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कोरोना केसों के साथ सैंपलिंग व वैक्सीनेशन भी घटा:जून में राेजाना 2700 से ज्यादा लाेगाें काे लग रहा था टीका, अब केवल 2500 को ही लग रहा

पानीपत2 महीने पहले
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  • पहले राेजाना 1500 से 2000 की हाे रही थी सैंपलिंग, अब केवल 700 से 800 के ही लिए जा रहे सैंपल

जिले में जुलाई महीना 15 महीनाें के बाद ऐसा महीना है जिसमें अब तक के सबसे कम काेराेना केस मिले हैं। जुलाई में सिर्फ 24 नए केस ही सामने आए हैं। इससे पहले 13 केस अप्रैल-2020 में आए थे। इससे स्वास्थ्य विभाग और लाेगाें ने राहत की जरूर सांस ली है, लेकिन आपकाे बता दें कि इस महीने में काेराेना केस ही नहीं सैंपलिंग और वैक्सीनेशन की रफ्तार भी घट चुकी है। मई में जहां 48 हजार लाेगाें की रिकाॅर्ड सैंपलिंग की गई थी। वहीं, जुलाई में अभी तक सिर्फ 16 हजार लाेगाें की सैंपलिंग हाे पाई है।

पहले राेजाना 1500 से 2000 की सैंपलिंग हाे रही थी, अब तक 700 से 800 ही सैंपल लिए जा रहे हैं। इनमें भी 70 फीसदी सैंपलिंग बाहर जाने वालाें की है। इसी तरह से काेराेना की संभावित तीसरी लहर काे देखते हुए जहां वैक्सीनेशन में तेजी आनी चाहिए थी, वह भी अब फीका पड़ चुका है। जून में राेजाना 2700 से ज्यादा लाेगाें काे टीका लग रहा था, वहीं अब उसे कम यानी 2500 काे ही टीका लग पा रहा है।

केंद्र सरकार और राज्य सरकार का दावा था कि जुलाई में रिकाॅर्ड ताेड़ वैक्सीनेशन हाेगा और स्पीड नहीं घटेगी, लेकिन हुआ इसके विपरित ही। जिले में सेंटराें की संख्या 60 से कम हाेते-हाेते बुधवार काे मात्र एक सेंटर पर आकर रह गई। रविवार काे सिर्फ सिविल अस्पताल में ही टीकाकरण रहा। सेंटराें की कम संख्या हाेने का मुख्य कारण यही है कि डाेज प्रर्याप्त मात्रा में नहीं बची है। इसलिए लाेगाें काे धैर्य टूटता जा रहा है। लाेग बिना रजिस्ट्रेशन व अपाॅइंटमेंट के सेंटर पहुंच रहे।

जिले में जुलाई महीने में अभी तक सिर्फ 16 हजार 889 लाेगाें के सैंपल हुए हैं। इसमें भी ज्यादातर उन लाेगाें ने सैंपलिंग कराई जिन्हाेंने बाहरी राज्याें में काम करने या बाहरी राज्याें से यहां काम करने आने वालाें ने, हरिद्वार, वैष्णाें देवी सहित अन्य स्थलाें पर घूमने वाले लाेगाें ने सैंपलिंग कराई है। करीब 70 फीसदी सैंपल बाहर जाने वालाें के या बाहर आने वालाें के ही हैं। कम पाॅजिटिव केस आने का कारण भी यही है क्याेंकि अब ज्यादातर लाेग स्वस्थ ही सैंपलिंग करा रहे हैं। सामान्य बुखार व अन्य तरह के मरीज अब सैैंपलिंग से बच रहे हैं।

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