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टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदाेलन का 124वां दिन:बुजुर्ग महिलाओं ने किसानों पर बरसाए कोलड़े, धरने में डटे रहने की अपील की

बहादुरगढ़एक महीने पहले
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होली पर्व पर किसानों की सभा में कोड़े बरसातीं महिलाएं व पानी डालते किसान। - Dainik Bhaskar
होली पर्व पर किसानों की सभा में कोड़े बरसातीं महिलाएं व पानी डालते किसान।
  • किसानों का प्रदर्शन जारी, टिकरी व ढासा बॉर्डर पर खेला फाग

होली के मौके पर पंजाब व हरियाणा के किसान टिकरी बॉर्डर पर रोजाना की तरह से भाषण कर रहे थे कि तभी कुछ बुजुर्ग महिलाओं का जत्था स्टेज पर पहुंच गया व वहां बैठे किसानों पर कोलड़े मारने लगी व धरने में डटे रहने की अपील की। हरियाणा के किसान तो समझ गए कि भाभियों व चाचियों के हाथ आज पिटाई तय है क्योंकि देख रहे सैकड़ों किसानों के सामने स्टेज से भाग कर भी नहीं जा सकते।

स्टेज पर बैठे किसानों के सामने बुर्जुग महिलाओं के हाथों पिटने के सिवा कोई चारा नहीं था। इसके बाद महिलाओं के जत्थों ने हरियाणा के किसानों की खापों के टेंटों में जाकर वहां हुक्का गुड़गुड़ा रहे किसानों की भी जमकर क्लास ली।

किसानाें ने स्टेज पर की सभा

दोपहर तक टिकरी बाॅर्डर व आसपास के क्षेत्र में जहां-जहां भी किसानों के पंडाल लगे थे वहां-वहां महिलाओं के जत्थों ने पहुंचकर वहां बैठे किसानों पर होली के इस मौके पर जमकर कोलड़ों की बरसात की। कुछ स्थानों पर तो किसानों ने भाग कर जान बचाई पर स्टेज पर बैठे किसानों के पास भागने को भी कोई स्थान नहीं बचा था इस कारण वे बैठे-बैठे केवल महिलाओं के हाथों से कोलड़ों की होली भरी चोट अपनी पीठ पर सहन करते दिखाई दिए। बाद में महिलाओं को किसी तरह से आग्रह करके स्टेज से उतारा जा सका।

होली के मौके पर महिलाएं देवरों को कोलड़ों से क्यों पीटती हैं यह पंजाब के किसानों ने बार बार पूछा। यहां के किसानों ने पंजाब के किसानों को समझाया कि बहादुरगढ़ में होली मनाने का ख़ास अंदाज़ है। होली पर देवर भाभी को रंगने का प्रयास करते हैं और भाभी देवर की पीठ पर कोड़े मारती है। देवर भाभी से नेग भी मांगते हैं।

इसके पीछे भी पुरानी कहावत है कि देवरों को देश सेवा में भविष्य में होने वाले युद्ध के लिए एक तरह से तैयार किया जाता है। जवां हो रहे युवक सेल्फ डिफेंस भी सीखते हैं वह भी धर्म के मार्ग पर मनाई जा रही होली के माध्यम से। बुधवार को भी किसानों ने स्टेज पर सभा की व रोजाना की तरह से आज भी दिन भर सरकार से कृषि कानून को रद्द करने की मांग की।

कृषि कानूनों को जल्द से जल्द रद्द करने की मांग : भाजपा सरकार कोरोना महामारी में भी असम, बंगाल आदि में लाखों की भीड़ जुटाकर भाजपा अपनी राजनीति चमका रही है। नप के पूर्व चेयरमैन रवि खत्री ने कहा कि वहां पर क्या कोरोना का प्रकोप खत्म हो गया है। सरकार झूठे वादे व ढकोसले करती है। कोरोना के नाम पर लोगो को भाजपा सरकार गुमराह कर रही है।

