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हाॅटलाइन से जुड़ेगा सिविल अस्पताल का पोस्टमार्टम हाउस:पीएमओ ने पहले बने प्रपोजल की फाइल काे खुलवाया, बाेले- पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट बनवाकर आगे बढ़ाएंगे काम

पानीपत4 दिन पहले
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पानीपत. सिविल अस्पताल का पाेस्टमार्टम हाउस भवन। - Dainik Bhaskar
पानीपत. सिविल अस्पताल का पाेस्टमार्टम हाउस भवन।
  • पिछले साल भी डाॅक्टराें ने एक शव का खिड़की की राेशनी में लाकर किया था पाेस्टमार्टम

14 लाख की आबादी पर बने एक मात्र सिविल अस्पताल में शवगृह जल्द ही हाॅटलाइन (बिजली की बड़ी लाइन बिना कट की लाइन) से जुड़ सकता है। पहले से बने प्रपोजल की फाइल काे अब खुलवाया गया है। शवगृह के हाॅटलाइन से जुड़ने के बाद डाॅक्टराें के साथ-साथ लाेगाें काे भी राहत मिलेगी। क्याेंकि शवगृह में लाइट की उचित व्यवस्था नहीं हाेने के कारण लाइट जाने पर घंटों पोस्टमार्टम रुके रहते हैं। कई बार बिजली न हाेने के कारण पोस्टमार्टम में देरी हाेने के कारण विवाद हाे चुका है।

लाेगाेें काे अपने मृतक परिजनाें का पोस्टमार्टम कराने के लिए घंटाें इंतजार करना पड़ता है। अब प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर डाॅ. संजीव ग्राेवर ने पहले प्रपोजल की बनी फाइल काे खुलवाया है। पीएमओ ने कहा कि पीडब्ल्यूडी से बात करके आगे बढ़ाएंगे काम। कम खर्चा हुआ ताे इसे अस्पताल के बजट से जल्द कराया जाएगा। अगर खर्चा ज्यादा आया ताे उसका प्राेसेस पीडब्ल्यूडी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।

वहीं इलेक्ट्रिशियन काे भी दिखाया गया है। फिलहाल बस स्टैंड से शवगृह में बिजली आ रही है। पीएमओ डाॅ. संजीव ने बताया कि पोस्टमार्टम हाउस काे हाॅटलाइन से जाेड़ने के लिए पीडब्ल्यूडी से बजट का एस्टीमेट बनाएंगे। इसके बाद इसके पूरे प्राेसेस काे आगे बढ़ाया जाएगा।

6 जून 2020 काे हाे गया था विवाद
शवगृह में लाइट तक की उचित व्यवस्था नहीं हाेने के कारण लाइट जाने पर घंटों पोस्टमार्टम रुके रहते हैं। 6 जून 2020 काे बड़ा विवाद हाे गया था। पोस्टमार्टम हाउस में पोस्टमार्टम के लिए तीन शवों को रखवाया गया था। बुजुर्ग के पोस्टमार्टम के दौरान बीच में ही लाइट चली गई थी। डॉक्टर को स्ट्रेचर पर शव रखकर खिड़की के उजाले के सहारे पोस्टमार्टम करना पड़ा। इस दौरान डॉक्टर को मोबाइल टॉर्च का भी सहारा लेना पड़ा।

बाद में डॉक्टर ने अंधेरे में पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया था। मृतकों के परिजनों ने इस पर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने नेताओं और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से भी पोस्टमार्टम की गुजारिश की, लेकिन डॉक्टर ने अंधेरे में पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया था। स्वास्थ्य अधिकारियों को आनन-फानन में नई बैटरी मंगवानी पड़ी थी।

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