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काव्य ई- संगोष्ठी:भाषा प्रचार परिषद के तत्वावधान में तृतीय राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य ई- संगोष्ठी का आयोजन हुआ

पानीपत13 दिन पहले
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भारतीय संस्कृति एवं भाषा प्रचार परिषद के तत्वावधान में तृतीय राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य ई- संगोष्ठी का आयोजन हुआ।कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि हरगोविंद झांब कमल ने की। मुख्य अतिथि मेरठ के चरण सिंह स्वामी रहे। कार्यक्रम का संचालन भारत भूषण वर्मा, संयोजिका रचना गुप्ता रही।

रचना ने बताया कि भारतीय भाषा एवं संस्कारों की प्रतिष्ठा के लिए संस्था के संस्थापक रामेश्वर दयाल गोयल द्वारा साहित्य के माध्यम से यह विशेष मुहिम चलाई गई है। जिसमें देशभर के अध्यात्म में रूचि रखने वाले कवि विशेष रूप से योगदान दे रहे हैं। भारत भूषण ने कहा कि यह जीवन महाभारत संघर्ष यहां लेकिन नहीं शम, जीवन युद्ध को लड़ने वाले कौरव और पांडव हैं हम। कर्नाटक बेलगांव से डॉ. वसुधा कामत ने कहा कि मैं आवाज हूं हवा से भी तेज हूं, अग्नि सी लाल हूं, गुनहगारों पर टूट पड़ती हूं।

अन्य कवियों की मुख्य कविताओं के अंश

  • सुनील कुमार : कर्म हमारा सदैव ऐसा हो, धर्म के मार्ग पर चलता हो।
  • रेखा शर्मा : हो दिल में प्रेम ऐसा हम काम करेंगे, श्रीराम प्रभु के नाम का हम जाप करेंगे।
  • सुषमा सवेरा : चलो चलते हैं वृंदावन धाम रे, जहां रज-रज में कान्हा का नाम रे।
  • रेखा गिरीश : पृथ्वी और आकाश भी देखो कोई बना सके क्या इनको।
  • रेणु अब्बी : मेरे ख्वाबों के हिंदुस्तान, हम सब भारतीयों की शान।
  • डॉ. संध्या जैन : क्रांति लाएगी ऐसी, यह मेरा विश्वास है, कलम देश की बड़ी शक्ति है जितनी जिसके पास है।
  • ऋतु गुप्ता : आए अनेकों कष्ट पर रुकने न पाए साधना, मर जाएं अपने धर्म पर मन में रहे कामना।
  • राजेंद्र मिश्रा : मेरे ये दीपक कितने अनमोल थे, आंखों की भाषा को आंखों से तोलते।
  • दीनदयाल दीक्षित : कान्हा तुम ब्रज छोड़ मथुरा को भाए आज तेरे बिन लाल तेरी जननी दुखारी है।

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