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कवि सम्मेलन:माटी की सुगंध समूह ने विजयादशमी पर्व पर किया कवि सम्मेलन का आयोजन

पानीपतएक महीने पहले
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दीपिका सितोदिया (फाइल फोटो)

माटी की सुगंध समूह ने विजया दशमी पर्व गूगल मीट पर आयोजित कर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के साथ धूमधाम से मनाया। अध्यक्ष राष्ट्रीय गीतकार डाॅ. जयसिंह आर्य मुख्य अतिथि रहे। विनोद भृंग सहारनपुर विशिष्ट अतिथि, केसर शर्मा कमल, जयप्रकाश मिश्र गाजियाबाद, भारत भूषण वर्मा असंध मुख्य रूप से मौजूद रहे। संचालन संजू सूर्यम ठाकुर ने किया। शुरूआत शामली के कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने मृदु एवं सरस्वती वंदना के साथ की।

डाॅ. जयसिंह आर्य ने अहंकार के दुष्परिणाम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ताकत पर लंकेश ने किया था अति गुरूर। राम-लखन ने कर दिया उसको चकनाचूर। सहारनपुर के कवि विनोद भृंग ने बुराई से बचने की सीख देते हुए कहा कि बुरे काम का हो नहीं सकता शुभ परिणाम। दशकंधर के अन्त पर यह बोले थे भगवान श्री राम। कवि केसर शर्मा कमल ने रावण के अन्तस की पीड़ा से समाज को आइना दिखाया। कहा कि मेरे नाम को तो यूं ही बदनाम करते हैं। यूं तो हर पाप सरेआम करते हैं।

कवि जयप्रकाश मिश्र ने भगवान राम की भक्ति को सर्वथा के लिए प्रासंगिक बताया। कहा कि पूरण होती कामना लेकर जिसका नाम। मन-वाणी मेरे बसे वही दुलारे राम। भारतभूषण वर्मा ने राम को जगत नियन्ता बताते हुए कहा कि श्रीहरि विष्णु के राम अवतारी हैं। राम ही की कृपा से सृष्टि सारी है। संजू सूर्यम ठाकुर ने राम के प्रति आस्था को भी देशभक्ति से जोड़ा। कहा कि कभी भी शान अपने देश की घटने नहीं देंगे। सिपाही देश के कदम हटने नहीं देंगे। सजाया भाल पर तिरंगा कफन यारों, कसम श्री राम की हिंदुस्तान को बंटने नहीं देंगे।

पटना के डाॅ. पंकज वासिनी ने दुष्कर्म के दुष्परिणाम का पूर्वाभास स्पष्ट किया। सीता-मुक्ति का था यह युद्ध। सात्विक राम थे अति क्रुद्ध। देख रावण का मन हुआ सशंक। दुर्गा लिए रावण को अंक। सुल्तानपुर से हरिनाथ शुक्ल हरि ने सुनाया कि जब तलक मन का रावण है मद में सुनो। राम आएंगे कैसे अवध में सुनो। दिल्ली से श्रीकृष्ण निर्मल ने रावण-दहन को लेकर समाज पर तंज कसा। कहा कि रावण के पुतले भारत में हर साल जलाए जाते हैं। जो असली रावण जिन्दा हैं, हर हाल बचाए जाते हैं। गोवाहटी से दीपिका सुतोदिया ने कहा कि हंसाती हैं आंखें रुलाती हैं आंखें। श्री राम का दर्श कराती हैं आंखें। इस अवसर पर संतोष त्रिपाठी, ऊषा तिवारी, कैलाशनाथ शुक्ला, सतीश अकेला, तेजवीर सिंह त्यागी, रमेश तिवारी और हरगोबिन्द झाम्ब आदि मौजूद रहे।

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