किसानों पर दोहरी मार:हरियाणा में बायो क्रॉप साइंस के NPK का सैंपल फेल, विक्रेता को नोटिस

पानीपत2 वर्ष पहले
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बाजार में 50 किलोग्राम NPK के दाम 1175 रुपए हैं। - Dainik Bhaskar
बाजार में 50 किलोग्राम NPK के दाम 1175 रुपए हैं।
  • पानीपत कृषि विभाग ने उरलाना कलां के विक्रेता से लिया था सैंपल
  • ​​​​​जांच में निम्न स्तर का पाया गया NPK, 1175 का है 50 किलोग्राम

कृषि कानूनों को लेकर 26 नवंबर से किसान सड़कों पर हैं। किसान फसलों के सही दामों का रोना रो रहे हैं। वहीं, अच्छी पैदावार के लिए हरियाणा के किसान जो फर्टिलाइजर खरीद रहे हैं, वह भी जांच खरे नहीं उतर रहे। पानीपत कृषि विभाग ने उरलाना कलां की एक खाद दुकान से NPK का सैंपल लिया था। यह सैंपल जांच में निम्न स्तर का पाया गया है। अब विभाग की ओर से विक्रेता को नोटिस जारी किया गया है। यह फर्टिलाइजर सफीदों की बायो क्राॅप साइंस ने तैयार किया था।

DDA वीरेंद्र आर्य ने बताया कि 24 नवंबर को उरलाना कलां स्थित वंदना प्रोसेसिंग फूड प्रोड्यूसर लिमिटेड से NPK समेत चार फर्टिलाइजर के सैंपल लिये गए थे। NPK का सैंपल जांच के लिए करनाल लैब भेजा गया। बाकी की जांच बैंगलुरु स्थित लैब में हो रही है। करनाल लैब से NPK की जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है। जांच में NPK निम्न स्तर का पाया गया है। यह प्रोडक्ट हरियाणा के जींद जिले के सफीदों स्थित बायो क्रॉप साइंस में तैयार होता है। इस कंपनी में अन्य फर्टिलाइजर भी तैयार किए जाते हैं। अब विक्रेता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद विक्रेता और कंपनी दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।

पौधों को न्यूट्रेंट देता है NPK
किसी फसल के पौधे पीले होने पर उनमें बीमारी लगती है। अधिकतर फर्टिलाइजर फसल को पानी लगाने के साथ दिये जाते हैं। पानी का समय न होने पर NPK का छिड़काव करके फसल को बीमारी से बचाया जा सकता है। NPK बिना पानी के ही घुल सकता है। इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा होती है। जिससे पौधों को पोषण मिलता है। बाजार में 50 किलोग्राम NPK के दाम 1175 रुपए हैं।

15 दिनों से संघर्ष कर रहे हैं किसान
पंजाब, हरियाणा और UP समेत देशभर के किसान बीते 15 दिनों से खुले आसमान के नीचे सर्दी की रात गुजारने को मजबूर हैं। किसान कृषि बिलों को रद कर MSP का कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। इस संघर्ष में अभी तक 12 से अधिक किसानों की जान जा चुकी है। कई दौर की वार्ता के बाद भी किसानों और सरकार में सहमति नहीं बनी है। किसान अभी भी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।