कार्रवाई की तैयारी:साहबी बैराज में दूषित पानी छोड़ने को लेकर 7 ट्रीटमेंट प्लांट पर अभियोग चलाने की मंजूरी

रेवाड़ी2 महीने पहले
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  • प्रदूषित पानी के चलते खराब हो रहा है भूजल

साहबी बैराज मसानी में रेवाड़ी जिले के 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा ट्रीटमेंट के नाम पर छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी से फैलने वाले प्रदूषण को लेकर गाज गिर सकती है। मुख्य सचिव और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर धारूहेड़ा क्षेत्रीय अधिकारी दिनेश यादव द्वारा कार्रवाई करते हुए इन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों पर जुर्माना किए जाने को लेकर मुख्यालय से अनुमति मांगी है।

इसी के साथ प्रदूषित पानी को साहबी में छोड़े जाने को लेकर विभाग द्वारा अभियोग चलाए जाने की अनुमति भी गुरुवार को मुख्यालय से मिल गई। अब जल्द ही इन सभी प्रदूषित पानी को साहबी मे छोड़ने वाले सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांटो पर केस चलाया जाएगा। इनमें ज़िम्मेदार अधिकारियों के नाम सहित सभी रिपोर्ट के साथ तैयारी पूरी की जा चुकी है।

सूची में सातों ट्रीटमेंट प्लांट का नाम है। इनमें 16 एमएलडी नसियाजी रोड रेवाड़ी, 8 एमएलडी नसियाजी रोड रेवाड़ी, 6.5 एमएलडी कालूवास, 9.5 एमएलडी खरखड़ा, 3 एमएलडी कोसली, 5 एमएलडी धारूहेड़ा व 3 एमएलडी बावल शामिल हैं।

पानी इतना दूषित कि यहां के पेड़-पौधे तक सूख गए
सरकार को भेजी गई शिकायत में शिकायतकर्ता ने कहा कि दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर स्थित साहबी बैराज में सैकंडों एकड़ खाली भूमि पर जिले के विभिन्न सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों का प्रदूषित पानी डाला जा रहा। इससे प्रदूषित पानी बहुत अधिक मात्रा में भरा खड़ा हुआ है।

एक जगह पर भरे खड़े दूषित पानी की वजह से आसपास के गांवों व खेतों का भूमिगत जलस्तर खराब हो चुका है। घरों के ट्यूबवेल व नलकूपों से बदबूदार पानी निकल रहा है। इसी के साथ ही नदी की भूमि में भरे इस प्रदूषित पानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह जितने क्षेत्र में भरा हुआ है वहां पर पहले बहुत घने हरे भरे पेड़ खड़े हुए थे, लेकिन अब इस पानी के सम्पर्क में आकर पेड़ पौधे बिल्कुल सूख कर खत्म हो चुके हैं।

दुर्गंध की वजह से आसपास के किसानों व ग्रामीणों को जलवायु प्रदूषण से रूबरू होना पड़ रहा है। मांग की गई कि इस जगह पर इन विभिन्न सीवरेज ट्रीटमैंट प्लाटों से छोड़े जा रहे इस प्रदूषित पानी की जांच कराई जाए व इसपर रोक भी लगाई जाए अन्यथा यह जगह जल्द ही बंजर बन जाएगी। आसपास के गांवों खरखड़ा, खलियावास, भटसाना, ततारपुर, निखरी, मसानी, रसगण, डूंगरवास, तितरपुर, अलावलपुर व धारूहेड़ा आदि क्षेत्र में खराब होते भूजल से महामारी फैलने की संभावना बढेगी।

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