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कवि सम्मेलन:‘त्याेहारों को भी फक्र हो, ऐसे अपने जीवन हों, रंगों को भी मान हो, ऐसे सुंदर अपने कर्म हों’

पानीपतएक महीने पहले
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  • जीवन एक बहता दरिया समूह की ओर से सप्तरंग कवि सम्मेलन

जीवन एक बहता दरिया समूह की ओर से होली के उपलक्ष्य पर सप्तरंग कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पानीपत के वरिष्ठ कवि हरगोविंद झांब और सह-अध्यक्षता केसर कमल शर्मा ने की। कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन भारत भूषण वर्मा असंध ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से किया गया।

कवि भारत भूषण वर्मा ने अपनी कविता सुनाते हुए कहा कि प्रेम के रंग जो रंग दे वही होली मुबारक है, सोचने का सही ढंग दे, वही सच्चा विचारक है। प्रो. कुलविंदर सिंह एहसास ने कहा कि त्योहारों को भी फक्र हो, ऐसे अपने जीवन हों, रंगों को भी मान हो, ऐसे सुंदर अपने कर्म हों। मोनिका कटारिया ने कहा कि इंद्रधनुषी रंगों में रंग गई धरा की डोली, अंबर हो गया लाल-गुलाबी देखो आई होली। इसी तरह परमानंद दीवान ने कहा कि होली की हर्षित बेला पर खुशियां मिलें अपार, यश कीर्ति सम्मान मिले और बढ़े सत्कार।

प्रीत से भर पिचकारी को कान्हा जी अबीर गुलाल उड़ाएं

आभा मुकेश साहनी ने कहा कि कान्हा जी खेल रहे होली, प्रीत से भर पिचकारी को कान्हा जी अबीर गुलाल उड़ाएं। हरगोविंद झांब ने कहा कि नफरत की दीवारें तोड़न का-ये पर्व है मिलजुल जाने का, द्वेष की होलिका दहन करने का,मन पावन कर जाने का।

हरिनाथ शुक्ल ने कहा कि तन महकने लगा, मन बहकने लगा। केसर कमल शर्मा ने कहा कि जो बुझाता आग वही जल रहा है पानी, बहुत ज्यादा बह गया है पानी, वे क्या समझेंगे पानी की कीमत जिनकी आंख का मर गया है पानी। इस माैके पर सहारनपुर से दीपा जैन मौजूद रहीं।

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