किसान आंदोलन:फ्री वाहन गुजरने से पानीपत के दो टोल प्लाजा को लगा 28 लाख का फटका

पानीपत2 वर्ष पहले
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पानीपत के L&T टोल प्लाजा से फ्री गुजरते वाहन। - Dainik Bhaskar
पानीपत के L&T टोल प्लाजा से फ्री गुजरते वाहन।
  • शुक्रवार रात 12 बजे बंद कर दिया था L&T टोल प्लाजा, 20 लाख का नुकसान
  • शनिवार सुबह 10:30 बजे बंद किया गया डाहर टोल प्लाजा, 8 लाख का फटका

किसान आंदोलन के चलते पानीपत के दो टोल प्लाजा को करीब 28 लाख रुपए का फटका लगा है। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने पानीपत के L&T टोल प्लाजा को शुक्रवार रात 12 बजे तो डाहर टोल प्लाजा को शनिवार सुबह 10:30 बजे से शाम 5 बजे तक फ्री करा दिया। इस बीच किसानों के साथ सभी वाहन बिना टोल टैक्स दिये गुजरे। टोल से गुजरने के दौरान वाहनों की स्पीड अधिक होने के कारण फास्टटैग से भी वाहन चालकों के पैसे नहीं कटे।

किसान आंदोलन में शामिल किसान नेताओं ने शनिवार को देशभर के टोल प्लाजा को फ्री कराने का ऐलान किया था। जिस पर भारतीय किसान यूनियन के पानीपत जिला प्रधान कुलदीप बलाना के नेतृत्व में किसानों ने शनिवार रात 12 बजे ही दिल्ली-रोहतक हाईवे स्थित L&T टोल प्लाजा को फ्री करा दिया। किसान नेता शनिवार रात से शुक्रवार शाम 5 बजे तक टोल पर ही डटे रहे। ताकि टोल कर्मी दोबारा टोल वसूलना शुरू न कर दें। L&T टोल प्लाजा के मैनेजर योगेश कुमार ने बताया कि टोल फ्री रहने से करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। शुक्रवार रात 12 बजे से शनिवार शाम बजे तक टोल से 30 हजार से अधिक वाहन गुजरते।

शनिवार सुबह किसान नेता पानीपत-रोहतक हाईवे स्थित डाहर टोल प्लाजा पहुंचे। मैनेजर से बातचीत के बाद किसानों ने 10:30 बजे टोल फ्री करा दिया। आसपास के गांव के किसानों ने टोल पर डेरा डाल लिया। टोल कर्मियों ने आश्वासन दिया कि फास्टटैग के सेंसर बंद कर दिए हैं। अब फास्टटैग से भी रुपए नहीं कटेंगे। किसान टोल से गुजरने वाले वाहन चालकों से फास्टटैग से टैक्स कटने की जानकारी भी लेते रहे। डाहर टोल को फ्री रहने से करीब 8 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इस दौरान यहां से करीब 17 हजार वाहन गुजरते।

पंजाब से दिल्ली पहुंचे किसानों के 1100 वाहन
शनिवार को पानीपत टोल प्लाजा से दिल्ली किसान आंदोलन में जाने के लिए करीब 1100 वाहन गुजरे। इनमें 700 ट्रैक्टर-ट्राली, 200 कारें और 200 के करीब ट्रक शामिल थे। पानीपत टोल प्लाजा पर स्थानीय लोगों ने पंजाब से पहुंचे किसानों को फल, बिस्किट और चाय उपलब्ध कराई। किसानों के साथ स्थानीय कर्मचारी संगठनों ने नारेबाजी कर किसानों का हौंसला बढ़ाया।