जल संकट:2 सीईटीपी और 3 एसटीपी से निकलने वाले पानी यमुना में फैला रहे प्रदूषण

पानीपतएक वर्ष पहले
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पानीपत. रिफाइनरी के पॉलिशिंग तालाब के ऊपर उड़ती पक्षियां। - Dainik Bhaskar
पानीपत. रिफाइनरी के पॉलिशिंग तालाब के ऊपर उड़ती पक्षियां।
  • जल शक्ति मंत्रालय, सीपीसीबी को भेजी रिपोर्ट
  • शहर में 6 एसटीपी, जिसमें 3 में बीओडी की मात्रा 10 एमजी प्रति लीटर की लिमिट से ज्यादा

सेक्टर-29 पार्ट-2 की डाइंग इंडस्ट्रीज से जुड़े 2 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के साथ ही 3 सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाला पानी यमुना को प्रदूषित कर रहा है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें इसका जिक्र है। इसके तहत सेक्टर-29 पार्ट-2 स्थित यूनिट-1 व 2 दोनों में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा तय मानक से ज्यादा निकल रही है।

दोनों यूनिट 21-21 एमएलडी की है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां से ट्रीट होकर जो पानी यमुना में जा रहा है, उसमें केमिकल की मात्रा तय लिमिट से ज्यादा है। एचएसपीसीबी के चेयरमैन की ओर से यह रिपोर्ट जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के सचिव और सीपीसीबी को भेजी है। यह दिसंबर 2020 की रिपोर्ट है। अब देखना है कि केंद्रीय बोर्ड और सरकार की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।

प्रदेश में 13 सीईटीपी चल रहे, पानीपत के दोनों प्लांट में नियमों का पालन नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक जगाधारी-यमुना नगर, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम और फरीदाबाद में फिलहाल 13 सीईटीपी चल रहे हैं। इसमें पानीपत के दो सीईटीपी हैं। दोनों में ही नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इस तरह से स्टेट बोर्ड की रिपोर्ट से स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण टीम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

पानीपत में 6 एसटीपी : जिसमें तीन में बीओडी ज्यादा

पानीपत में 120.8 एमएलडी क्षमता के 6 एसटीपी हैं। इसमें से तीन 25 एमएलडी सिवाह और 20 व 10 एमएलडी जाटल रोड पर नियमों से ज्यादा बीओडी निकल रहा है। वहीं, 25 एमएलडी सिवाह, 30 एमएलडी सेक्टर-19 यानी बरसत रोड और सेक्टर-6 का 0.8 एमएलडी वाले प्लांट ठीक चल रहे हैं।

पानीपत में 3 लोकेशन पर पीने योग्य नहीं ट्यूबवेल का पानी

इसी रिपोर्ट के मुताबिक पानीपत में 9 लोकेशन पर ट्यूबवेल से पानी के सैंपल लिए गए थे। इसमें से 3 रिपोर्ट फेल निकली है। यहां पर बोर्ड ने नोटिस लगाने को कहा है कि- यहां का पानी पीने योग्य नहीं है। इस बारे में बोर्ड के रीजनल अधिकारी कमलजीत ने कहा कि दो ही पाइंट एक सेक्टर-29 पार्ट-2 और जीटी रोड स्थित फौजी ढाबा के नजदीक ट्यूबवेल का पानी ठीक नहीं मिला है। अधिकारी ने एसटीपी और ईटीपी के ऑपरेशन्स को भी ठीक बताया।

रिफाइनरी ने किया सुधार तो तालाब में आए बाहरी पक्षी

इधर, एनजीटी में रिफाइनरी का मामला 19 मार्च तक स्थगित कर दिया गया। संयुक्त कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में रिफाइनरी के कई प्रयासों का जिक्र किया है, ताकि पर्यावरण सुधार हो। रिफाइनरी ने पर्यावरण सुधार के लिए प्रयास और तेज कर दिया है।

यही कारण है कि उसके पॉलिशिंग तालाब में अब बाहरी पक्षियाें ने डेरा जमा लिया है। रिफाइनरी ने 1273 घन मीटर प्रति घंटा की क्षमता वाले 4 अत्याधुनिक वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं। सभी चारों ईटीपी के पीएच, बीओडी, सीओडी और टीएसएस पैरामीटर की निगरानी शुरू कर दी है। इसके साथ ही सभी 65 चिमनियों का प्रोसेस हीटर, वॉयलर व भट्टियों में सुधार किया है।

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