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पाठ:सच्चे मन से सुमिरन करते हुए घर पर ही परमात्मा से हो जाता है मिलन

बहादुरगढ़एक महीने पहले
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श्रद्धा और भाव ही सच्ची भक्ति है। अगर आपका मन कुछ और कहता है और वाणी कुछ और उच्चारण करती है तो समझ लीजिए कि भक्ति मार्ग से आप विमुख हो चुके हैं। संत शिरोमणी सतगुरू गरीबदास जी महाराज के वंशज कमल सागर ने भक्तों को प्रवचन देते हुए ये बात कही है। शहर के शक्ति नगर में संत शिरोमणी सतगुरू गरीबदास जी महाराज की वाणी का अखंड पाठ रविवार से शुरू हो गया है।

भक्त अजीत सिंह धनखड़ के निवास पर तीन दिनों तक चलने वाले श्री ग्रन्थ साहिब के अखंड पाठ की शुरूवात कमल सागर जी ने की। वाणी पाठ के शुभारंभ अवसर पर भक्तों ने दरबार में मत्था टेक कर दुआएं भी मांगी हैं। इस अवसर पर मौजूद संगत को प्रवचन करते हुए कमल सागर ने कहा कि संत गरीबदास जी महाराज ने अपनी वाणी के जरिए भी सदाचार और नैतिकता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि भगवान की खोज में इधर उधर भटकने से बेहतर है मन के अंदर ही भगवान की खोज की जाए। सतगुरू गरीबदास जी महाराज ने भी अपनी वाणी में कहा है कि ‘श्वासा ही में सार पद, पद में श्वासा सार।

महंत दयासागर मंगलवार को वाणी भोग करेंगे
दम देही का खोज कर, आवागवन निवार।’ उन्होंने कहा कि सतगुरू गरीबदास जी महाराज ने बताया कि शरीर में जो श्वास है उसी श्वास में जीवात्मा और परमात्मा दोनों का समावेश है। श्वास में ही जीवन का सार छुपा हुआ है। इसलिए अपने मन के अंदर मौजूद परमात्मा की खोज करना ही मोक्ष को हासिल करना है। तीन दिवसीय वाणी पाठ का भोग मंगलवार को लगाया जाएगा। वाणी पाठ के भोग अवसर पर छुड़ानी धाम के महंत दयासागर जी संगत को अपना प्रवचन देंगे।

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