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देर आए-दुरुस्त आए:दिल्ली पैरलल नहर पर बिंझाैल चाैक से सिवाह-डाहर चाैक तक 3 किमी में क्रश बैरियर लगाने का काम शुरू

पानीपत2 महीने पहलेलेखक: नरेश मेहरा
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दिल्ली पैरलल नहर किनारे शुरू हुआ ग्रिल लगाने का काम। - Dainik Bhaskar
दिल्ली पैरलल नहर किनारे शुरू हुआ ग्रिल लगाने का काम।
  • घने काेहरे में नहर में गिरते थे वाहन, हादसे राेकने काे पीडब्ल्यूडी दाेनाें साइड लगवा रहा क्रश बैरियर
  • बड़ी परेशानी, बारिश और साफ माैसम में भी आए दिन हाेती हैं नहर में वाहन गिरने की घटनाएं

दिल्ली पैरलल नहर किनारे की सड़क लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की है। इसलिए सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इसी विभाग की है। इसी कारण विभाग 2 कराेड़ रुपए खर्च कर नहर किनारे क्रश बैरियर (लाेहे की ग्रिल) लगवा रहा है, लेकिन विभाग की नींद 144 हादसाें में 11 लाेगाें की जान जाने के बाद खुली है। विभाग ने इस सड़क का निर्माण करीब 16 साल पहले कराया था, लेकिन नहर किनारे क्रश बैरियर नहीं लगाए थे। 2 साल में इस सड़क पर प्रतिदिन 25 हजार से ज्यादा वाहन राेजाना गुजरने का आंकड़ा पार हाे चुका है। इस अंतराल में आए दिन विभाग की लापरवाही के कारण काेई न काेई वाहन 25 फुट से ज्यादा इस गहरी नहर में गिरने के कारण हादसे हाेते रहे हैं।

2 साल से 25 हजार वाहन प्रतिदिन नहर बाईपास रोड से गुजरते हैं

  • 144 हादसे हुए
  • 11 लोगों की डूबने से गई जान
  • 25 फुट है नहर की गहराई

क्रश बैरियर और स्ट्रीट लाइट नहीं हाेना हादसाें का बड़ा कारण: नहर किनारे क्रश बैरियर न होने और स्ट्रीट लाइट के अभाव में अंधेरा होने से वाहन सीधे नहर में गिर रहे हैं। हाल ही में म्यूजियम-सिंचाई विभाग ऑफिस के पास तड़के एक ट्रैक्टर-ट्राॅली नहर में गिर गई थी। जिस पर सवार एक युवक ताे खुबड़ू झाल में मिला था। उसकी तलाश में शामली से 250 लोगों का हुजूम जुटा था।

गोहाना रोड से सिंचाई विभाग-म्यूजियम वाला 3 किमी लंबा रोड सबसे खतरनाक

गोहाना रोड से पुराना डाहर बाईपास रोड के बीच 2005 में मार्केटिंग बोर्ड ने सड़क बनाई थी। बाद में इसे पीडब्ल्यूडी को सौंप दिया गया। इसी हिस्से में 16 साल बीतने के बाद अब क्रश बैरियर लगेंगे। 3 किलोमीटर लंबी यह सड़क सबसे खतरनाक है। इसी पर सबसे अधिक हादसे होते हैं। दाेनाें साइड में 7-8 फुट ऊंची झाड़ियां उगने से खतरा बढ़ गया था। जरा सा अनियंत्रित होते ही वाहन नहर में गिरते हैं।

पंजाब शिवम इंटरप्राइजेज कंपनी करवा रही काम

गोहाना रोड से सिंचाई विभाग-म्यूजियम वाली सड़क पर पंजाब शिवम इंटरप्राइजेज कंपनी क्रश बैरियर लगवा रही है। इसके अलावा दिल्ली पैरलल नहर से मूनक चाैक तक भी एक अन्य कंपनी क्रश बैरियर लगाने की जिम्मेदारी साैंपी गई है।

15 साल पहले लगाए गए सभी क्रश बैरियर मिट्‌टी में दबे

पीडब्ल्यूडी में एसडीओ रामपाल जागलान ने बताया कि 1993 में गोहाना रोड व असंध रोड आरओबी की ट्रैफिक को जींद-गोहाना की ओर रास्ता देने के लिए नहर किनारे रोड बनाया था। 15 साल पहले लोहे के बैरियर लगाए थे जो धीरे-धीरे कर मिट्‌टी में दब गए।

कहां से कहां तक क्रश बैरियर जरूरी

  • असंध रोड से जाटल रोड: दोनों ओर रोड है, इसलिए दोनों ही ओर क्रश बैरियर लगाने की जरूरत है।
  • जाटल रोड से गोहाना रोड: नहर के पश्चिमी किनारे भी कॉलोनियां बन गई हैं। इसलिए रोहतक रेलवे लाइन किनारे गोशाला से लेकर जाटल रोड तक पश्चिमी किनारे भी बैरियर लगाने की जरूरत है।
  • गोहाना रोड से रोहतक बाईपास रोड: गोहाना रोड से लेकर पानीपत म्यूजियम होते हुए नहर पार करने वाले पुल तक पश्चिमी किनारे और पुल से राेहतक बाईपास तक दोनों नहरों के बीच सड़क के दोनों किनारे पर बैरियर की लगाने की जरूरत।
  • रोहतक बाईपास से खुबड़ू तक: रोहतक बाईपास से समालखा की ओर खुबड़ू तक खतरा दोगुना हो जाता है। इसलिए दोनों ओर क्रश बैरियर की जरूरत है।

3 कारणाें से समझें बैरियर की जरूरत

  • 6 बड़े स्कूलों के वाहन यहीं से गुजरते हैं: सेंट मैरी स्कूल, जीडी गोयनका, बाल विकास प्रोग्रेसिव, डीएवीपी थर्मल, डीपीएस रिफाइनरी व गुरुगोविंद सिंह पब्लिक स्कूल के वाहन इसी नहर रोड से गुजरते हैं।
  • 35 हजार लोगों का वास्ता: विराट नगर, विराट नगर फेस-3, शांति नगर, मुखीजा कॉलोनी, न्यू मुखीजा कॉलोनी, कश्यप काॅलोनी, आरके पुरम, भगत कॉलोनी, आनंद नगर, राजपूत कॉलोनी व देशवाल चौक के आसपास रहने वाले 35 हजार से अधिक लोगों का इस रोड से रोजाना का वास्ता है।
  • गांवों से शहर आने वाला मुख्य राेड: बिंझौल के साथ इसराना व समालखा के कई गांवों से शहर आने वाला मुख्य रोड यही है। दिल्ली आने-जाने के लिए भी अधकितर लोग इसी रास्ते का उपयोग करते हैं।

शुरू हाे चुका है काम : एसडीओ

बिंझाैल चाैक से सिवाह-डाहर सड़क वाले चाैक तक क्रश बैरियर लगाने का काम शुरू हाे गया है। यहीं इसकी सबसे बड़ी जरूरत भी थी। सुरक्षा व जरूरत काे ध्यान में रखकर काम कर रहे हैं। -रामपाल सिंह, एसडीओ, पीडब्ल्यूडी।

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