आस्था:सच्ची मित्रता एक साधना का रूप लेकर हमारे मित्राें काे आत्मा से जाेड़कर रखती है : राधे राधे

पानीपत2 महीने पहले
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श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर आरती करती महिलाएं। - Dainik Bhaskar
श्री जगन्नाथ मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर आरती करती महिलाएं।
  • श्री जगन्नाथ मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन भक्ताें काे दिया संदेश

सच्ची मित्रता एक साधना का रूप लेकर हमारे मित्राें काे आत्मा से जाेड़कर रखती है। हम सबकाे किस तरह से मित्रता करनी है, यह तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के चरित्र से सीखो। चिंतन करो, क्याेंकि सीखा हुआ तो भूला जा सकता है, लेकिन चिंतन किया हुआ नहीं भुलाया जा सकता। इसलिए भगवान श्री कृष्ण के द्वारा सुदामा के लिए जो मित्रता के भाव थे, उनको अपने जीवन में उतार लेना चाहिए।

मित्रता भक्ति का ही दूसरा रूप है। जो अपने जीवन काल में मित्र को धोखा देता है, वह सदैव ही नर्क गामी रहता है। इसलिए मित्रता में धोखा जैसा विश्वासघात जैसा पाप ना हो तो ही अच्छा है। यह संदेश श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में चल रही श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर अग्रवाल वैश्य पंचायत एवं महिला संकीर्तन मंडल की श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन भागवत रसिक पंडित राधे राधे महाराज ने दिया।

मित्रता केवल मित्रता ही नहीं होती, बल्कि साधना होती है। मित्रता के अंदर जो व्यक्ति साधना स्वरूप मित्रता का निर्वाह करता है, वह व्यक्ति सच में ही एक साधक कहलाता है। भागवत कथा एवं पुराणों में ग्रंथों में कहा गया है सुदामा ताे जीता जागता एक युग है। सुदामा केवल गरीब ब्राह्मण नहीं है। सुदामा जीता जागता कुबेर है।

सुदामा केवल दरिद्र एवं धूल दुबला पतला ब्राह्मण ही नहीं है, अपितु सुदामा अपने आप में बाहुबली है। सुदामा एक साधना है। सुदामा एक सत्य है। सुदामा एक सदाचार है। सुदामा सत्यवादी है। सुदामा दानवीर व चरित्रवान है। भगवान श्री कृष्ण चारों धाम के मालिक थे।

कथा के समापन पर लगाया गया भंडारा

मानव जीवन में दुख पर गोस्वामी तुलसी दास ने कहा है कि जीव जब प्रभु से अपने को अलग कर लेता है। तभी दुख शुरू हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु ने हर किसी को दिव्य ज्योति प्रदान की है। संतों के सानिध्य में जो लोग जागृत करते हैं, उनके भीतर दिव्य प्रकाश का उदय हो जाता है। कथा के समापन पर भंडारा लगाया गया। इस अवसर पर मंदिर सभा प्रधान राजिंद्र गुप्ता, वेद शरामा, तिलकराज मिगलानी, वीरेंद्र गुप्ता, ओम प्रकाश विरमानी, भगवत दयाल शर्मा, जयपाल कंसल, दलीप गुप्ता, सुरिंद्र गुप्ता, दिनेश मित्तल, लालचंद तायल, प्रदीप तायल, हितेंद्र कंसल, योगेश गुप्ता, भूषण गुप्ता, रजनीश गुप्ता, भगवान दास कंसल, वेद पराशर व अनिल शर्मा माैजूद रहे।

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