। किसान संगठन मिशन पंजाब के लिए शुरुआत करें और पंजाब के किसान नेता चुनाव लड़ें। सत्ता हाथ में लेकर बदलाव करके बताएं कि सरकार ऐसे चलाई जाती है। देश का पहला रोल मॉडल तैयार करें। भाजपा को हरवाने से मसला हल नहीं होगा। भाजपा से पहले की सरकारों में भी किसानों की हालत खस्ता रही है। अब किसानों को व्यवस्था में आकर इसमें परिवर्तन करना होगा।

हम माेर्चा जीतने आए हैं, चढ़ूनी राजनीति कर रहे: राजेवाल

मोर्चा की ओर से बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा, ‘हम यहां चुनाव लड़ने नहीं, मोर्चा जीतने के लिए आए हैं। चढ़ूनी बार-बार राजनीति कर रहे हैं। उनको मना किया था कि इस तरह के बयान न दें, लेकिन वो नहीं माने। वे अब भी नहीं मानते हैं तो उस पर निर्णय बाद में लिया जाएगा।’

सबसे ज्यादा लाठियां खाईं, हम पर मुकदमे भी: चढ़ूनी

चढ़ूनी ने कहा, ‘जरूरी नहीं कि एक आदमी की जो विचारधारा हो, बाकी सभी की भी वैसी हो। मोर्चा ने गलत कार्रवाई की है। आगे भी मेरा स्टैंड वही रहेगा। आंदोलन में सबसे ज्यादा मुकदमे हमारे पर दर्ज हैं। सबसे ज्यादा लाठियां भी हमने ही खाई हैं। आगे भी उसी तरह काम करते रहेंगे।’

चढ़ूनी निर्दलीय और उनकी पत्नी आप से चुनाव लड़कर हार चुके हैं

  • चढ़ूनी निर्दलीय और उनकी पत्नी आम आदमी पार्टी से चुनाव लड़ चुके हैं। वे हार गए थे। उन पर राजनीतिक व्यक्ति होने के आरोप लगते रहे हैं।
  • जनवरी में दिल्ली में विभिन्न पार्टियों का सम्मेलन बुलाया। इस पर माफी मांगनी पड़ी थी।
  • चढ़ूनी के टेंट में कांग्रेस के कई नेता आते रहे हैं। 26 जनवरी के कार्यक्रम के दौरान भी दिल्ली में जाने के आरोप लगे थे।
  • बजट सत्र के दौरान संसद कूच की बात कही। इसका विरोध हुआ था और निर्णय वापस ले लिया।

भास्कर इनसाइड- जत्थेबंदियों को आशंका कि चढ़ूनी पंजाब चुनाव में अपने आदमी उतारना चाहते हैं

गुरनाम चढ़ूनी ने 7 जुलाई को मिशन पंजाब को लेकर बयान दिया तो उसी दिन पंजाब की जत्थेबंदियों में विरोध होने लगा। उन्होंने मोर्चा में मुद्दा उठाया। मोर्चा ने चढ़ूनी को ऐसे बयान न देने को कहा, पर वे नहीं माने। तब सोमवार को तय हुआ कि पंजाब की 32 जत्थेबंदी बैठक करेंगी। मंगलवार को बैठक हुई तो पंजाब की कई जत्थेबंदियों ने आशंका जताई कि चढ़ूनी मोर्चा से बाहर जाकर पंजाब चुनाव में अपने आदमी उतार सकते हैं।

कई जत्थेबंदियों ने अन्ना के दिल्ली वाले प्रदर्शन व अरविंद केजरीवाल के चुनाव लड़ने का उदाहरण दिया। जत्थेबंदियों का कहना था कि इससे हम मुद्दे से भटक जाएंगे। कई ने तो चढ़ूनी को मोर्चा से बाहर करने को कहा। इसे लेकर मंगलवार को प्रस्ताव भी पास किया गया और बुधवार को भी मोर्चा की बैठक बुलाई है।

सूत्रों का कहना है कि पंजाब की ज्यादातर जत्थेबंदी चाहती थीं कि चढ़ूनी को निकाला जाए। लेकिन मोर्चा के कुछ सदस्य इसके पक्ष में नहीं थे। कुछ सदस्य चाहते थे कि एक चेतावनी दे दी जाए कि इस तरह के बयान न दें। लेकिन पंजाब की जत्थेबंदी अपनी मांग पर अड़ी रहीं। इस पर सस्पेंशन का फैसला लिया गया।

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