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कृषि कानूनों का विरोध:किसानाें की संख्या बढ़ाने के लिए एक ट्रैक्टर और 10 किसान लाने का आह्वान

बहादुरगढ़12 दिन पहले
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कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन के 6 महीने से अधिक हो चुके है। पिछले 6 महीनों से किसानों का टिकरी बॉर्डर आंदोलन जारी है। रविवार को भी सभा हुई, लेकिन अधिकतर किसान टोहाना गए हुए ऐसे लोगों को बताया गया। अब टिकरी बॉर्डर पर किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वही किसानों का टोहाना पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन जारी है। वहीं बॉर्डर पर किसानों की संख्‍या बढ़ाने के लिए योजना बनाई जा रही है। वही किसानों की संख्‍या अब बढ़नी शुरू हो गई है। पंजाब लौट गए किसान अब आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए वापिस आ रहे है। किसानों से आह्वान किया जा रहा है कि वे इस बार लंबे समय के लिए तैयारी कर आएं।

किसान संगठनों ने बॉर्डरों पर किसानों की संख्‍या बढ़ाने के लिए अब एक ट्रैक्‍टर और 10 किसान लाने का आह्वान किया है। सभी किसान संगठनों ने अपील की है अब इसी के अनुसार अनुसार बॉर्डर पर आएं। संगठन के अनुसार इस समय किसान आपने कामों से फ्री है। इसलिए लंबे समय रुकने के लिए तैयार होकर आएगा। इसके साथ ही किसान अपने कामों के लिए वापस लौटते रहेंगे। जिससे आंदोलन के साथ साथ घर की जिम्‍मेदारी भी निभाते रहें। किसान नेताओ का दावा है कि अब किसानों की संख्‍या बॉर्डरों पर बढ़नी शुरू हो जाएगी। इससे पहले भी किसान नेता किसान आंदोलन के न खत्म करने का दावा कर चुके है।

टिकरी बॉर्डर पर सभा में बलदेव सिंह कोंडा बीकेयू पंजाब की अध्यक्षता में टिकरी बॉर्डर के संयुक्त मोर्चा कमेटी के साथ मनसौर एमपी में शहीद हुए सिखों को 2 मिनट के लिए मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं में काका सिंह लोंगोवाल बीकेयू पंजाब,जगबीर सिंह झज्जर, बलदेव सिंह पंजाब, प्रकट सिंह बीकेयू पंजाब व हरप्रीत हनी पंजाब से आए नेताओं ने किसानों को संबाेधित किया। वहीं रतिया से आये एक जत्था यहां आकर किसान आंदोलन का समर्थन किया है।

कानून रद्द हाेने तक भाजपा के खिलाफ खड़े रहेंगे किसान
गौरतलब है कि किसान नेताओं ने 5 जून को किसान नेता कृषि कानून बिल को एक साल पूरा होने पर सम्पूर्ण क्रांति दिवस और खेती बचाओ-कॉर्पोरेट भगाओ दिवस मनाया था। शनिवार को संपूर्ण क्रांति दिवस मनाते हुए किसान संगठनों ने शहर भर में रैली निकाल कर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। इस दौरान कानूनों की प्रतियां भी जलाई गईं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई थी। शहर भर में प्रदर्शन करते हुए रैली निकाल कर किसान लघु सचिवालय पहुंचे थे।

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