ग्राउंड रिपाेर्ट:सीएचसी में पर्याप्त बेड नहीं, 13 डाॅक्टराें की कमी, बाल राेग विशेषज्ञ ताे है ही नहीं, कैसे संभालेंगे तीसरी लहर

पानीपत/समालखा/इसराना/मतलाैडा/बापाैली5 महीने पहले
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बापाैली. सीएचसी में भर्ती मरीज। - Dainik Bhaskar
बापाैली. सीएचसी में भर्ती मरीज।
  • जिले की 7 सीएचसी में 25-25 बेड लगाने के निर्देश दिए, लेकिन हैं सिर्फ 112
  • सीएचसी इंचार्ज के पास बेड लगाने के मैसेज तक नहीं पहुंचे, सिविल अस्पताल में भी इंतजाम पूरे नहीं

केंद्र सरकार के विशेषज्ञाें ने अाशंका जताई है कि कोरोना की यदि तीसरी लहर आई तो इसमें बच्चे अधिक प्रभावित हाेंगे। बच्चाें के लिए अभी वैक्सीन भी नहीं आई है, इसलिए अभी से बच्चों को कोरोना से बचाने की पूरी तैयारी करना जरूरी है, लेकिन मौजूदा हालात काफी चिंताजनक हैं। क्याेंकि सिविल अस्पताल में ही बना एकमात्र एसएनसीयू वार्ड महज दाे बाल राेग विशेषज्ञाें के भरोसे है।

जिले में 7 सीएचसी हैं, जहां बच्चाें के लिए एक भी बाल राेग विशेषज्ञ नहीं है। 13 सामान्य डाॅक्टराें की भी कमी है। बता दें कि राज्य सरकार ने 4 दिन पहले घाेषणा की थी कि सभी जिलाें की हर सीएचसी (सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र) में बच्चाें के लिए 25-25 बेड लगाए जाएंगे।

जिले में तीसरी लहर में बच्चों को बताए जा रहे खतरे को देखते हुए सरकार का तैयारियों का दावा हकीकत की तस्वीर के आगे बड़ी चुनौती जैसा साबित हाे रहा है। जिले में 7 सीएचसी हैं। ऐसे में कुल 175 बेड के कोविड वार्ड बनेंगे। मानक है कि 25 बेड पर 4 डॉक्टर होने चाहिएं। ऐसे में 28 डॉक्टरों की जरूरत पड़ेगी। जबकि अभी केवल 15 सामान्य डाॅक्टर ही हैं। बाल राेग विशेषज्ञ डॉक्टर ताे हैं ही नहीं।

पढ़िए... जिले की 4 सीएचसी से भास्कर की लाइव रिपोर्ट, कितने इंतजाम हैं बच्चों के लिए

  • सीएचसी बापाैली: बापाैली सीएचसी में 30 बेड की व्यवस्था है, लेकिन बच्चाें के लिए इन्हें वार्ड में तबदील नहीं किया गया है। यहां पर सिर्फ दाे डाॅक्टराें की ड्यूटी है। इस सीएचसी में शुरू से ही डाॅक्टराें का टाेटा रहा है। इस सीएचसी पर करीब 50 गांवाें के बच्चे और ग्रामीण निर्भर हैं।
  • सीएचसी नारायणा: सीएचसी नारायणा में फिलहाल 30 सामान्य बेड हैं और 2 डाॅक्टराें की ड्यूटी हैं। लेकिन एक डाॅक्टर की ड्यूटी ज्यादातर समालखा अस्पताल में रहती है। अभी बच्चाें के लिए काेई अलग से वार्ड नहीं बनाया गया है। यहां करीब 8 गांवाें के बच्चे और ग्रामीण इलाज के लिए आते हैं। बच्चाें काे इलाज के लिए सिविल अस्पताल में ही रेफर किया जाता है।
  • सीएचसी अहर: अहर सीएचसी जिले की एक मात्र ऐसी सीएचसी है, जिसमें सबसे कम बेड और सबसे कम डाॅक्टर हैं। यहां पर मात्र 8 बेड हैं। डाॅक्टराें की संख्या भी एक ही है। वाे भी सीएचसी के इंचार्ज डाॅ. वत्स हैं। 24 एएनएम और जीएनएम का स्टाफ है।
  • सीएचसी नाैल्था: इसराना खंड में नाैल्था सीएचसी में तीन एमबीबीएस डाॅक्टर कार्यरत हैं। 6 जीएएनएम, 12 एएनएम हैं, लेकिन बाल राेग विशेषज्ञ नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए प्रस्तुति गृह ताे है, लेकिन बच्चाें के लिए सुविधा नहीं है। बच्चाें काे काेई बड़ी बीमारी, छाेटे बच्चाें काे सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया जाता हैं। डाॅ. रिंकू ने बताया कि जैसै निर्देश आएंगे, वैसी व्यवस्था की जाएगी।

अभी जिले में स्थिति ठीक है, बेड लगेंगे, पूरी व्यवस्था की जाएगी : सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डाॅ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि अभी जिले में स्थिति ठीक है। सीएचसी में बेड लगाए जाएंगे। अस्पताल में भी वार्डाें काे बच्चाें के लिए बदल दिया जाएगा। अभी व्यवस्था ठीक है। सीनियर डाॅक्टराें से आगे की प्लानिंग करने के बाद डाॅक्टराें व अन्य सामान की डिमांड भी भेज दी जाएगी।

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