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आस्था पर कोरोना की चोट:चुलकाना धाम के कपाट 1 से 28 मार्च तक रहेंगे बंद, इस बार मेला नहीं

पानीपत11 दिन पहले
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  • समिति ने मंदिर के गेट पर लगाया नोटिस बोर्ड, इस बार एकादशी को होने वाली झंडा यात्रा भी नहीं हो पाएगी

समालखा स्थित प्रसिद्ध चुलकाना धाम में 1 मार्च से श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति ताला लगाने जा रही है। समिति ने मंदिर के गेट पर बड़ा बोर्ड लगा दिया है कि फाल्गुन में कोरोना के नियमों का पालन नहीं हो सकता। न तो 2 गज की दूरी और न मास्क लगाना संभव है। इसलिए, डीसी ने मेला न लगाने का आदेश दिया है। जिस कारण से 1 से 28 मार्च तक मंदिर दर्शन के लिए बंद किया जाएगा।

हालांकि, डीसी धर्मेंद्र सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्होंने मंदिर बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है। मंदिर बंद करने या खोलने की जिम्मेदारी समिति की है। हमने तो यही कहा कि कोरोना के नियमाें का पालन होना चाहिए। दूसरी ओर मंदिर बंद करने के फैसले के विरोध में आवाज उठने लगी है। शाह शक्ति सामजिक संगठन ने मुख्यमंत्री मनोहरलाल को पत्र लिखकर मंदिर खुलवाने की मांग की है।

विरोध शुरू, सीएम से शिकायत- जब कुंभ हो सकता है तो चुलकाना बाबा के दर्शन पर पाबंदी क्यों

सीएम को भेजी शिकायत: मंदिर समिति के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। शाह शक्ति सामाजिक संगठन के दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष विकास भारद्वाज ने मुख्यमंत्री से मंदिर खुलवाने की मांग की है। सीएम को लिखी चिट्‌ठी में भारद्वाज ने लिखा है कि चुलकाना धाम बहुत प्रसिद्ध है, भक्तों को दर्शन से वंचित न किया जाए।

डीसी को बताई कोविड नियमों के पालन में दिक्कत

डीसी के पास गए थे। हमने बताया कि फाल्गुन में चुलकाना धाम में मेला लगता है। मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करा सकते। इस पर डीसी ने कहा कि मेला नहीं लग सकता। नरेश सिंगला, प्रधान व मुख्य सेवक, श्रीश्याम मंदिर सेवा समिति।

मंदिर बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया

मंदिर बंद करने का हमने कोई आदेश नहीं दिया है। मंदिर को खोलना है या बंद रखना है, यह समिति वाले तय करेंगे। हमने तो इतना ही कहा कि कोरोना के नियमों का पालन करना हैै। धर्मेंद्र सिंह, डीसी, पानीपत।

इसलिए प्रसिद्ध है धाम : महाभारत काल में भीम के पोते बर्बरीक ने फाल्गुन के शुक्लपक्ष की एकादशी को शीश का दान दिया था। फाल्गुन में यहां लोगों की भीड़ जुटती है। 25 मार्च को एकादशी है। इसे दिन वृंदावन ट्रस्ट वर्षों से झंडा यात्रा निकालता आ रहा है। अगर मंदिर के द्वार नहीं खुले तो झंडा यात्रा नहीं होगी।

संगठन की 2 बातें

हरिद्वार में कुम्भ मेला लग सकता है तो चुलकाना में क्यों नहीं : संगठन ने अपने पत्र में लिखा है कि जब हरिद्वार में कुम्भ मेला लग सकता है तो फिर समालखा के चुलकाना धाम को भक्तों के लिए कैसे बंद किया जा सकता है।

कोरोना के नियमों के तहत लगे मेला : संगठन ने अपने पत्र में लिखा है कि कोरोना के नियमों के तहत मेला लगे। नियम को सुनिश्चित करना जिला प्रशासन और मंदिर समिति का काम है।

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