पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Haryana
  • Panipat
  • DPR Will Be Made For Laying Sewer drinking Pipe, Electricity Poles Will Be Installed If The Line Is Pressed, Then The Streets Of New Khukrana Village Will Be Built

उम्मीदें:सीवर-पेयजल पाइप बिछाने को डीपीआर बनेगी, लाइन दबने पर लगेंगे बिजली खंभे, तब बनेगी न्यू खुखराना गांव की गलियां

पानीपत/थर्मल4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
थर्मल के निकट बन रहा नया खुखराना गांव। - Dainik Bhaskar
थर्मल के निकट बन रहा नया खुखराना गांव।
  • खुखराना गांव के 402 परिवार 35 साल बाद थर्मल प्लांट के प्रदूषण से मुक्ति की आस में
  • पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने दोनों की डीपीआर बनाने के लिए टेंडर निकाले, इसके बाद तय होंगी प्लॉट की लोकेशन

35 साल से थर्मल पावर प्लांट और श्रीसीमेंट प्लांट का प्रदूषण झेल रहे खुखराना के 402 परिवारों को नए गांव में शिफ्ट करने की आस फिर से जगी है। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग ने न्यू खुखराना में सीवर और पेयजल सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाने के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने टेंडर निकाले हैं। एक माह में एजेंसी डीपीआर बनाकर देगी। इसके बाद दोनों पाइपलाइन बिछाने के लिए टेंडर निकाले जाएंगे।

सीवर और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के बाद बिजली निगम खंभे लगाएगा। इसके बाद पंचायती राज विभाग की ओर से न्यू खुखराना की गलियां बनाई जाएगी। इसके बाद प्लॉट की लोकेशन तय होगी। पंचायती राज विभाग के एसडीओ नरेश ने दावा किया कि 6 माह में सारे काम पूरे हो जाएंगे। हालांकि, गांव वालों की उम्मीदें जवाब दे चुकी है। यहां के बुजुर्ग कहते हैं कि मरने से पहले गांव शिफ्ट हो जाए तो आत्मा हो शांति मिलेगी।

जानिए, न्यू खुखराना के बारे में सब कुछ-

कहां बन रहा है

असंध रोड मिलन गार्डन के पीछे से आसन कलां जाने वाली रोड के दोनों ओर न्यू खुखराना बन रहा। मिल गार्डन के पास पहले से ही एक कॉलोनी बन चुकी है। इसी के साथ यह गांव लगेगा। नया गांव वर्तमान खुखराना से 2 किलोमीटर शहर की ओर है।

क्या-क्या बन चुका

  • चार चौपाल बनाई जा चुकी है। बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है। एक व्यायामशाला का काम भी पूरा हो चुका है। श्मशान घाट भी बन चुका है।
  • आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण जारी है। एक कम्यूनिटी सेंटर बनाया जाएगा। जिसके लिए वर्क ऑर्डर दे दिया है। एक सप्ताह में काम शुरू होने का पंचायती राज विभाग दावा कर रहा है।

सीवरेज सिस्टम और पेयजल सप्लाई का सर्वे रिपोर्ट देगी एजेंसी

पब्लिक हेल्थ विभाग ने सीवरेज सिस्टम संबंधी डीपीआर बनाने के लिए 3.40 लाख व पेयजल सप्लाई के लिए 2.70 लाख रुपए के दो टेंडर निकाले हैं। टेंडर लेने वाली एजेंसी को पूरे न्यू खुखराना का सर्वे करके लेआउट बनाया होगा। ताकि पता चल सके कि सीवर-पेयजल पाइपलाइन पर कितना खर्च आएगा।

2012 में मकान की कीमत मिली, अब दोगुने हो गए मेटेरियल के दाम

पूर्व सरपंच तेजबीर सिंह ने कहा कि वर्ष 2012 में वर्तमान गांव में घर की कीमत लगाकर रेट तय हो गया था। अब तक पैसे नहीं मिले हैं। इस दौरान बिल्डिंग मेटेरियल की कीमत दोगुनी हो गई है। कहा कि अब अगर गांव को शिफ्ट करना है तो अभी के हिसाब से सरकार कीमत दे। सरकार की गलती का नतीजा हम क्यों भुगतें।

प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी कई विभागों की, इसलिए लटकी हुई है शिफ्टिंग

गांव को शिफ्ट करने का प्रोजेक्ट किसी एक विभाग का नहीं है। जमीन का मालिक बीडीपीओ मतलौडा है। बिजली निगम को बिजली सिस्टम लगाना है। पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग को सीवरेज सिस्टम व पानी की पाइपलाइन दबानी है। पंचायती राज विभाग को गलियां बनानी हैं। सड़कें बनानी हैं। सरकारी सुविधाओं के हिसाब से बिल्डिंग खड़ी करनी हैं। चूंकि, सरकारी विभागों के अफसरों में कोई तालमेल नहीं, न ही कोई दर्द लेना चाहता है। इसलिए 35 साल से शिफ्टिंग चल ही रही है।

इधर, बुजुर्ग बोले- हमारे जीते-जी शिफ्ट हो जाए गांव तो आत्मा को शांति मिलेगी

हमें तो शिफ्टिंग का भरोसा ही नहीं है-

शिफ्टिंग की यह सरकारी चाल, कमाल हो रहा है। हम सरकार के मारे हुए हैं। कोई खुशी से गांव नहीं छोड़ना चाहता। हमारी नस्ल खराब हो गई इस थर्मल और सीमेंट प्लांट की वजह से। हमें तो अब शिफ्टिंग का भरोसा ही नहीं है।-वेद प्रकाश, ग्रामीण

सरकारें आईं-गईं, हम 35 साल से इंतजार कर रहे

35 साल से हम इंतजार ही कर रहे हैं। सरकारें आईं, गईं। फिर आईं, जाएंगी भी। हमें हक नहीं मिला। हमारे जीवन को नर्क बनाने वाले सरकार और अफसर बता सकते हैं कि यह अन्याय क्यों, जीते-जी गांव शिफ्ट हो जाए तो आत्मा को शांति मिलेगी।-सेवाराम, ग्रामीण

हमारे 35 साल क्या कोई लौटा सकता है : धनपत

मैं पूछना चाहूंगा कि हमारी गलती क्या है। 35 साल हो गए, जिस थर्मल के 4 प्लांट की वजह से हमारा जीवन नर्क होना शुरू हुआ, वे भी ढहा दिए गए। लेकिन हम वहीं के वहीं पर हैं। इस सालों में हमने रोजना कई तरह की परेशानियां झेली। अब अगर गांव शिफ्ट भी हो जाए तो क्या 35 साल सरकार हमें लौटाएगी। -धनपत सिंह, ग्रामीण

खबरें और भी हैं...