ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल रुका:कंपनी इंजीनियर व बैकअप में रखे जाने वाले तीन गुना ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं होने की वजह से ऑक्सीजन प्लांट का ट्रायल रुका

पानीपतएक महीने पहले
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पानीपत. सिविल अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट। - Dainik Bhaskar
पानीपत. सिविल अस्पताल में लगा ऑक्सीजन प्लांट।
  • सुधार के प्रयास- 50 बड़े ऑक्सीजन सिलेंडराें की विभाग कर रहा है व्यवस्था

सिविल अस्पताल में बनाए गए नए ऑक्सीजन प्लांट बुधवार काे ड्राई रन (ट्रायल) नहीं हाे पाया। इसके दाे कारण रहे। पहला कारण है-ट्रायल के दाैरान मरीजाें के लिए तीन गुना ऑक्सीजन सिलेंडर स्टाॅक में रखने हैं, वाे नहीं पहुंच पाए। करीब 50 बड़े ऑक्सीजन सिलेंडराें की विभाग व्यवस्था कर रहा है। दूसरा ये कि लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) कंपनी के इंजीनियर ने पीएमओ डाॅ. संजीव ग्राेवर काे पत्र भेजा है कि इस प्लांट के ट्रायल में कंपनी के इंजीनियर भी शामिल रहेंगे।

बता दें कि ट्रायल में प्लांट से ऑक्सीजन सप्लाई और ऑक्सीजन का सेचुरेशन लेवल सहित अन्य चीजें जांची जाएंगी। यह 24 घंटे के लिए ट्रायल हाेगा, लेकिन इसमें किसी भी मरीज काे शामिल नहीं किया जाएगा, यानी ट्रायल के दाैरान इस प्लांट से मरीज काे ऑक्सीजन नहीं दी जाएगी। बता दें कि यह प्लांट हवा से 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन तैयार करेगा। लगभग 140-150 बेड को 24 घंटे आपूर्ति की जा सकेगी।

ऐसे बिस्तरों तक पहुंचेगी ऑक्सीजन
सिविल अस्पताल में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा नया ऑक्सीजन प्लांट बनाया गया है। जाे हवा से ऑक्सीजन बनाएगा। प्लांट ड्राई ऑक्सीजन तैयार करेगा, टैंक में स्टोर होते ही ऑक्सीजन स्वत: लिक्विड में तब्दील हो जाएगी। पाइपलाइन के जरिए अस्पताल के वार्डों तक पहुंचेगी।

जानिए, किस विभाग ने क्या काम किया
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने शेड-फाउंडेशन (सिविल वर्क) बनाया है। लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) कंपनी के इंजीनियर जनरेटर, कंप्रेसर, ड्रायर और टैंक (कंपलीट प्लांट) स्थापित किया है। हवा में 21 (लगभग पांचवां हिस्सा) फीसद ऑक्सीजन होती है। वातावरण से हवा को कंप्रेश किया जाता है। फिल्टर की मदद से इसे शुद्ध कर ठंडा किया जाता है।

बचत: हर महीने करीब 50 हजार रुपए बचेंगे
सिविल अस्पताल में 100 से ज्यादा छाेटे और बड़े ऑक्सीजन सिलेंडर माैजूद हैं। ऑक्सीजन प्लांट से आपूर्ति होने पर स्वास्थ्य विभाग के करीब 50 हजार रुपए मासिक से अधिक की बचत होगी। ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिलिंग नहीं कराने पड़ेंगे। इसी के साथ भूतल से ऊपर की सभी मंजिलों में सिलेंडर पहुंचाने की सिरदर्दी भी कम होगी।

ट्रायल के लिए आएंगे कंपनी के इंजीनियर
अस्पताल में जल्द ट्रायल हाेगा। एलएंडटी कंपनी के इंजीनियर भी शामिल हाेंगे। इसके लिए कंपनी के इंजीनियर ने हमें पत्र भेजा है कि उनकाे ट्रायल में शामिल किया जाए। इंजीनियर शामिल रहेंगे ताे ट्रायल काे सफल बनाने में भी मदद मिलेगी। प्लांट शुरू हाेने के बाद मरीजाें काे इसका भरपूर फायदा हाेगा। -डाॅ. संजीव ग्राेवर, पीएमओ

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