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बड़ा फैसला:डाइंग का रेट 20% बढ़ाने का उद्यमियों ने लिया फैसला, लागू हुआ तो टेक्सटाइल प्रॉडक्ट की कीमत भी बढ़ेगी

पानीपत18 दिन पहले
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पानीपत. डायर्स एसाेसिएशन से जुड़े उद्यमी निजी हाेटल में मीटिंग करते हुए। - Dainik Bhaskar
पानीपत. डायर्स एसाेसिएशन से जुड़े उद्यमी निजी हाेटल में मीटिंग करते हुए।
  • कोयला, तेजाब, केमिकल, डीजल आदि की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के बाद डायर्स एसोसिएशन ने मीटिंग कर लिया फैसला

कोरोनाकाल में महंगाई की मार अब टेक्सटाइल प्रॉडक्ट पर भी पड़ने जा रहा है। डाइंग की कीमत 20 फीसदी बढ़ने जा रही है। कोयला, डाइंग में उपयोग होने वाले तेजाब, केमिकल, डीजल आदि की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के बाद डायर्स एसोसिएशन ने मीटिंग कर यह बड़ा फैसला लिया है।

बुधवार की शाम डाइंग उद्योग से जुड़े उद्यमियों ने सेक्टर-25 स्थित होटल डेज में मीटिंग कर सामूहिक रूप से यह फैसला लिया। 20 जुलाई से रेट बढ़ाने का फैसला लिया गया है। एसाेसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा कि हम रेट बढ़ाने को मजबूर हो गए हैं। इस से चला तो यहां की डाइंग इंडस्ट्री पर ताला लग जाएगा। राणा ने कहा कि कोयले की कीमत 50 फीसदी बढ़ गई। डाइंग में यूज होने वाले तेजाब की कीमत चार गुणा महंगा हो गया।

कलर की रेट 25 फीसदी तक बढ़ गई है। डाइंग से जुड़े उद्योग पर भारी बोझ पड़ गया है। इसलिए उद्यमियों के सामने रेट बढ़ाना का ही एक मात्र रास्ता बचा था। बैठक में अशोक गुंबर, नितिन अरोड़ा, नरेंद्र नरूला, रोशन जोहरा, त्रिलोचन खुराना, अंकुर सिंगल, बलदेव लखीना, निर्मल कादियान, मोहित नारंग आदि उपस्थित रहे।

इस तरह बढ़ी है डाइंग से जुड़ी चीजों की कीमत : राणा

  • कोयला: पहले 7000 रुपए टन यानी 7 रुपए प्रति किलाे कोयला मिलता था। अब 11.50 रुपए प्रति किलो हो गया है।
  • तेजाब: डाइ में यूज होने वाला तेजाब पहले 38 रुपए किलो मिलता थ। इसकी कीमत बढ़कर अब 152 रुपए किला हो गई है।
  • इसी तरह से एलपीजी गैस पहले 40 रुपए किलो मिलती थी, अब 58 रुपए किलो हो गई है।
  • डीजल कहां डेढ़ साल पहले 62 रुपए प्रति लीटर था, आज यह 90 रुपए प्रति लीटर हो गया है।
  • कलर की रेट भी 25 फीसदी बढ़ गई, केमिकल भी 50-52 रुपए किला वह 107 रुपए किलाे हुआ।
  • पहले लेबर को 9400 रुपए देते थे, आज 14 हजार देना पड़ रहा है।

सभी प्रॉडक्ट की कीमत पर पड़ेगा इसका सीधा असर
टेक्सटाइल के कुल कारोबार में 25 फीसदी हिस्सा डाइंग का काम है। मतलब कि जिस तरह से उद्यमी पानीपत में 1.25 लाख करोड़ बता रहे हैं। उस हिसाब से टेक्सटाइल से संबंधित सभी प्रॉडक्ट की कीमत पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

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