पटाखों को लेकर गाइडलाइन:पटाखों पर बैन का शहर में नहीं दिखा असर, खुलेआम बिके और रातभर फूटे, एक्यूआई पहुंचा 400 के पार

बृजेश तिवारी | सोनीपत23 दिन पहले
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सुबह छह बजे भी सड़कों पर छाया रहा अंधेरा, दिनभर आसमान में बादलों जैसा नजारा - Dainik Bhaskar
सुबह छह बजे भी सड़कों पर छाया रहा अंधेरा, दिनभर आसमान में बादलों जैसा नजारा
  • प्रदूषण की वजह से दिनभर नहीं हुए सूर्य देवता के दर्शन, तीन दिन तक रहेगा स्मॉग

प्रदेश में एनसीआर के 14 जिलों में पटाखे की बिक्री और इन्हें जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी, लेकिन यह रोक केवल कागजों तक सीमित रही। क्योंकि दिवाली के दिन शहर के विभिन्न बाजारों व कॉलोनियों में खुलेआम पटाखे बेचे गए। पटाखों को खरीदने के लिए लोग लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करते दिखे।

जिसके बाद रातभर पटाखों का शोर चलता रहा। जिसका नतीजा अलसुबह से ही दिखाई पड़ने लगा। सुबह 6 बजे भी शहर की सड़कों पर अंधेरा छाया था। इस प्रदूषण का असर यह रहा दिनभर सूर्य देवता के दर्शन भी नहीं हुए। सोनीपत का एयर क्वालिटी इंडेक्स शुक्रवार की सुबह 10 बजे 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया। वहीं शाम को करीब चार बजे यह बढ़कर 411 हो गया।

शहर में दिनभर स्मॉग छाया रहा। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो अगले 48 घंटों में यह बढ़ने की पूरी आशंका है। यह आंकड़ा सामान्य दर से 6 गुना अधिक है। जो कि सांस और फेफड़ों के बीमारों के लिए बहुत ही खतरनाक है। पटाखे जलाते समय छह लाेग चपेट में अाने से झुलस गए। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद जिले में पटाखों की बिक्री के लिए किसी प्रकार का कोई लाइसेंस नहीं जारी किया गया। दूसरे जिलों में मिली छूट को लेकर लोग दो दिनों से पटाखों को जलाने को लेकर जानकारी जुटाते रहे।

प्रशासन द्वारा बताया गया कि ग्रीन न तो सामान्य किसी पटाखे को जलाने की कोई अनुमति नहीं है। इसके बाद विक्रेताओं ने अपने तरीके से चोरी छिपे बेचना शुरू कर दिया। दिवाली के दिन खुलेआम चारपाई और मेज पर रखकर दुकानों पर पटाखे बेचे गए।

शुक्रवार को रात एक बजे के बाद ही वातावरण में धुआं नजर आने लगा था। सुबह करीब 10 बजे शहर का एक्यूआई 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पर पहुंच गया था। जबकि शाम चार बजे यह आंकड़ा 411 पर पहुंच गया। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों की मानें तो अगर अनुमान के मुताबिक यह अगले 48 घंटों तक 300 तक बना रहेगा तो यह आपात की श्रेणी में माना जाता है। जिससे बीमारों को नुकसान की आशंका रहती है।

चार दिनों का एक्यूआई

तारीख एक्यूआई
एक नवंबर 325
दो नवंबर 121
तीन नवंबर 169
चार नवंबर 315
पांच नवंबर 415

पटाखा जलाने से 6 लोग झुलसे

दिवाली की रात को पटाखा बैन होने के बाद भी पटाखे से झुलसने के छह मामले सामने आए। जिसमें मॉडल टाउन में एक महिला, जैन बाग कॉलोनी में युवक, शास्त्री कॉलोनी में युवक इसके अलावा शहर के अन्य हिस्से से भी तीन युवक झुलसने के बाद सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे थे।
पोटाश से जमकर हुई आतिशबाजी :

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर बैन किया गया था। बावजूद इसके शहरभर में कई लड़के सरेआम पोटाश का प्रयोग अवैध तरीके से बनाए जाने वाले हथियारों में करते देखे गए।

स्मॉग के कारण लोगों को आंखों में जलन की समस्या बढ़ी

गोहाना | दिवाली पर पटाखों की बिक्री और बजाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने में प्रशासन पूरी तरह विफल रहा। इसके चलते दिवाली के दूसरे ही दिन स्मॉग छा गया। क्षेत्र में दिनभर स्मॉग छाया रहा। स्मॉग छाने का मुख्य कारण दिवाली पर पटाखे और खेतों में फसल अवशेष जलाना माना जा रहा है।

शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक आतिशबाजी हुई। स्मॉग की समस्या होने पर एनजीटी ने भी कृषि अधिकारियों को फसल अवशेष जलाने पर अंकुश लगाने के आदेश जारी किए हैं। गुरुवार को दीपावली का पर्व मनाया गया। हालांकि पटाखे बेचने से रोकने के लिए प्रशासन ने दो ड्यूटी मजिस्ट्रेट और 4 थानों की पुलिस लगाई हुई थी।

इसके बावजूद भी लोगों ने दिवाली पर जमकर आतिशबाजी की। शहर में दुकानदारों में भी चोरी छुपे से पटाखों की बिक्री की। चार थानों की पुलिस लगाने के बावजूद भी पटाखों की बिक्री पर पूर्ण अंकुश नहीं लगा। इससे शुक्रवार को ही क्षेत्र में स्मॉग छा गया। स्मॉग के कारण सड़कों पर दृश्यता भी कम होने लगी है।

स्मॉग से लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। स्मॉग के कारण आंखों में जलन की समस्या बनी रही। स्मॉग के कारण हवा में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ गई है। हवा में पीएम 2.5 करीब 500 माईक्रोग्राम/ नॉर्मल मीटर घन के करीब पहुंच गया। जबकि हवा में 60 माईक्रोग्राम/ नॉर्मल मीटर घन से अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानी जाती है। स्मॉग से श्वास रोगियों को होती है अधिक परेशानी : सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉक्टर कर्मवीर ने बताया कि स्मॉग से श्वास रोगियों को अधिक परेशानी होती है। धुएं के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत आती है। इसके अतिरिक्त धुएं के कारण आंखों में भी जलन की समस्या हो जाती है। आंखों में जलन से बचने के लिए बार-बार आंखों को ठंडे पानी से धोएं।

पटाखों की बिक्री रोकने को करवाई थी गश्त
^सरकार ने पटाखों की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया हुआ था। पटाखों की बिक्री रोकने के लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त करवाई गई। सत्यवान, प्रभारी, सिटी थाना, गोहाना।

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