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जागरूकता:पर्यावरण को बचाना है तो पराली न जलाएं : एडीसी

पानीपत8 महीने पहले
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कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार ही नहीं किसानों और मजदूरों के रोजगार का माध्यम भी है। यदि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को अपनाया जाए तो इसे प्रदूषण रहित लाभकारी कृषि भी बनाया जा सकता है। एडीसी डाॅ. मनोज कुमार ने किसानों से अपील की कि यदि आगामी पीढ़ियों को जमीन को सही रखना है तो पराली बिलकुल ना जलाए।

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है, मनुष्य बिमारियों की चपेट में आता है तथा जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होती है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे धान के अवशेषों को जलाने की बजाय मिट्टी में मिलाकर जमीन की उर्वरा शक्ति को बढ़ाएं जिससे जमीन के भौतिक, रासायनिक गुणों में भी बढ़ोतरी होगी। इसलिए किसानों को समझना चाहिए कि वे पराली को न जलाएं बल्कि पराली से धन कमाएं। पराली आधारित बायोगैस प्लांट इंडियन ऑयल के सहयोग से स्थापित किए जा रहे हैं।

जहां किसान अपनी पराली को बेचकर धन कमा सकते हैं। कृषि अवशेष प्रबंधन के लिए सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। पानीपत जिले में सरकार की ओर से 50 सीएचसी केंद्राें के माध्यम से जिला के किसानों को 80 प्रतिशत अनुदान पर कृषि अवशेष प्रबंधन के महंगे से महंगे उपकरण व मशीनें दिलवाई हैं।

जिसको किस्त नहीं मिली वे फार्म भिजवाएं

बापौली स्थित ब्लाॅक समिति सभागार में एडीसी पानीपत मनोज कुमार ने बापौली-सनौली खुर्द खंड के गांवों के सरपंचों व ग्राम सचिवों की बैठक ली। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की किस्तों की स्थिति के बारे में पूछताछ कर कहा कि जिनकी अभी तक किस्त नही पहुंची है, वे फार्म भरकर भिजवाएं, ताकि किस्त खातों में डाली जा सके। एडीसी ने हर गांव के बीपीएल सर्वे रिपोर्ट के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कई ग्राम सचिवों को भी फटकार लगाई और एक सप्ताह के अंदर बीपीएल की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करने के आदेश दिए। एडीसी ने सरपंचों को कहा कि वों अपने गांव में किसानों को जागरूक करें और पराली को आग ना लगाने दें।

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