बदलाव / प्रदेश में बड़े स्तर पर नए सिरे से तय होंगी पंचायत, ब्लॉक, तहसील और सब डिवीजन की सीमाएं

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला (फाइल फोटो) डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला (फाइल फोटो)
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डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला (फाइल फोटो)डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला (फाइल फोटो)

  • जरूरत के मुताबिक पंचायत से लेकर तहसील तक को प्रमोट किया जा सकता है, कुछ का दायरा कम या ज्यादा भी हो सकता है, नए का गठन भी संभव
  • डिप्टी सीएम दुष्यंत की अध्यक्षता में बनी कमेटी, कमेटी में शिक्षा मंत्री व सहकारिता मंत्री भी शामिल

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:12 AM IST

पानीपत. प्रदेश में बेहतर सुविधाओं और सहूलियतों के लिए सब डिवीजन, ब्लॉक, तहसील, उपतहसील, पंचायत समिति व पंचायतों की सीमाओं जरूरत के मुताबिक बड़े स्तर पर नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कमेटी भी बना दी है। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर और सहकारिता मंत्री डॉक्टर बनवारी भी शामिल हैं। इसे लेकर पिछले माह राजस्व विभाग के एसीएस धनपत सिंह की ओर से नोटिफिकेशन जारी हुआ था। जल्द ही पंचायत विभाग की ओर से भी नोटिफिकेशन जारी होगा, जिसके बाद कमेटी की बैठक होगी।

कमेटी चाहे तो किसी विधायक को भी इस कार्य में शामिल कर सकती है। कमेटी इन सभी के दोबारा निर्धारण संबंधी रिपोर्ट सरकार को सौंपेंगी। कमेटी का कार्यकाल तीन माह का है, जो प्रदेश में नए सब डिवीजन, तहसील, उपतहसील, पंचायत समिति और पंचायतों का नए सिरे से निर्धारण करेगी। लेकिन कोरोना की वजह से अभी कोई काम नहीं हो पाया है। जबकि कमेटी के तीन माह 10 जुलाई में पूरे हो जाएंगे। इधर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने कहा कि जब सब कुछ बंद है ताने कमेटी 3 माह में कैसे रिपोर्ट देगी।  कमेटी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला ने कहा कि यदि कोरोना की वजह से समय कम रहता है तो नोटिफिकेशन दोबारा होगा या समय आगे बढ़ाया जा सकता है।

बड़ा फायदा. गांव के नजदीक होंगे जरूरी काम

प्रदेश में शहरों का विस्तार हाे चुका है तो गांव कस्बों का रूप ले चुके हैं। ऐसे में कई बार ब्लॉक और तहसीलों को सबडिवीजन बनाने की मांग उठती है। मांग तार्किक और जरूरी है तो क्षेत्र के लोगों को लाभ हाेगा।
ग्राम पंचायतें भी दूसरे सब डिवीजन, तहसील आदि से जुड़ना चाहती हैं, क्योंकि मुख्यालय इनके नजदीक होता है। यह कमेटी लोगों की सुविधा को लेकर काम करेगी। 
यदि कोई सब डिवीजन बनता है तो उसके आस-पास के ग्रामीणों को वहीं पर प्रशासनिक सेवा मिलने लगेगी। छोटे-छोटे सरकारी काम यहीं पर हो सकेंगे। 
किसी पंचायत को पास की पंचायत समिति में शामिल होने पर पंच-सरपंचों को पंचायती कामकाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।  

जनसंख्या-भौगोलिक क्षेत्र के साथ कई फैक्टर देखे जाएंगे
जिन सब डिवीजन, ब्लाॅक, तहसील या पंचायतों का दोबारा निर्धारण किया जाना है, उनकी जमीनी हकीकत परखी जाएगी।
कमेटी देखेगी कि लोगों को किस प्रकार प्रशासनिक सुधार के साथ गवर्नेंस और बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं।
जनसंख्या, प्रशासनिक सेवा, आर्थिक गतिविधि, भौगोलिक क्षेत्र आदि फैक्टर भी देखे जाएंगे। बाद में अपग्रेडेशन के लिए सरकार और भी पैमाने बनाएगी। 

इससे पहले भी बनी थी कमेटी, तब चरखी दादरी बना था 22वां जिला

सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में बनी कमेटी की सिफारिश पर चरखी दादरी को 22वां जिला बनाया गया था। अम्बाला कैंट, बाढ़ड़ा, बड़खल, नारनौंद, बादली, उचाना, घरौंदा, पुन्हाना और रादौर को सब-डिवीजन बनाया गया था। 2017 में तावड़ू और 2018 में लाडवा को सब-डिवीजन का दर्जा मिला।

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