कांग्रेस नेता रवि खत्री ने कहा कि कोरोना महामारी है तो पूरे देश में है अन्यथा कहीं भी नहीं है। यहां भी सरकार किसानों के साथ- साथ हर वर्ग की अनदेखी कर रही है। पूर्व चेयरमैन रवि खत्री ने कहा कि कोरोना की वजह से उद्योग धंधे ठप पड़े हुए है। सरकार को मजदूरों, दुकानदारों, व्यापारियों व गरीब आदि लोगों को आर्थिक पैकेज देकर राहत पहुंचानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई महीने से किसान अपनी मांगो के लिए बैठे हुए है। भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने आंदोलन में शहादत दी है उनको उचित मुआवजा हर परिवार को सरकारी नौकरी देनी चाहिए। रवि खत्री ने कहा कि 3 कृषि कानूनों को सरकार को जल्द से जल्द रद्द करना चाहिए। इस अवसर पर जोगेंद्र उर्फ बबलू, विजय शर्मा, अरुण गहलावत, नीरज राठी, राजेश पहलवान, अमित छिल्लर, जगदीश छिकारा आदि मौजूद रहे।

किसानों ने खेला फाग व एकजुट रहकर विरोध का लिया संकल्प

बादली, ढासा बॉर्डर पर धरना दे रहे किसानों ने होली व दुल्हंडी के अवसर पर एक दूसरे को रंग, गुलाल, अबीर लगाकर एक दूसरे के साथ दुल्हंडी का पावन पर्व खेला। किसानों ने धरने पर संकल्प लिया कि जब तक तीन कृषि कानून रद्द नहीं कर दिया जाते तब तक एकजुट रहकर कृषि कानूनों का विरोध किसान करते रहेंगे।

धरने पर दीपक धनखड़ कासनी ने कहा कि चौधरी छोटूराम ने हमें खेती का मालिकाना हक दिलवा था। चौधरी छोटू राम के किसानों के प्रति किए गए कामों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। चौधरी छोटूराम ने जो किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिलाया यह किसान विरोधी सरकार उसी मालिकाना हक को छीनकर पूंजीपतियों को देना चाहती है, जोकि किसानों को किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब तक तीन कृषि कानून रद्द नहीं होंगे तब तक हम अपने घर वापस नहीं जाएंगे। सरकार हमें जाति, धर्म, मजहब के नाम पर लड़वा कर इस आंदोलन को समाप्त नहीं कर सकती। इस अवसर पर इंटक के जिला अध्यक्ष सरजीत गुलिया ने कहा कि फाग के मौके पर ढासा बॉर्डर के धरने पर जिस प्रकार से सभी जातियों के किसानों ने एक साथ मिलकर फाग खेला है।

एक दूसरे को रंग, गुलाल लगा होली खेलना उनकी एकता और प्रतिबद्धता के संकल्प को दिखाता है। सभी ने मिलकर कृषि कानूनों को रद्द कराए बिना घर न जाने का संकल्प भी लिया है। दुल्हंड़ी के मौके पर ढासा बॉर्डर के धरने पर किसानों की भारी संख्या देखने को मिली।

किसानों ने एक दूसरे के साथ दुल्हंड़ी खेली, महिलाओं ने कोड़ों के साथ किसानों की पिटाई की। किसानों का प्यार-प्रेम, एकता, भाईचारा त्यौहार के इस पावन पर्व पर देखते ही बन रहा था। इस मौके पर एडवोकेट सतवीर गुलिया दरियापुर, शैलेश ठेकेदार मुंडाखेड़ा, मुकेश मुंडाखेड़ा, कप्तान लाडपुर व अन्य अनेक समाजसेवी व किसान नेता मौजूद रहे।

ढासा बाॅर्डर पर एक दूसरे के साथ होली खेलते बुजुर्ग किसान।
ढासा बाॅर्डर पर एक दूसरे के साथ होली खेलते बुजुर्ग किसान।
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