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बंदरों का मंगल:काफी प्रयासों के बाद शुरू हुआ था बंदर पकड़ने का काम, सेक्टर-11/12 के बाशिंदों ने मंगलवार का हवाला देकर टीम काे वापस भेजा

पानीपत3 दिन पहले
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पानीपत. बंदरों को पकड़ने के लिए लगाया गया जाल। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
पानीपत. बंदरों को पकड़ने के लिए लगाया गया जाल। (फाइल फोटो)
  • अब बुधवार काे सिविल अस्पताल व आसपास के क्षेत्र में रखे जाएंगे पिंजरे
  • इसी धार्मिक भावना के कारण निगम के अफसर बंदरों को पकड़वाने से बच रहे थे

बेशक से बंदर माैका मिलते ही शहरवासियों काे नाेच डालते हैं, छताें पर सूखने वाले कपड़ाें काे फाड़ रहे हैं और बाहर रखे अन्य घरेलू सामान ताेड़ रहे हैं।

फिर भी शहरवासियाें की बंदराें के प्रति श्रद्धा है। इसी के चलते सेक्टर-11/12 एरिया में बंदर पकड़ने के लिए पिंजरे रखने आई टीम काे मंगलवार का हवाला देकर सेक्टरवासियों ने वापस भेज दिया। टीम भी गाड़ी से पिंजरा उतारे बिना ही वापस लाैट गई। अब बुधवार से सिविल अस्पताल से बंदर पकड़ने का काम शुरू हाेगा।

निगम के आंकड़ाें के अनुसार शहर में करीब 2000 बंदर हैं। सबसे ज्यादा बंदर सेक्टर-13/17, 18, सेक्टर-11/12 व सेक्टर-25 के अलावा सुखदेव नगर, देवी मूर्ति काॅलाेनी व माॅडल टाउन एरिया में हैं। इन सभी काे पकड़कर कलेसर के जंगल में छाेड़ने के टेंडर का वर्क ऑर्डर जारी हुआ है।

गलत होने के डर से टेंडर लगाना ताे दूर, इस पर चर्चा तक नहीं करते थे

जिस तरह से सेक्टर-11/12 के लाेगाें ने मंगलवार काे बंदर पकड़ने का काम शुरू करने पर आपत्ति जताई है, ऐसे ही शहर के अधिकारी व नेता भी धार्मिक भावना के चलते बंदर पकड़ने का टेंडर लगाना ताे दूर की बात, इस पर चर्चा तक नहीं करते थे। कुछ निगम अधिकारी व नेताओं का मानना है कि अगर काेई भी बंदर पकड़वाने की बात करता है, वे किसी न किसी मुसीबत में जरूर फंसते हैं। इसी धार्मिक भावना के कारण निगम अफसर व नेता बंदरों को पकड़वाने से बच रहे थे। अब बड़े प्रयासों के बाद फिर से बंदर पकड़ने का काम शुरू हाे पाया है।

1300 रुपए प्रति बंदर पकड़ने के रेट पर बनी सहमति

बंदर पकड़ने का ठेका उत्तर प्रदेश के मथुरा निवासी रईस ने लिया हुआ है। प्रति बंदर पकड़ने का रेट 1300 तय हुआ है। इससे पहले अधिकारियाें ने 745 रुपए प्रति बंदर पकड़ने का रेट तय किया था। इस रेट पर काेई भी फर्म आगे नहीं आई थी। अब सभी बंदर दो माह में पकड़ने हैं। पानीपत से पकड़े हुए बंदर यमुनानगर के कलेसर के जंगलाें में छोड़ने हैं।

इसके लिए जिले के वन्य विभाग से बंदर पकड़कर कलेसर छोड़ने की परमिशन ली गई है। बंदर पकड़ने वाले ठेकेदार रईस ने बताया कि एक साथ 30 से 50 बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ने की परमिशन है।

इन बाताें का रखना हाेगा ध्यान

  • मानवीय तरीके से बंदर पकड़ना।
  • पकड़े गए बंदरों के खान-पान की पूरी जिम्मेदारी।
  • बंदर पकड़कर उस पर रंग कर जंगल में छोड़ना। बंदर पकड़ने की पूरी प्रक्रिया की विडीयोग्राफी।
  • पूरी प्रक्रिया में कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टेशन और बंदरों के रखरखाव का खर्च फर्म को खुद ही वहन करना होगा। काम के दौरान किसी भी बंदर को चोट लगी या मौत हुई तो उसकी पेमेंट नहीं होगी, वहीं उसे उपयुक्त तरीके से दफनाया जाएगा।
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