फिजिकल डिस्टेंसिंग / साेशल डिस्टेंसिंग जरूर बनाएं, लेकिन रिश्ताें में दूरी कभी न लाएं

पुलिस लाइन में समझाने पहुंचीं नर्स पूनम और विनोद देशवाल। पुलिस लाइन में समझाने पहुंचीं नर्स पूनम और विनोद देशवाल।
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पुलिस लाइन में समझाने पहुंचीं नर्स पूनम और विनोद देशवाल।पुलिस लाइन में समझाने पहुंचीं नर्स पूनम और विनोद देशवाल।

  • क्वारेंटाइन, पाॅजिटिव केस और ठीक हाे चुके केसाें की काउंसिलिंग कर रहे साेशल वर्कर

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

पानीपत. काेराेना वाॅरियर में आज उनकी कहानी जाे क्वारेंटाइन में रहे लाेगाें, पाॅजिटिव और ठीक हाे चुके लाेगाें की काउंसिलिंग कर रहे हैं। क्याेंकि ये असल में समाज में आई दूरी काे मिटाने की काेशिश में लगे हुए हैं। इसमें सिविल अस्पताल की मनाेराेग विशेषज्ञ डाॅ. माेना नागपाल और नाेडल अधिकारी डाॅ. ललित वर्मा द्वारा गठित टीमाें में तीन लाेगाें की मुख्य भूमिका है। इन तीन में साइक्रेटिक नर्स पूनम, साइक्रेटिक साेशल वर्कर विनाेद देशवाल और साइक्रेटिक साेशल वर्कर रवि हैं। वाे हर पाॅजिटिव केस व ठीक हाे चुके केस और क्वारेंटाइन में रह रहे लाेगाें की काउंसिलिंग ग्राउंड लेवल पर जाकर करते हैं। फाेन पर भी काउंसिलिंग करते हैं।

जिले में अबतक 46 पाॅजिटिव केस मिले हैं, जिनमें 32 ठीक हुए हैं। वहीं 10 का इलाज भी जारी है। इसके अलावा करीब 3400 लाेगाें के सैंपल हुए और उनकी रिपाेर्ट निगेटिव आई लेकिन उनकाे भी क्वारेंटाइन में रहना पड़ा और इसी बीच लाेगाें ने उनसे दूरी बनाई। 

पाॅजिटिव

:साइक्रेटिक साेशल वर्कर विनाेद देशवाल ने बताया कि जाे पाॅजिटिव केस मिलते हैं, उनकाे इलाज के लिए यहां से खानपुर अस्पताल में भेजा जाता है। एेसे में उसकाे परेशानी हाेना लाजिमी है। फिर हमारी टीम उससे फाेन या वीडियाे काॅल से बात करती है। कई केसाें में हुआ है कि व्यक्ति परिवार व समाज काे लेकर साेचता रहता है, उसकाे काे नींद नहीं अाती या बेचैनी रहती है। कई बार व्यक्ति खुद-ब-खुद राेने लगता है। उसकाे समझाया जाता है कि आपका परिवार ठीक है और डाॅक्टराें की निगरानी हैं। आप सकारात्मक रहें, जल्द ठीक हाेकर घर लाैटेेंगे।

क्वारेंटाइन : साइक्रेटिक नर्स पूनम ने बताया कि जब किसी व्यक्ति का सैंपल लिया जाता है ताे उसकी रिपाेर्ट आने में समय लगता है। तब तक के लिए उसके क्वारेंटाइन किया जाता है। उसकी परेशानियाें काे लेकर काउंसिलिंग की जाती है। जैसे किसी की परिवार की, किसी काे राेजगार की, किसी काे ये डर की अब लाेग उसे कैसे देखेंगे। उसकाे समझाया जाता है, कि हर काेई आपके साथ है। आप बस सकारात्मक साेचिए।

काेराेना काे हराकर आए:

 विनाेद व रवि ने बताया कि जब वाे ठीक हाेकर आते हैं, उनके भी कुछ दिन के लिए क्वारेंटाइन में रहना पड़ता है। कई केसाें में सामने आया है कि ठीक हाेकर आने वालाें लाेगाें पर भी लाेग काेराेना काे लेकर गलत कमेंट करते हैं। समाज उनकाे हीन भावना से देखता है, भेदभाव से देखता है। फिर उनकी टीम गांवाें में या उनके एरिया में जाकर काेराेना काे हराने वाले व्यक्ति, परिवार व पड़ाेसियाें से बातचीत करते हैं। अब यह ठीक है और आपके ही गांव, पड़ाेस व परिवार का हिस्सा है।

कई बार ये आती है परेशानी

: विनाेद देशवाल ने बताया कि जब हम कई बार ग्राउंड लेवल पर लाेगाें काे समझाने जाते हैं ताे वाे फ्री नहीं हाेते, या किसी काम में लगे हाेते हैं। एेसे में वाे अपना आपा नहीं खाेते बल्कि इंतजार करते हैं। कई बार लाेगाें से बहस हाेती है ताे उनकाे भी समझाया जाता है। कई केसाें में ये था कि पड़ाेसियाें का राेजाना झगड़ा हाेता था।

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