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ऑनलाइन स्टडी के साइड इफेक्ट:दोगुनी तेजी से खराब होने लगी बच्चों की आंखें, 12-12 घंटे फोन पर बिताने से आंखों में खुश्की, डॉक्टर भी हैरान

पानीपत21 दिन पहले
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पानीपत. बच्चे की आंख का नंबर चेक करते डाॅ. कनव गुप्ता। - Dainik Bhaskar
पानीपत. बच्चे की आंख का नंबर चेक करते डाॅ. कनव गुप्ता।
  • खतरा बढ़ रहा, क्योंकि...आंख वाले डाॅक्टराें के पास पहले 10-15 बच्चे आते थे, अब 25 से 30 की रोजाना हो रही ओपीडी

ऑनलाइन पढ़ाई का यह साइड इफेक्ट परेशान करने वाला है। बच्चों की आंखों में खुश्की की शिकायत आ रही है। आमतौर पर बच्चों की आंखों में यह देखने को नहीं मिलता। बच्चों से बातचीत करने वाले डॉक्टर भी हैरान हैं कि पढ़ाई के नाम पर बच्चे 12-12 घंटे फोन पर बिता रहे हैं। आई स्पेशलिस्ट के पास आंख दिखाने वाले बच्चों की संख्या दोगुनी हो गई है। डॉक्टरों ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण बच्चाें की आंखें कमजाेर हाे रही हैं।

बच्चाें के चश्मे का नंबर बढ़ने लग गया है। आंख में दर्द और एलर्जी की शिकायत भी है। आंख में खुश्की हो रही है, जाे पहले यह स्थिति बच्चों में नजर नहीं आती थी। जिले में हरियाणा बाेर्ड के 1 लाख 6 हजार और सीबीएसई के 71 हजार 600 बच्चे वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं, जिले के करीब 3 लाख बच्चाें का माेबाइल, टीवी व लैपटॉप पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इस कारण लगातार सिविल अस्पताल समेत निजी अस्पतालाें में आंखाें की ओपीडी बढ़ रही है।

जिले के आई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से समझें कैसे बढ़ रहे साइड इफेक्ट
आंख में खुश्की पहले सिर्फ बड़ों में ही थी

बच्चाें की आंखाें में खुश्की के केस बढ़ रहे हैं। पहले यह स्थिति बड़ों में ज्यादा नजर आती थी। आंखाें में दर्द, पानी आना, सिर दर्द होना आदि। बच्चे फाेन, गेमिंग और टीवी पर 12-12 घंटे बिता रहे हैं। इस कारण केसाें में तेजी आ रही है। बच्चाें काे जितना हाे सके माेबाइल से दूर रखें, ऑनलाइन क्लास में ब्रेक जरूर दें। राेजाना 15-20 केस आ रहे हैं।
-डाॅ. विनीत आर्य, देव आई केयर अस्पताल।

आंखाें की मांसपेशियां भी हाे रही कमजाेर
ऑनलाइन पढ़ाई के कारण आंखाें की मांसपेशियां कमजाेर हाेना शुरू हाे गई हैं। अस्पताल में राेजाना 50 की ओपीडी में 25-30 केस बच्चाें के ही आ रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चाें के साथ माता-पिता बैठें, ताकि फाेन आंखाें से दूर रहे। स्कूल भी ऑनलाइन क्लास का समय घटाएं। जिनकाे चश्मा लगा है वाे 6 महीने और रूटीन में तीन महीने में बच्चाें की आंखों की जांच कराते रहें।
डाॅ. अंकुर गुप्ता, नवजीवन अस्पताल।

तेजी से बढ़ रहे बच्चाें के चश्मे के नंबर
बच्चाें की आंखाें में लगातार कमजाेरी के केस आ रहे हैं। अब काेराेना के कारण बच्चे घर के अंदर ही हैं। इसी कारण टीवी व माेबाइल पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इसी कारण बच्चाें के चश्मे के नंबर बढ़ रहे हैं। जिन बच्चाें काे चश्मे नहीं लगे थे, उनकाे चश्मे लगने की नाैबत आ रही है। अस्पताल में राेजाना 10-15 केस ऐसे ही मिल रहे हैं।
-डाॅ. कनव गुप्ता, गुप्ता आई केयर अस्पताल।

16 महीने में 30 हजार से ज्यादा फाेन बिके
काेराेना से पहले फाेन की बिक्री दुकानाें पर ज्यादा हाेती थी, लेकिन बीते 16 महीनों में फाेन की बिक्री 10 से 15 फीसदी तक बढ़ गई। ऑनलाइन शाॅपिंग से ज्यादा माेबाइल खरीदे जा रहे हैं। इनमें स्मार्ट फाेन ज्यादा बिक रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक जिले में 16 महीने में 30 हजार से ज्यादा फाेन बिके।
-संदीप सैनी, सैनी माेबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स के मालिक।

डाॅक्टराें के मुताबिक बच्चाें काे फाेन से ऐसे करें दूर

  • संभव हाे ताे बच्चाें की ऑनलाइन क्लास में साथ बैठें और फाेन काे बच्चाें से दूर रखें।
  • ऑनलाइन क्लास में हर 20 मिनट के बाद कम से कम 2 मिनट का जरूर ब्रेक करें।
  • फाेन पर गेम की बजाए परंपरागत खेल खेलने के लिए प्राेत्साहित करें।
  • टीवी के नजदीक न बैठने दें।
  • सुबह की सैर जरूर कराएं और घास पर बच्चाें काे चलाएं।
  • पाैष्टिक आहार दें, गर्मियाें में नींबू पानी, दूध आदि दें, पैक्ड खानें से दूर रखें।
  • बच्चाें के सामने खुद भी माेबाइल का कम इस्तेमाल करें।

अलार्मिंग टाइम क्याेंकि... आई बाॅल की ग्राेथ राेकता है फाेन
फाेन आई बाॅल की ग्राेथ राेकने का काम करता है। 3-4 साल की उम्र में ही बच्चाें काे चश्मा पहनना पड़ता है। ऐसे बच्चाें की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। क्याेंकि बच्चे अब घर के बाहर कम खेलते हैं। जिससे दूर तक देखने की क्षमता अच्छी तरह से विकसित नहीं हाे पाती। माेबाइल स्क्रीन चेहरे के पास रहने के कारण नजदीक देखने की क्षमता तेजी से विकसित हाेती है। बच्चाें की आई बाॅल देखने की आदत के अनुसार विकसित हाेती है।

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