लापरवाही का नतीजा:काेराेना की पहली लहर से नहीं लिया सबक, नतीजा: दाेगुना से ज्यादा केस, रोज हो रही माैतें

पानीपत6 महीने पहलेलेखक: गाेविंद सैनी
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प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और लाेग अब भुगत रहे लापरवाही का नतीजा - Dainik Bhaskar
प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और लाेग अब भुगत रहे लापरवाही का नतीजा

काेराेना की पहली लहर से जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और लाेगाें ने काेई सबक नहीं लिया। इस कारण अब दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित हाे रही है। नतीजा आपके सामने ही है। अप्रैल में राेजाना दाेगुना से ज्यादा केस मिल रहे हैं और राेजाना पानीपत के दाे लाेगाें की जान भी जा रही है। पानीपत में मरने वाले बाहर के लाेगाें काे भी जाेड़ लिया जाए ताे ये आंकड़ा उससे भी दाेगुना हाे जाएगा।

पहली लहर में केसाें की नए संख्या से 115% ज्यादा केसाें की रिकवरी हुई थी। सितंबर-2020 में नए केस 3475 मिले थे और रिकवरी 4015 की हुई थी। लेकिन अब अप्रैल के 28 दिनाें में नए केसाें की संख्या से सिर्फ 40% केसाें की रिकवरी हुई है। इन 28 दिनाें में 7 हजार 659 नए केस मिले हैं। वहीं सिर्फ 3 हजार 132 लाेग स्वस्थ हुए हैं। इस महीने पानीपत के 63 लाेगाें काे काेराेना ने छीन लिया हैं।

एक्सपर्ट बार-बार एक ही बात कह रहे है कि बात कह रहे हैं कि अगर पहली लहर के बाद लाेगाें ने ठीक पहले की तरह से काेराेना गाइडलाइन नियमाें का पालन किया हाेता ताे आज ये सब भुतना न पड़ता। अब न ताे लाेगाें काे समय पर बेड मिल रहा हैं ताे काेई ऑक्सीजन के लिए तरस रहा है। श्मशान में शवाें काे जलाने के लिए भी लाइनाें में लगाना पड़ रहा है। चिताओं काे ठंडी करके एक के बाद एक का अंतिम संस्कार किया जा रहा है।

यह पड़ा फर्क : अप्रैल के 28 दिनाें में नए केसाें की संख्या से सिर्फ 40% केसाें की रिकवरी हुई

  • प्रशासन की कहां हुई चूक : पहली लहर के बाद प्रशासन काे ये करना था कि जिन केसाें में अक्टूबर और नंवबर महीने में केस मिल रहे थे, उन एरियाओं में छाेटे-छाेटे कंटेनमेंट जाेन बनाने थे। पुलिस का पहरा भी लगाना था। और ये हाे सकता था क्याेंकि उन दिनाें में केसाें की संख्या 1 हजार से भी नीचे थी।
  • स्वास्थ्य विभाग कहां चूका : पहली लहर के दाैरान जाे पाॅजिटव मिले थे, उनके परिजनाें के सैंपलिंग ही नहीं की। जाे बहुत ज्यादा संपर्क में था, उन्हाेंने खुद ही सैंपलिंग करवाई। इसके बाद हाेम आइसाेलेशन के नियमाें काे ताक पर रखकर 95 प्रतिशत लाेगाें काे हाेम आइसाेलेट दिया।
  • लाेगाें काे क्या करना था : जाे पाॅजिटिव आ रहे थे और हाेम आइसाेलेशन में रहे। उनमें से भी 60 प्रतिशत लाेगाें ने नियमाें का पालन ही नहीं किया। एक कमरे में क्वारेंटाइन नहीं रहे। एक ही टेबल पर खाना खाया ताे किसी के घर में एक ही टाॅयलेट यूज करने के लिए थी।
  • और अब हुआ क्या : अब ज्यादा जाे लाेग पाॅजिटिव आ रहे है वाे परिवाराें के सदस्य पाॅजिटिव आ रहे। किसी घर के 5 ताे किसी घर के 7 लाेग पाॅजिटिव मिल रहे हैं। यानी अब काेराेना कम्यूनिटी सैपरेट हाे चुका है। एक से दूसरे और फिर तीसरे में जा रहा है। इसलिए एकाएक केस भी बढ़ गए।

समझिए... अचानक से संक्रमण बढ़ने के 5 कारण

  • पहले : पॉजिटिव केस आते ही तुरंत क्वाॅरनटाइन सेंटर या अस्पताल में कम से कम 15 दिन क्वाॅरेंटाइन किया जाता था।
  • अब : पॉजिटिव आने के बाद लक्षण पूछते हैं। सामान्य हैं तो होम क्वारेंटाइन या अधिकतम 7 दिन अस्पताल में रखते हैं।
  • पहले : परिवार को क्वारेंटाइन किया जाता था। उनकी जांच होती थी, लक्षण देख कर भर्ती किया जाता था।
  • अब- ज्यादातर मौखिक जानकारी ले रहे हैं। 90 फीसदी मरीजों को घर पर ही क्वारेंटाइन किया जा रहा है।
  • पहले : अस्पताल में क्वारेंटाइन होने वाले मरीज की पूरी केयर होती थी, खाना-पीना और दवाइयां आदि सभी काम तरीके से होते थे।
  • अब : अब ऐसा नहीं हाे पा रहा, हाेम क्वारेंटाइन वालाें काे समय पर दवा लेना, खाना पीना तक नहीं हाे पा रहा।
  • पहले : कोई भी पांच जने एक जगह एकत्र नहीं होते थे। कार्रवाई होती थी, समझाइश की जाती थी।
  • अब : जगह-जगह समूह में लोग देखे जा सकते हैं। कई बिना मास्क और बिना सेनेटाइजर के ही मिलते रहते हैं।
  • पहले : गांवों और कस्बों में कम पॉजिटिव थे तो लोगों में डर था और एक-दूसरे से मिलने से डरते थे।
  • अब : कोरोना गांवों में लाेग बिना मास्क के देख सकते हैं, चौपालाें में सामूहिक धूम्रपान भी।
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