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जान पर भारी ना पड़ जाए अनदेखी:गर्ल्स कॉलेज में छत का प्लास्टर गिरा, असिस्टेंट प्रोफेसर बाल-बाल बची, 10 साल से नहीं हुई बिल्डिंग की मरम्मत

रेवाड़ीएक महीने पहले
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कॉलेज की जर्जर बिल्डिंग। - Dainik Bhaskar
कॉलेज की जर्जर बिल्डिंग।
  • बिल्डिंग बनने से अब तक सुध नहीं, बिल्डिंग को बने हुए 10 साल हो गए, कॉलेज प्रबंधन कई बार लिख चुका पत्र

शहर के सेक्टर-18 स्थित गर्ल्स कॉलेज में मंगलवार की सुबह एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बीएससी प्रथम वर्ष मेडिकल संकाय की कक्षा में तीसरे पीरियड के दौरान अचानक छत का प्लास्टर भरभराकर गिर गया। जब तक छात्राओं ने शोर मचाया, तब तक काफी मलबा गिर चुका था।

कक्षा में पढ़ा रही असिस्टेंट प्रोफेसर इस घटना में बाल-बाल बच गई। प्लास्टर गिरने से छात्राओं में हड़कंप मच गया। हादसे के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर और छात्राएं भी कई देर तक सहमी रहीं। छात्राओं का कहना था कि कुछ कमरों की खस्ता हालत है। बारिश के समय इन कमरों का प्लास्टर अक्सर गिर जाता है।

बता दें कि गर्ल्स कॉलेज की बिल्डिंग को बने हुए 10 साल हो गए, लेकिन तब से लेकर अब तक कोई मरम्मत नहीं हुई है। इस कारण बाहर से देखने पर तो ऐसा लगता है कि बिल्डिंग को बने हुए वर्षों बीत गए। इस घटना की सूचना मिलने पर प्रिंसिपल और अन्य प्रोफेसर भी कक्षा में पहुंचे और मामले की जानकारी जुटाई।

इधर, कॉलेज प्रबंधन के अनुसार बिल्डिंग की मरम्मत के लिए पीडब्ल्यूडी को पिछले वर्ष भी पत्र लिखा था, लेकिन इस तरफ कोई संज्ञान नहीं लिया। इससे पहले भी मरम्मत के लिए अवगत कराया जाता रहा है।हॉस्टल भी होने लगा जर्जर | कॉलेज के हॉस्टल में फिलहाल 42 छात्राओं का रजिस्ट्रेशन है।

परीक्षा के दौरान दूर-दराज से आने वाली छात्राएं यहां ठहरती भी हैं, मगर हॉस्टल की बिल्डिंग का भी कुछ ऐसा ही हाल है। हॉस्टल की दीवारों से भी प्लास्टर गिरता रहता है। छात्राओं ने जिला प्रशासन से बिल्डिंग की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।

दीवारों का गिरने लगा प्लास्टर, बिल्डिंग होने लगने लगी जर्जर
जानकारी के अनुसार वर्ष 2012 में कॉलेज की बिल्डिंग में कक्षाएं लगनी आरंभ हो गई थी, लेकिन उस समय भी भवन निर्माण कार्य चल रहा था। कॉलेज की बिल्डिंग व हॉस्टल वर्ष 2016 में हेंडओवर हुए थे। लेकिन तब से ही प्लास्टर गिरने की शिकायतें होने लगी थी। कई जगह से तो बिल्डिंग ऐसी लगती है कि कितने वर्षों पुरानी है।

भवन निर्माण के दौरान भी अनियमितता बरतने के आरोप लगे थे। कई बार जब प्लास्टर गिरा तो इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया भी गया, लेकिन इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। अब पिछले 10 सालों में बिल्डिंग की मरम्मत तो दूर की बात रंग-रोगन भी नहीं कराया गया है। बिल्डिंग की छत के साथ ही दीवारों का भी प्लास्टर गिरने लगा है।

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