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टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन का 161वां दिन:किसानों ने प्रधानमंत्री मोदी व पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह की तुलना, पूर्व कैबिनेट मंत्री अजीत सिंह के निधन पर मौन रखा

बहादुरगढ़2 महीने पहले
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टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने बंगाल की तर्ज पर उत्तरप्रदेश में जीत हासिल करने का किसानों से आह्वान करते हुए। - Dainik Bhaskar
टिकरी बॉर्डर पर किसानों ने बंगाल की तर्ज पर उत्तरप्रदेश में जीत हासिल करने का किसानों से आह्वान करते हुए।
  • किसानों ने झोपड़ियों के पास फायर ब्रिगेड की गाड़ी व एंबुलेंस खड़ा करने की मांग की

टिकरी बार्डर पर शुक्रवार को किसानों ने चौधरी चरण सिंह व नरेंद्र मोदी की तुलना की इसी कारण किसान चौ. चरण सिंह को पंसद करते है। आज चौ. चरण सिंह के बेटे चौ.अजीत सिंह के निधन पर दो मिनट का मौन धारण किया और श्रद्धाजंलि दी।

इस मौके पर किसानों ने झोपड़ियों के पास फायर ब्रिगेड व एबुलेंस तैनात करने की मांग की। किसानों ने कहा कि आंदोलन में लकड़ियों के अस्थाई मकान बनाए हुए है।

शार्ट-सर्किट से आग, किसानाें ने पाया काबू

शुक्रवार देर रात टिकरी बॉर्डर पर तारों में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी जिस आग को किसानों ने मुश्किल से काबू पाया।

हम प्रशाशन से गुहार लगाते है की टीकरी बॉर्डर पर एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड की सुबिधा दी जाए ताकि कोई अप्रिय घटना न घट सके। किसानों ने कहा कि इस कोरोना की बीमारी के जिम्मेवारी देश के प्रधानमंत्री है जो हमारे देश मे कोरोना बीमारी का भय पैदा कर रहा है देश मे ऑक्सीजन की कमी हो रही है हमारे देश मे शिक्षा और स्वास्थ्य की कमी है। इस आंदोलन के दौरान किसानों ने एक बार फिर से दिल्ली के बार्डर पर दस्तक देने के लिए भारी संख्या में पहुंचने के लिए 10 व 12 मई को खनौरी व शंंभु बार्डर पर पहुंचने का आह्वान को दौहराया है। 8 मई को हरियाणा व पंजाब में किसान लॉकडाउन का खुलकर विरोध व दुकानदार खोलेंगे दुकानें। जिससे सरकार को होश आ सके।

जत्थों में 10 व 12 मई को पहुंचेगे किसान

इसी तरह से 10 मई व 12 मई को खनौरी व शंभु बॉर्डर के रास्ते दिल्ली की सीमाओं पर पहुचेंगे किसानों के जत्थे पहुंचेंगे। सरकार से बातचीत को लेकर किसान आशावादी पर सरकार साफ नियत से बातचीत शुरू करें तो अच्छा होगा। किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री के हाथ में पूरे देश की कमान है जो किसी की नही सुनता। वह हिटलर जैसा है। अब देश की अर्थव्यवस्था डामाडोल हो चुकी है। मोदी सरकार अब भी लाशो पर राजनीति हो रही है आम जनता से इसका कोई सरोकार नहीं है। हमारे देश में अब लोग बिना ऑक्सीजन, बिना दवाई, बिना अस्पताल मर रहे है यह रैलियो में बिजी था।

आंदोलन में अभी तक 350 से ज्यादा किसानों की हो चुक मौत

हमारे आंदोलन में भी 350 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके है। इस सरकार ने लोगो की जिंदगी के लिए कोई अस्पताल नया नहीं बनाया। यह नया संसद भवन बना रहा है जिसकी लागत 1300 करोड़ है यह जनता के लिए खर्च हो सकता था। आरएसएस वो पार्टी है जो हमेशा लोगों की दुश्मन रही है व साम्राज्यवाद की हिमायती रही है। आज आरएसएस के सभी उच्च पद पर है और साम्राज्यवाद को बढ़ावा दे रहे है। मोदी को बहम था कि यह किसान दो चार महीनों में वापिस चले जाएंगे पर हुआ उल्टा किसान मोदी को ही वापस कर देंगे।

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