राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस आज:एक्सपोर्ट में 50% हिस्सेदारी हैंडलूम की, अमेरिकन-यूरोपियन का पसंदीदा प्रोडक्ट

पानीपत2 महीने पहले
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आज 7वां राष्ट्रीय हथकरघा (हैंडलूम) दिवस है। हैंडलूम उद्योग पानीपत की सांस्कृतिक विरासत के जरूरी भाग में से एक है। मशीनरी से बेशक हैंडलूम उद्योग को नया आयाम मिला हो, लेकिन आज भी हैंडमेड उद्योग में पानीपत की विश्व में पहचान है। हाथ से बनाया हमारा प्रोडक्ट अमेरिकन और यूरोपियन सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।

एक्सपोर्टर रमण छाबड़ा कहते हैं कि आज भी हमारे कुल एक्सपोर्ट (17 हजार करोड़) में 50% हिस्सेदारी हैंडलूम यानी हाथ से बने प्राेडक्ट की है। हमारे यहां आज भी पिटलूम-खड्‌डी ही नहीं चरखे का भी उपयोग हो रहा है। एक्सपोर्टर विनोद धमीजा कहते हैं कि आने वाले वक्त में हमारा कारोबार और उद्योग दोनों बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगे।

आजादी से पहले पिटलूम पर बनते थे कंबल

पानीपत में हैंडलूम उद्योग आजादी से पहले भी था, लेकिन तब पिटलूम पर कंबल बनते थे। नंदलाल पर किताब लिखने वाले रमेश पुहाल कहते हैं कि पाकिस्तान से रोहतक में बसे उत्साद नंदलाल को सरकार ढूंढ़कर पानीपत लाई। तब नंदलाल ने खड्‌डी शुरू की। वही हमारी पहचान बनी हुई है।

चीन की जगह हमें मिला 2000 करोड़ का कारोबार

आज पानीपत का 120 हजार करोड़ का हैंडलूम कारोबार है। जिसमें 90 हजार करोड़ से ज्यादा के घरेलू व्यापार हैं और 17 हजार करोड़ से ज्यादा एक्सपोर्ट। छाबड़ा कहते हैं कि चीन का 2000 करोड़ का कारोबार पहली बार पानीपत के एक्सपोर्टरों को मिला है। जिसमें पॉलिस्टर के प्रॉडक्ट हैं।

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