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  • The Government And Farmers Together Should Find A Solution To The Agitation, Because In The State 10 Times In 6 Months, The Situation Of Tension Has Been Created At Different Places.

ये जिद अच्छी नहीं:सरकार और किसान मिलकर आंदोलन का हल ढूंढें, क्योंकि प्रदेश में 6 माह में 10 बार अलग-अलग जगह तनाव के हालात बन चुके

पानीपत13 दिन पहले
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किसान संगठनों का दावा है कि इन 6 माह में अलग-अलग कारणों से 502 किसानों की मौत हो चुकी है। - Dainik Bhaskar
किसान संगठनों का दावा है कि इन 6 माह में अलग-अलग कारणों से 502 किसानों की मौत हो चुकी है।
  • कब मिलेगा समाधान: किसान आंदोलन में 4 माह से वार्ता बंद, 17 दिन बाद भी नहीं मिला पीएम को लिखे पत्र का जवाब
  • आंदाेलन में अब तक 500 किसानों की मौत- ये महज संख्या नहीं, इन परिवारों के अटूट रिश्ते खोने का दर्द भी है।

हरियाणा की सीमाओं पर किसान आंदोलन को 6 माह से अधिक वक्त बीत गया है। 132 दिनों से सरकार के साथ वार्ता भी ठप है। लंबे इंतजार के बाद 21 मई को संयुक्त मोर्चा ने प्रधानमंत्री को ईमेल भेज वार्ता शुरू करने की अपील की थी। लेकिन 17 दिन बाद भी कोई जवाब नहीं मिला। किसान संगठनों का दावा है कि इन 6 माह में अलग-अलग कारणों से 502 किसानों की मौत हो चुकी है।

मरने वालों में कोई किसी का पिता तो कोई परिवार का जवान बेटा था। किसी ने घर का इकलौता कमाऊ सदस्य खो दिया। इन परिवारों का दर्द कहीं दबकर रह गया है। दूसरी तरफ, जैसे-जैसे आंदोलन लंबा खिच रहा है, हरियाणा में आक्रोश लगातार उभरकर सामने आने लगा है। प्रदेश में 6 माह में 10 से ज्यादा बार ऐसे मौके आए, जब पुलिस और नेताओं के साथ किसानों के टकराव की स्थिति बनी। ऐसे में किसी भी पक्ष की जिद सही नहीं है। दोनों पक्षों को वार्ता शुरू करनी चाहिए, जिससे आंदाेलन का समाधान निकले और हालात सामान्य हो।

ये रहा है घटनाक्रम

  • तीन कृषि कानूनों के विरोध में नवंबर में आंदोलन शुरू हुआ था। पंजाब, हरियाणा और देश के अन्य हिस्सों के किसान दिल्ली के चारों ओर सीमाओं पर बैठे हैं।
  • अब तक सरकार और किसानों के बीच 12 दौर की वार्ता हुई है, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकला है। अंतिम बैठक जनवरी में हुई थी।
  • सरकार ने किसानों को कानून होल्ड करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन किसान संगठन तीनों कानूनों को रद्द करवाने और एमएसपी की गारंटी की मांग पर अड़े हैं।
  • कृषि कानूनों पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है और किसानों की राय लेने के लिए एक कमेटी भी बनाई हुई है। लेकिन यह सब अभी ठंडे बस्ते में है।
  • सरकार के साथ वार्ता विफल रहने के बाद 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के दौरान काफी हिंसा हुई थी। उसमें गिरफ्तार अधिकतर लोगों को जमानत मिल चुकी है।

जल्द समाधान इसलिए जरूरी: सत्तारूढ़ नेताओं के विरोध के चलते लगातार बिगड़ रहे हालात

10 जनवरी: करनाल के कैमला गांव में सीएम मनोहर लाल को पहुंचना था। उससे पहले ही कार्यक्रम में जमकर तोड़फोड़ हुई। किसानों और पुलिस में हंगामा हुआ। सीएम हेलीपैड पर नहीं उतर पाए। बाद में इसकी जिम्मेदारी भाकियू नेता गुरनाम चढ़ूनी ने ली और आगे भी ऐसे विरोध का ऐलान किया।

3 अप्रैल: रोहतक में सीएम मनोहर लाल को मस्तनाथ धाम में जाना था। इस दौरान किसानों ने जमकर विरोध किया। पुलिस ने इन्हें खदेड़ने की कोशिश की तो हाथापाई हुई। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया। विरोध में प्रदेशभर में सड़कों पर रात को ही जाम लगा दिया गया। मामला कई दिन बाद शांत हुआ।

16 मई: हिसार में सीएम कोविड अस्पताल का उद्घाटन करके निकल गए तो किसानों और पुलिस में झड़प हुई। कई किसान और पुलिसकर्मी घायल भी हुए। केस खत्म कराने को कई दिन हंगामा चला। इससे पहले 1 अप्रैल को डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला जब हिसार गए थे, तब उनका भी विरोध हुआ था।

1 जून: टोहाना में विधायक देवेंद्र बबली और किसानों के बीच तनातनी हुई। बाद में बबली ने माफी मांग ली। केस रद्द कराने को किसानों का प्रदर्शन जारी है। इससे पहले आंबेडकर जयंती या अन्य सरकारी कार्यक्रमों में भी सत्तारूढ़ नेताओं के विरोध में किसान पहुंचे। हर जगह पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

टोहाना में फंसा पेंच

केस रद्द कराने पर अड़े किसान, आज प्रदेशभर में करेंगे थानों का घेराव

टोहाना | विधायक देवेंद्र सिंह बबली व किसानों के बीच हुए प्रकरण में भले ही विधायक ने माफ़ी मांग ली है, लेकिन किसानों का थाने के बाहर धरना जारी है। यह धरना शनिवार सुबह से चल रहा है और रात को भी जारी रहा। किसान गिरफ्तार किए गए 3 किसानों को रिहा करने और केस रद्द करने की मांग पर अड़े हैं।

वहीं भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने ऐलान किया है कि टोहाना में पक्का मोर्चा लगाया जाएगा। यहीं पर झोपड़ी बनेंगी और ट्रैक्टर आएंगे। इसके अलावा यह भी निर्णय लिया गया कि 7 जून को 3 जिलों हिसार, जींद व फतेहाबाद के सभी किसान अपने-अपने क्षेत्र के थानों का नहीं, बल्कि टोहाना में थाने का घेराव करेंगे।

इसके लिए उक्त चारों जिलों को मैसेज भेज दिया गया है। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में किसान सोमवार को थानों का घेराव करेंगे। यह घोषणा किए जाने के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। हालांकि गिरफ्तार दो किसानों की देर शाम कोर्ट से जमानत मंजूर हो गई, लेकिन रविवार होने के चलते वे बाहर नहीं आए हैं।

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